
कर्नाटक में कमजोर दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के कारण सूखे का खतरा बढ़ गया है. राज्य के कई हिस्सों में सामान्य से काफी कम बारिश हुई है, जिससे खेती, जलाशयों और किसानों पर गंभीर असर पड़ा है. सरकार ने हालात पर नजर रखते हुए केंद्र से टीम भेजने की मांग की है.
राज्य सरकार के अनुसार, कर्नाटक के 31 में से 21 जिलों में भारी बारिश की कमी दर्ज की गई है. जून महीने में सामान्य 199 मिमी की जगह केवल 116 मिमी बारिश हुई, यानी करीब 42 प्रतिशत कम. यह पिछले 50 वर्षों का चौथा सबसे सूखा जून रहा.
मालनाड, तटीय कर्नाटक और दक्षिणी हिस्सों में सबसे ज्यादा बारिश की कमी देखने को मिली. कावेरी नदी के जलग्रहण क्षेत्र कोडागु में शुरुआत में 63 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई. इससे जल संसाधनों पर भी दबाव बढ़ गया है.
बारिश नहीं होने से खरीफ सीजन की बुआई प्रभावित हो रही है. खेत सूखे पड़े हैं और किसान बारिश का इंतजार कर रहे हैं. कई जगहों पर फसलें सूखने लगी हैं, जिससे किसानों की चिंता लगातार बढ़ रही है.
कोलार जिले के थोतली गांव में मॉनसून की कमी का असर साफ दिखाई दे रहा है. यहां समय पर बारिश नहीं होने के कारण खेती का काम लगभग ठप हो गया है और किसान नई फसल बोने का इंतजार कर रहे हैं.
कोलार जिले में करीब 85,801 हेक्टेयर खेती योग्य जमीन है, लेकिन अब तक केवल 2,200 हेक्टेयर में ही बुआई हो सकी है. शुरुआती बारिश के बाद किसानों ने खेत तैयार किए थे, लेकिन लंबे सूखे ने काम रोक दिया.
बारिश नहीं होने से अरहर, मूंगफली, रागी, मक्का, लोबिया और सेम जैसी फसलों की बुआई प्रभावित हुई है. किसानों का कहना है कि अगर जल्द बारिश नहीं हुई तो उत्पादन पर बड़ा असर पड़ सकता है.
कोलार जिले की लगभग 78 हजार हेक्टेयर जमीन पूरी तरह बारिश पर निर्भर है. ऐसे में मॉनसून कमजोर पड़ने से हजारों किसानों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है.
थोतली गांव के किसान रमेश का कहना है कि मई और जून दोनों महीनों में उम्मीद के मुताबिक बारिश नहीं हुई. उन्होंने बताया कि जिले के करीब 70 प्रतिशत किसान पूरी तरह बारिश पर निर्भर हैं और अब अगस्त की बारिश ही फसलों को बचा सकती है.
सूखे का असर केवल खेती तक सीमित नहीं है. पशुपालकों को चारे और पानी की कमी का सामना करना पड़ रहा है. किसान नागवेणी का कहना है कि जानवरों के लिए भी पानी नहीं बचा है और सरकार को तुरंत मदद करनी चाहिए.
बारिश की कमी के बीच बागवानी किसानों की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं. टमाटर के दाम गिर गए हैं, जबकि आम की कीमत कई जगह केवल 3 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है. इससे किसानों की आमदनी पर बड़ा असर पड़ा है.
मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने सभी जिलों के अधिकारियों के साथ बैठक कर संभावित सूखे की तैयारी शुरू करने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने कहा कि किसी भी किसान को लापरवाही की वजह से परेशानी नहीं होनी चाहिए.
राज्य सरकार ने सूखा राहत कार्यों के लिए 329 करोड़ रुपये जारी किए हैं. अधिकारियों को पीने के पानी, पशुओं के चारे, फसल बीमा, भूजल प्रबंधन और राहत कार्यों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं.
सरकार का कहना है कि अगर जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो कर्नाटक में खरीफ सीजन पर बड़ा संकट आ सकता है. फिलहाल किसान आसमान की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं और सभी की निगाहें अब मॉनसून की वापसी पर टिकी हैं.