
महाराष्ट्र के अकोला जिले में किसानों से जुड़ा एक मामला सामने आया है. यहां कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे को सोयाबीन सौंपने पहुंचे किसान संगठनों से जुड़े तीन कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया. दरअसल, ये कार्यकर्ता क्षेत्र में सूखे की स्थिति को देखते हुए प्रभावित इलाकों को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग कर रहे थे. हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं की पहचान गोपाल पोहरे, विष्णु अरबट और रवि गावंडे के रूप में हुई है. आयोजकों के अनुसार, तीनों क्रांतिकारी किसान संगठन और आजाद फाउंडेशन से जुड़े हैं.
किसान कार्यकर्ताओं का कहना था कि इलाके में बारिश के बीच लंबे समय तक अंतराल रहने से सोयाबीन समेत कई खरीफ फसलों पर असर पड़ा है. इससे किसानों को नुकसान का सामना करना पड़ रहा है. इसी समस्या की ओर सरकार का ध्यान खिंचने के लिए तीनों कार्यकर्ता सोयाबीन लेकर कृषि मंत्री से मिलने पहुंचे थे. उनकी मांग थी कि जिन इलाकों में फसलें प्रभावित हुई हैं, वहां की स्थिति का आकलन कर उन्हें आधिकारिक तौर पर सूखाग्रस्त घोषित किया जाए. पुलिस ने तीनों कार्यकर्ताओं को उस समय हिरासत में लिया, जब वे कृषि मंत्री को सोयाबीन सौंपने के लिए आगे बढ़ रहे थे. हालांकि, उनके खिलाफ कौन-कौन सी कानूनी धाराएं लगाई गई हैं, इसकी तत्काल जानकारी सामने नहीं आई है.
यह घटना ऐसे समय हुई, जब अकोला में अमरावती संभाग की फसल स्थिति को लेकर समीक्षा बैठक आयोजित की गई थी. बैठक में बारिश की स्थिति, फसलों को हुए नुकसान और किसानों से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा की गई. पश्चिम विदर्भ में बारिश में लगातार हो रहे अंतराल को लेकर किसान संगठन पहले से ही चिंता जता रहे हैं. उनका कहना है कि बारिश की कमी और लंबे अंतराल का असर सोयाबीन समेत अन्य खरीफ फसलों पर पड़ा है.
समीक्षा बैठक के दौरान कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे ने कहा कि सरकार किसानों के साथ मजबूती से खड़ी है. उन्होंने कहा कि फसल नुकसान का आकलन करने के बाद किसानों के लिए जरूरी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी. वहीं, किसान कार्यकर्ता तत्काल कदम उठाने और प्रभावित क्षेत्रों को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग पर जोर दे रहे हैं. तीन कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने के बाद इलाके में फसल नुकसान और सूखे की स्थिति को लेकर किसानों और सरकार के बीच चल रही चर्चा और तेज हो गई है.