
मॉनसून का मौसम किचन गार्डनिंग शुरू करने के लिए सबसे अच्छा समय माना जाता है. इस दौरान तापमान सामान्य रहता है और नमी भी पर्याप्त होती है, जिससे पौधों की बढ़वार तेजी से होती है. अगर आप बाजार में मिलने वाली केमिकलयुक्त सब्जियों से बचना चाहते हैं, तो घर की छोटी-सी बालकनी भी आपके लिए मिनी किचन गार्डन बन सकती है. इसके लिए बड़े बगीचे या छत की जरूरत नहीं होती. बस कुछ गमलों और थोड़ी देखभाल से आप कई तरह की केमिकल-फ्री सब्जियां आसानी से उगा सकते हैं.
बालकनी में उगाने के लिए हरी मिर्च सबसे आसान और ज्यादा उत्पादन देने वाली सब्जियों में से एक है. बाजार से खरीदी गई पकी मिर्च के बीजों से भी इसका पौधा तैयार किया जा सकता है. मॉनसून में मिट्टी में पर्याप्त नमी रहती है, इसलिए पौधे की बढ़वार अच्छी होती है. मिर्च के पौधे को रोजाना 5–6 घंटे धूप की जरूरत होती है. वहीं, पानी तभी दें जब गमले की ऊपरी मिट्टी सूखी दिखाई दे. करीब 2–3 महीने में पौधे पर मिर्च आने लगती है.
टमाटर का पौधा भी घर की बालकनी में आसानी से लगाया जा सकता है. इसके लिए पके हुए टमाटर के स्लाइस को सीधे मिट्टी में दबा दें. कुछ दिनों में बीज अंकुरित होकर पौधे निकलने लगेंगे. कम से कम 12 इंच का गमला चुनें और ऐसी जगह रखें जहां अच्छी धूप आती हो. साथ ही मॉनसून में अतिरिक्त पानी जमा न होने दें, क्योंकि जलभराव से जड़ें खराब हो सकती हैं.
धनिया लगभग हर रसोई की जरूरत है और इसे उगाना बेहद आसान है. धनिए के बीजों को हल्का-सा रगड़कर मिट्टी में बिखेर दें और ऊपर से पतली परत मिट्टी की डाल दें. चौड़े और कम गहरे गमले में इसकी अच्छी बढ़वार होती है. मॉनसून में मिट्टी की नमी बनी रहती है, जिससे धनिया तेजी से बढ़ता है. वहीं, लगभग एक महीने में ताजी हरी पत्तियां तैयार हो जाती हैं.
मॉनसून का मौसम पुदीना लगाने के लिए भी बेहद अनुकूल होता है. बाजार से खरीदे गए पुदीने की डंठल को पानी में रखें, जब उसमें जड़ें निकल आएं, तब उसे गमले में लगा दें. पुदीना हल्की धूप और लगातार नमी पसंद करता है. बारिश के मौसम में इसकी बढ़वार काफी तेज होती है और कुछ ही हफ्तों में ताजी पत्तियां मिलने लगती हैं.
पालक भी मॉनसून में आसानी से उगाई जा सकती है. इसके बीजों को लगभग आधा इंच गहराई में बोएं. इसे उगाने के लिए चौड़े गमले का उपयोग करें, और ऐसी जगह रखें जहां सुबह की 3–4 घंटे धूप मिलती हो. पालक को बहुत अधिक धूप की जरूरत नहीं होती. नियमित नमी मिलने पर इसकी पत्तियां तेजी से विकसित होती हैं और कुछ ही सप्ताह में कटाई के लिए तैयार हो जाती हैं.
बारिश के मौसम में गमलों में पानी जमा न होने दें. सभी गमलों में जल निकासी के लिए छेद जरूर हों. वहीं, जरूरत से ज्यादा पानी देने से बचें और समय-समय पर पौधों की पत्तियों की जांच करें, ताकि कीट या फफूंद का प्रकोप होने पर समय रहते नियंत्रण किया जा सके. अगर आप इस मॉनसून किचन गार्डनिंग की शुरुआत करते हैं, तो कम खर्च में ताजी, पौष्टिक और केमिकल-फ्री सब्जियां घर पर ही उगा सकते हैं.