
बरसात का मौसम पौधों की तेज बढ़वार का समय होता है. बारिश से मिट्टी में नमी बनी रहती है, जिससे पौधे तेजी से नई पत्तियां और शाखाएं निकालते हैं. लेकिन लगातार बारिश के कारण मिट्टी से कई जरूरी पोषक तत्व भी बह जाते हैं. इसलिए इस मौसम में सही खाद देना बहुत जरूरी होता है, ताकि पौधों की बढ़वार अच्छी हो और वे स्वस्थ रहें.
मॉनसून में पौधों के लिए अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद सबसे सुरक्षित और फायदेमंद मानी जाती है. यह मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती है, जड़ों को मजबूत बनाती है और पौधों को लंबे समय तक पोषण देती है. हर पौधे के आसपास थोड़ी मात्रा में गोबर की खाद डालकर हल्की गुड़ाई कर दें, ताकि खाद मिट्टी में अच्छी तरह मिल जाए.
अगर आप जैविक खेती या बागवानी करते हैं, तो वर्मी कम्पोस्ट (केंचुआ खाद) भी बेहतरीन विकल्प है. इसमें नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश जैसे कई जरूरी पोषक तत्व होते हैं. यह मिट्टी की क्वालिटी सुधारती है और पौधों की जड़ों का विकास तेजी से करती है. गमलों और किचन गार्डन के लिए भी यह बहुत उपयोगी खाद है.
बरसात में नीम खली और सरसों खली भी पौधों के लिए लाभदायक होती हैं. नीम खली पौधों को पोषण देने के साथ-साथ कई मिट्टी जनित कीटों और फफूंद से भी बचाने में मदद करती है. वहीं, सरसों खली पौधों की बढ़वार तेज करती है. हालांकि, सरसों खली को सीधे डालने के बजाय पानी में भिगोकर घोल बनाकर इस्तेमाल करना बेहतर रहता है.
अगर आपके बगीचे में आम, अमरूद, नींबू, अनार, गुलाब, गेंदा या अन्य फूलदार पौधे हैं, तो मॉनसून में उन्हें जैविक खाद के साथ संतुलित एनपीके (NPK) उर्वरक भी आवश्यकता अनुसार दिया जा सकता है. इससे पौधों में नई शाखाएं निकलती हैं, फूल और फल अच्छी मात्रा में आते हैं. हालांकि, रासायनिक खाद हमेशा तय मात्रा में ही डालें.
बारिश के दौरान बहुत ज्यादा खाद एक साथ नहीं डालनी चाहिए. तेज बारिश होने से खाद बह सकती है और पौधों को नुकसान भी हो सकता है. खाद हमेशा पौधे के तने से थोड़ा दूर गोलाई में डालें और हल्की गुड़ाई करके मिट्टी से ढक दें. पानी भरी मिट्टी में रासायनिक खाद डालने से बचें.
मॉनसून में जैविक खाद का इस्तेमाल सबसे अच्छा माना जाता है. गोबर की खाद, वर्मी कम्पोस्ट, कम्पोस्ट खाद, नीम खली और जीवामृत जैसी जैविक खादें मिट्टी की संरचना सुधारती हैं, लाभकारी सूक्ष्म जीवों की संख्या बढ़ाती हैं और पौधों को लंबे समय तक पोषण देती हैं. यदि नियमित रूप से इनका उपयोग किया जाए तो पौधे स्वस्थ रहते हैं.