
संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) ने शनिवार को चंडीगढ़ के किसान भवन में एक प्रेस वार्ता आयोजित किया. जिसमें किसान नेताओं ने केंद्र सरकार की ओर से घोषित नए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और देश की आर्थिक स्थिति को लेकर कई सवाल उठाए. किसान नेताओं ने कहा कि सरकार द्वारा आगामी खरीफ सीजन 2026 के लिए घोषित MSP किसानों के लिए लाभकारी नहीं है और इससे खेती की बढ़ती लागत की भरपाई नहीं हो पाएगी.
किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा कि सरकार ने अधिकांश फसलों के MSP में जो बढ़ोतरी की है, वह महंगाई दर और सरकारी कर्मचारियों को दिए जा रहे महंगाई भत्ते से भी कम है. उनका कहना था कि MSP बढ़ाने के तुरंत बाद डीजल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी ने किसानों की लागत और ज्यादा बढ़ा दी है.
जगजीत सिंह डल्लेवाल ने दावा किया कि वर्ष 2013 से 2025 तक MSP में औसतन 73 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि खेती की लागत 78 से 90 प्रतिशत तक बढ़ चुकी है. ऐसे में किसानों का मुनाफा पहले से भी कम हो गया है. उन्होंने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने का दावा अब सिर्फ नारा बनकर रह गया है. उन्होंने यह भी बताया कि कन्याकुमारी से कश्मीर तक निकाली गई यात्रा के दौरान हजारों गांवों से किसानों की मांगों के समर्थन में प्रस्ताव पास कराए गए थे. इन प्रस्तावों की प्रतियां जल्द ही भारत के मुख्य न्यायाधीश, राष्ट्रपति और नेता विपक्ष को सौंपी जाएंगी.
प्रेस वार्ता में किसान नेता अभिमन्यु कोहाड ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस अपील का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने देशवासियों से आयातित खाद्य तेलों, खासकर पाम ऑयल, का इस्तेमाल कम करने की बात कही थी. अभिमन्यु कोहाड ने कहा कि किसान आंदोलन के दौरान भी किसानों ने सरकार से यही मांग की थी कि पाम ऑयल के आयात पर खर्च होने वाले करीब 1.71 लाख करोड़ रुपये को किसानों के लिए MSP गारंटी कानून बनाने में लगाया जाए.
किसान नेताओं का कहना है कि अगर सरकार सरसों, सूरजमुखी, तिल, तोरिया और दालों जैसी फसलों की MSP पर खरीद की गारंटी दे दे, तो देश कुछ ही वर्षों में खाद्य तेल उत्पादन में आत्मनिर्भर बन सकता है और आयात पर होने वाला भारी खर्च बचाया जा सकता है. इस दौरान उत्तर प्रदेश के किसान नेता दिनेश शर्मा ने बताया कि शुगरकेन कंट्रोल ऑर्डर में प्रस्तावित बदलावों के खिलाफ 17 मई को मेरठ में किसान संगठनों की बैठक होगी, जिसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी. बता दें कि प्रेस वार्ता में कई किसान संगठनों के नेता मौजूद रहे.