पांचना बांध विवाद पर बनी सहमति, सरकार की पहल के बाद किसानों ने खत्म किया धरना

पांचना बांध विवाद पर बनी सहमति, सरकार की पहल के बाद किसानों ने खत्म किया धरना

राजस्थान के करौली जिले में पांचना बांध से सिंचाई के पानी को लेकर चल रहा किसानों का आंदोलन सरकार की पहल के बाद समाप्त हो गया है. जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत और कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा की मौजूदगी में हुई उच्चस्तरीय बैठक में किसानों की मांगों पर चर्चा हुई, जिसके बाद किसानों ने धरना खत्म करने का फैसला लिया.

पांचना बांध विवादपांचना बांध विवाद
क‍िसान तक
  • Gangapur City,
  • Jul 10, 2026,
  • Updated Jul 10, 2026, 2:21 PM IST

राजस्थान के करौली जिले में पांचना बांध से कमांड क्षेत्र के किसानों को सिंचाई का पानी उपलब्ध कराने को लेकर चल रहा विवाद आखिरकार सुलझ गया है. किसानों के आंदोलन के बीच राज्य सरकार की पहल सफल रही और इसके बाद कुसाय गांव में चल रहा धरना समाप्त कर दिया गया. जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत और कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा की अध्यक्षता में गंगापुर सिटी में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई. बैठक में करौली और सवाई माधोपुर जिलों के प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के साथ कमांड क्षेत्र के किसान प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया.

सरकार और किसानों के बीच बनी बात

बैठक में दोनों जिलों के प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के साथ कमांड क्षेत्र के किसान प्रतिनिधियों ने भाग लिया. बैठक के दौरान किसानों ने तय समय पर नहरों के जरिए सिंचाई का पानी देने की बात रखी. इसके अलावा नहरों की मरम्मत, तकनीकी खामियों के स्थायी समाधान, पारदर्शी जल प्रबंधन और भविष्य में ऐसी समस्याओं को रोकने सहित कई महत्वपूर्ण सुझाव सरकार के समक्ष रखे. बैठक में सरकार ने किसानों को भरोसा दिलाया कि उनकी जायज मांगों को जल्द पूरा करने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे. ग्रामीण विकास विभाग के सचिव कृष्ण कुणाल ने बताया कि पांचना परियोजना के टेस्ट रन के दौरान जो तकनीकी खामियां सामने आई थीं, उनका जल्द से पर स्थायी समाधान कराया जा रहा है, ताकि भविष्य में सिंचाई व्यवस्था प्रभावित न हो.

अगले सात दिनों में की जाए गेटों की मरम्मत

जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने कहा कि लगभग 20 वर्षों बाद बांध के गेटों का संचालन किए जाने के दौरान तकनीकी समस्याएं सामने आई हैं. इन सभी खामियों का स्थायी समाधान कराया जाएगा. उन्होंने किसानों को हुई असुविधा पर दूख जताते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी गेटों की मरम्मत अगले सात दिनों में हर हाल में पूरी की जाए. मंत्री सुरेश सिंह रावत ने बताया कि 17 और 18 जुलाई को किसान प्रतिनिधियों की उपस्थिति में पुनः गेटों का परीक्षण किया जाएगा. इसके साथ ही कमांड क्षेत्र की नहरों में पानी छोड़कर पूरी व्यवस्था की जांच की जाएगी, ताकि किसानों को बिना किसी दिक्कत के सिंचाई व्यवस्था कराई जाए. 

बैठक में स्पष्ट किया गया कि यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है, तो उसके खिलाफ उच्चस्तरीय जांच कर नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी. साथ ही यह भी बताया गया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा स्वयं पूरे मामले की लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं और किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है.

किसानों की मांगों पर सरकार का सकारात्मक रुख

कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि सरकार सिंचाई का पानी पाने वाले और बांध के आसपास रहने वाले सभी किसानों के हितों का समान रूप से ध्यान रखेगी. सरकार ने कहा कि उसका उद्देश्य सभी किसानों को निष्पक्ष और तय व्यवस्था के अनुसार सिंचाई का पानी उपलब्ध कराना है. बैठक में किसानों और आम लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की गई. साथ ही लोगों से कहा गया कि सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों और भ्रामक संदेशों पर भरोसा न करें और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही विश्वास करें. 

बैठक के अंत में सभी पक्षों ने आपसी संवाद के माध्यम से समाधान निकालने और प्रशासन के साथ सहयोग बनाए रखने पर सहमति व्यक्त की. इसके बाद जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत और कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा किसान प्रतिनिधियों के साथ कुसाय धरना स्थल पहुंचे और आंदोलन समाप्त करने की अपील की. सरकार के आश्वासन और तय काम पर विश्वास जताते हुए किसान प्रतिनिधियों ने धरना समाप्त करने की घोषणा कर दी. राज्य सरकार ने भरोसा दिलाया कि पांचना परियोजना की तकनीकी और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाकर किसानों को समय पर सिंचाई उपलब्ध कराया जाएगा.

क्या है पांचवा बांध विवाद की कहानी

पांचवा बांध विवाद की जड़ें वर्ष 2006 में हुए गुर्जर आंदोलन से जुड़ी हैं. बांध निर्माण के दौरान जिन गांवों की जमीनें डूब क्षेत्र में चली गईं, वहां के किसानों का कहना है कि पानी पर पहला अधिकार उनका है. इसी मांग को लेकर उन्होंने नहरों में पानी छोड़े जाने का विरोध शुरू कर दिया. तब से लेकर आज तक स्थिति यह है कि नहरों में नियमित रूप से पानी नहीं पहुंच पाया. बांध का पानी साल में केवल एक बार श्रीमहावीरजी मेले के दौरान गंभीर नदी में धार्मिक उपयोग के लिए छोड़ा जाता है. (मनोहर लाल गुप्ता की रिपोर्ट)

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