El Nino Alert: अल नीनो के खतरे पर सरकार अलर्ट, पीएमओ की हाई लेवल बैठक, किसानों और मॉनसून को लेकर बड़े निर्देश

El Nino Alert: अल नीनो के खतरे पर सरकार अलर्ट, पीएमओ की हाई लेवल बैठक, किसानों और मॉनसून को लेकर बड़े निर्देश

अल नीनो के संभावित असर को लेकर पीएमओ में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक हुई. सरकार ने मॉनसून, खरीफ फसलों, फसल बीमा, पेयजल, उर्वरक, खाद्यान्न और बिजली व्यवस्था की तैयारियों की समीक्षा की. जानिए IMD ने बारिश को लेकर क्या अपडेट दिया और किसानों व राज्यों के लिए सरकार ने कौन-कौन से अहम निर्देश जारी किए.

El Nino Rain ImpactEl Nino Rain Impact
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Jul 08, 2026,
  • Updated Jul 08, 2026, 8:14 AM IST

देश में मॉनसून की प्रगति और अल नीनो (El Niño) के संभावित प्रभाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं. इसी कड़ी में 7 जुलाई 2026 को प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पी.के. मिश्रा की अध्यक्षता में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई. बैठक में कृषि, बिजली, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, आर्थिक मामलों, उपभोक्ता मामले, पशुपालन, जल संसाधन, उर्वरक, भारतीय मौसम विभाग (IMD) समेत 15 से अधिक मंत्रालयों और विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया. बैठक का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि यदि एल नीनो का असर बढ़ता है तो खेती, खाद्यान्न आपूर्ति, पेयजल, बिजली और आम लोगों की जरूरतों पर इसका न्यूनतम प्रभाव पड़े.

क्या है अल नीनो और क्यों बढ़ी चिंता?

अल नीनो एक ऐसी मौसमी स्थिति है, जिसमें प्रशांत महासागर के सतही पानी का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है. इसका असर दुनिया के कई देशों के मौसम पर पड़ता है. भारत में एल नीनो के दौरान कई बार सामान्य से कम बारिश देखने को मिलती है, जिससे खेती, जल भंडारण और खाद्य उत्पादन प्रभावित हो सकते हैं. हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि हर एल नीनो वर्ष में सूखा या कम बारिश हो, यह जरूरी नहीं है.

IMD ने बताया मॉनसून की ताजा स्थिति

बैठक में भारतीय मौसम विभाग ने जून और 7 जुलाई तक की बारिश की स्थिति की जानकारी दी. विभाग के अनुसार गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में मॉनसून करीब 10 दिन की देरी से पहुंचा था. हालांकि जुलाई के पहले सप्ताह में अच्छी बारिश होने से पूरे देश में बारिश की कमी घटकर अब केवल 12 प्रतिशत रह गई है.

IMD ने यह भी बताया कि जुलाई और अगस्त के दौरान कमजोर से मध्यम स्तर का एल नीनो विकसित हो सकता है. चूंकि जुलाई महीने में पूरे मॉनसून सीजन की लगभग 30 प्रतिशत बारिश होती है, इसलिए मौसम विभाग लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है. अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि एल नीनो का मतलब हमेशा कम बारिश नहीं होता.

किसानों के लिए सरकार ने बनाई विशेष रणनीति

बैठक में कृषि मंत्रालय ने बताया कि संभावित मौसमीय चुनौतियों से निपटने के लिए राज्यों के साथ हर सप्ताह 'क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप' की बैठक की जा रही है. इन बैठकों में बारिश की स्थिति, जलाशयों का जल स्तर, फसलों की बुआई, बीज और उर्वरकों की उपलब्धता, बाजार की स्थिति और कीट-रोगों पर नजर रखी जा रही है.

सरकार ने देश के 262 संवेदनशील जिलों के लिए कृषि आकस्मिक योजना (Contingency Plan) को भी अपडेट किया है. इसके अलावा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) के लिए "भारतीय कृषि में एल नीनो जोखिम प्रबंधन" संबंधी दिशा-निर्देश जारी किए हैं. सरकार का कहना है कि जलवायु अनुकूल बीजों और आधुनिक तकनीकों की मदद से पिछले वर्षों में कम बारिश के बावजूद खाद्यान्न उत्पादन बनाए रखा गया है.

फसल बीमा और किसान क्रेडिट कार्ड पर रहेगा विशेष जोर

सरकार ने उन राज्यों में, जहां एल नीनो का असर अधिक हो सकता है, वहां प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) का दायरा तेजी से बढ़ाने के निर्देश दिए हैं. कृषि, वित्तीय सेवाएं और सहकारिता विभागों से कहा गया है कि अधिक से अधिक किसानों को समय रहते इन योजनाओं का लाभ दिलाया जाए ताकि किसी भी प्राकृतिक आपदा की स्थिति में किसानों को आर्थिक सुरक्षा मिल सके.

पशुओं के चारे और पेयजल की व्यवस्था पर भी फोकस

बैठक में पशुपालन एवं डेयरी विभाग को निर्देश दिया गया कि वह सूखा चारा, हरा चारा और पशु आहार की उपलब्धता का जिला स्तर तक आकलन करे. वहीं, जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग को संवेदनशील जिलों में पेयजल आपूर्ति पर लगातार निगरानी रखने और जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई करने को कहा गया.

जल संसाधन विभाग ने बताया कि फिलहाल देश में जलाशयों और भूजल की स्थिति संतोषजनक है, लेकिन पूरे मॉनसून सीजन के दौरान इस पर लगातार नजर रखी जाएगी ताकि भविष्य में किसी तरह की जल संकट की स्थिति न बने.

स्वास्थ्य विभाग को भी जारी हुए निर्देश

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने बताया कि हीटवेव, अधिक उमस और डेंगू जैसी बीमारियों को लेकर पहले ही एडवाइजरी जारी की जा चुकी है. मंत्रालय को निर्देश दिया गया कि मौसम संबंधी सभी चेतावनियां और स्वास्थ्य सलाह गांव और ब्लॉक स्तर तक प्रभावी तरीके से पहुंचाई जाएं.

खाद्यान्न, उर्वरक और जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता बनी रहेगी

उपभोक्ता मामले विभाग ने बैठक में बताया कि देश में चावल, गेहूं और दालों का पर्याप्त बफर स्टॉक उपलब्ध है. वहीं उर्वरक विभाग ने जानकारी दी कि खरीफ सीजन के लिए उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता है और रबी सीजन के लिए भी पर्याप्त भंडार रहेगा. दोनों विभागों को निर्देश दिए गए कि बाजार में जरूरी खाद्य वस्तुओं और उर्वरकों की उपलब्धता पर लगातार नजर रखें ताकि किसी भी तरह की कमी या कीमतों में अनावश्यक बढ़ोतरी न हो.

रोजगार और बिजली आपूर्ति पर भी सरकार की नजर

ग्रामीण विकास मंत्रालय ने बताया कि 1 जुलाई से शुरू हुए 'विकसित भारत-गारंटी रोजगार एवं आजीविका मिशन' के तहत अब तक एक करोड़ से अधिक मानव-दिवस (Person Days) का रोजगार सृजित किया जा चुका है.

वहीं बिजली मंत्रालय ने देश में बिजली उत्पादन और आपूर्ति की स्थिति को सामान्य बताया. साथ ही कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग ने जलवायु परिवर्तन के अनुकूल विकसित नई बीज किस्मों के विस्तार की जानकारी दी.

राज्यों के साथ मिलकर होगी लगातार निगरानी

बैठक के अंत में प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पी.के. मिश्रा ने सभी मंत्रालयों को निर्देश दिए कि वे राज्यों के साथ लगातार समन्वय बनाए रखें और हर जिले की स्थिति पर नजर रखें. यदि कहीं मॉनसून में देरी या एल नीनो का असर अधिक दिखाई देता है तो तुरंत आवश्यक कदम उठाए जाएं.

उन्होंने कहा कि संवेदनशील जिलों में पेयजल, पशुओं के चारे, जलाशयों के जल प्रबंधन और कृषि गतिविधियों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए. साथ ही उपलब्ध पानी का विवेकपूर्ण उपयोग सुनिश्चित किया जाए ताकि आने वाले महीनों में किसी तरह की समस्या न हो.

सरकार का लक्ष्य- आम जनता और किसानों पर न पड़े असर

केंद्र सरकार का कहना है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन मौसम में किसी भी बदलाव को हल्के में नहीं लिया जा रहा है. सरकार चाहती है कि समय रहते सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली जाएं ताकि यदि एल नीनो का प्रभाव बढ़ता भी है तो किसानों, आम लोगों और देश की अर्थव्यवस्था पर उसका असर कम से कम हो सके.

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