
महाराष्ट्र में एक तरफ जहां गाजे-बाजे के साथ भगवान गणेश को अंतिम विदाई देने की धूम मची थी. वहीं, दूसरी तरफ बीड़ जिले से बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है. अंबाजोगाई तहसील के राडी गांव में सतीश शिवाजी कोलगिरे नाम के 35 वर्षीय एक छोटे किसान ने लगातार फसल नुकसान और कर्ज के बोझ से तंग आकर अपने ही खेत में बिजली के खंभे से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली.
प्राप्त प्राथमिक जानकारी के अनुसार, यह घटना शुक्रवार सुबह करीब 7 बजे सामने आई. सतीश ने खेत में जाकर कपड़े से मुंह बांधा और बिजली के पोल पर रस्सी के सहारे फांसी लगा ली. सूचना मिलते ही अंबाजोगाई ग्रामीण पुलिस ने मौके पर पहुंचकर पंचनामा किया और शव को पोस्टमार्टम के लिए स्वामी रामानंद तीर्थ ग्रामीण सरकारी अस्पताल भेजा. बेहद गरीबी में गुजर-बसर कर रहे कोलगिरे के परिवार पर इस घटना के बाद दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है.
मराठवाड़ा में पिछले 50 दिनों से बारिश न होने से स्थिति बेकाबू हो गई है. संभाग के 75 में से 38 तहसीलों में 75% से भी कम बारिश दर्ज की गई है. इसके चलते हल्की जमीन पर बोई गई कपास, सोयाबीन और मक्का की खरीफ फसलें पूरी तरह सूखकर बर्बाद हो चुकी हैं. मध्यम जमीन की फसलें भी अब हाथों से निकलती दिख रही हैं. धाराशिव, परभणी, लातूर और बीड़ जिलों में स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है.
सरकार द्वारा कर्जमाफी और राहत योजनाओं के दावों के बावजूद जमीनी स्तर पर किसानों की बेबसी खत्म होने का नाम नहीं ले रही है. विभागीय आयुक्त कार्यालय की रिपोर्ट के मुताबिक, मराठवाड़ा में बीते 8 महीनों में कुल 653 किसानों ने मौत को गले लगा लिया है- यानी औसतन हर दिन 8 किसान अपनी जीवन लीला समाप्त कर रहे हैं.
इस भयावह आंकड़े में बीड़ जिला सबसे ऊपर है, जहां सर्वाधिक 149 किसानों ने आत्महत्या की है. इसके बाद दूसरे नंबर पर छत्रपती संभाजी नगर है, जहां 138 किसानों की जान गई है. बीड़ जिले में लगातार बढ़ते मौतों के आंकड़े डराने वाले हैं. जनवरी से जून तक 95 आत्महत्याएं, जनवरी से जुलाई 123 आत्महत्याएं, जनवरी से अगस्त 149 आत्महत्याएं हुई हैं. संभाग के कुल 653 मामलों में से अब तक 363 मृतक किसानों के वारिसों को सरकारी मदद के लिए पात्र पाया गया है, 232 मामलों में जांच जारी है और 58 आवेदन खारिज कर दिए गए हैं.
'मराठवाड़ा की अगली पीढ़ी को सूखा नहीं देखने देंगे' जैसे बड़े-बड़े दावे लगातार प्रशासनिक और राजनीतिक मंचों से किए जाते रहे हैं. लेकिन हकीकत यह है कि आज की पीढ़ी ही सूखा, कर्ज और महंगाई के दुचक्र में पिसकर जिंदगी से हार मान रही है. सतीश कोलगिरे जैसे युवा किसान का यूं चले जाना सरकारी नीतियों और प्रशासनिक दावों पर गंभीर सवाल खड़े करता है. सरकार ने किसानों को जल्द मदत घोषित करने के लिए अब मराठवाड़ा में किसान बैलगाड़ी लेकर आंदोलन कर रहें.
महाराष्ट्र के मराठवाड़ा में सूखे और किसानों की आत्महत्या को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है. अखिल भारतीय किसान सभा के राज्य उपाध्यक्ष अजय बुरांडे ने कहा कि इलाके में पिछले अगस्त से ही सूखे जैसे हालात दिखाई दे रहे हैं, लेकिन सरकार ने अभी तक किसानों के लिए ठोस फैसला नहीं लिया है. इससे किसान निराश हो रहे हैं. उन्होंने सरकार से जल्द फैसला लेकर राहत पहुंचाने की मांग की है.
बुरांडे ने कहा कि पहले किसान ओलावृष्टि से परेशान थे और अब सूखे की मार झेल रहे हैं. उनका कहना है कि करीब दो महीने से बारिश नहीं हुई है और जनवरी से अब तक 150 से ज्यादा किसानों की आत्महत्या की बात सामने आई है. उन्होंने सरकार से किसानों की स्थिति को गंभीरता से लेने की मांग की.
वहीं, रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (खरात गुट) के मराठवाड़ा विभागीय अध्यक्ष अक्षय भुम्बे ने कहा कि अंबाजोगाई तहसील के राड़ी गांव में एक युवा किसान ने आत्महत्या की है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के मराठवाड़ा दौरे के दौरान किसानों के लिए कोई ठोस घोषणा सामने नहीं आई. भुम्बे ने सरकार से जल्द से जल्द किसानों को आर्थिक मदद देने की मांग की.