
मध्य प्रदेश के आगर मालवा में फसल नुकसान के मुआवजे और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से जुड़े कई मुद्दों को लेकर किसानों ने बड़ा प्रदर्शन किया. भारतीय किसान संघ के बैनर तले सैकड़ों महिला और पुरुष किसान रैली निकालते हुए कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और अपनी मांगों को लेकर धरना दिया. प्रदर्शन के दौरान कलेक्ट्रेट के मुख्य द्वार पर ही किसानों ने चूल्हे जला दिए और धरने में शामिल लोगों के लिए मालवा की प्रसिद्ध दाल-बाटी बनाने लगे.
कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर का नजारा सामान्य धरना-प्रदर्शनों से अलग दिखाई दिया. एक तरफ किसान नारेबाजी कर अपनी मांगें उठा रहे थे तो दूसरी तरफ कई किसान भोजन तैयार करने में जुटे थे. कुछ किसान आटा गूंथ रहे थे, कुछ बाटियां तैयार कर रहे थे, जबकि कई किसान कंडे और लकड़ियां जलाकर अंगारों की व्यवस्था करते नजर आए. धरने में शामिल सैकड़ों किसानों के लिए कई क्विंटल आटे से दाल-बाटी तैयार करने की व्यवस्था की गई.
भारतीय किसान संघ के आगर मालवा जिला संगठन के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसानों ने शहर में रैली निकाली. इसमें महिला किसानों ने भी भाग लिया. नारेबाजी करते हुए किसान कलेक्टर कार्यालय पहुंचे, जहां रैली धरना-प्रदर्शन में बदल गई. कलेक्ट्रेट के सामने नुक्कड़ सभा भी आयोजित की गई और किसान नेताओं ने एक-एक कर अपनी समस्याएं और मांगें रखीं.
किसान अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपने के लिए संबंधित अधिकारी को बुलाने की मांग करने लगे. इस दौरान अधिकारी और किसान नेताओं के बीच बहस की स्थिति भी बनी. इसके बावजूद किसानों ने धरना जारी रखा.
प्रदर्शनकारी किसानों की प्रमुख मांगों में प्राकृतिक आपदा से बर्बाद हुई फसलों का मुआवजा शामिल है. किसानों का दावा है कि आगर तहसील के कानड़ और तनोडिया क्षेत्र के कई गांवों में आंधी-तूफान, बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के कारण संतरा, लहसुन, प्याज और गेहूं समेत दूसरी फसलों को भारी नुकसान हुआ था.
किसानों का आरोप है कि प्रभावित किसानों को अब तक आरबीसी 6(4) के तहत मिलने वाली मुआवजा राशि नहीं मिली है. किसान संगठन ने प्रशासन से मांग की है कि फसल नुकसान से प्रभावित किसानों के मामलों का जल्द निपटारा कर उन्हें तत्काल मुआवजा दिया जाए.
किसानों के ज्ञापन में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से जुड़ी कई मांगें भी शामिल हैं. किसान संगठन ने खरीफ और रबी की अधिसूचित फसलों के संबंध में आगर जिले के पटवारी हल्कों की उपज और वास्तविक उपज का वर्षवार और फसलवार विवरण उपलब्ध कराने की मांग की है.
इसके अलावा किसानों ने फसल बीमा से जुड़ी व्यक्तिगत शिकायतों का ब्योरा भी मांगा है. संगठन यह जानकारी चाहता है कि खरीफ और रबी सीजन के दौरान कितनी शिकायतें एप्लीकेशन, टोल फ्री नंबर और कृषि विभाग की ई-मेल आईडी जैसे अलग-अलग माध्यमों से दर्ज हुईं.
किसानों ने इन शिकायतों की स्थिति, नुकसान का प्रतिशत, क्लेम भुगतान की राशि और बीमा कंपनी के प्रतिनिधियों की ओर से किए गए सर्वेक्षण से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने की भी मांग रखी है.
फसल बीमा और मुआवजा ही नहीं, किसान संगठन ने अपने मांग पत्र में किसानों से जुड़े कई और मुद्दे भी उठाए हैं. संगठन के मुताबिक, प्रशासन के सामने तीन दर्जन से अधिक मांगें रखी गई हैं.
किसान नेताओं का कहना है कि फसल नुकसान झेलने वाले किसानों को राहत और बीमा भुगतान के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना चाहिए. प्रशासनिक स्तर पर किसानों की शिकायतों और बीमा दावों से संबंधित पूरी जानकारी भी पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराई जानी चाहिए.
इस पूरे प्रदर्शन में सबसे ज्यादा ध्यान किसानों की ओर से कलेक्ट्रेट के मुख्य द्वार पर भोजन बनाने ने खींचा. लंबा धरना चलने की स्थिति को देखते हुए किसानों ने वहीं भोजन तैयार करना शुरू कर दिया. लकड़ी और कंडों से चूल्हे जलाए गए और अंगारों पर बाटियां सेंकी जाने लगीं.
किसानों का यह प्रदर्शन फसल नुकसान का मुआवजा, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से जुड़ी जानकारी और दूसरी मांगों को लेकर किया गया. किसान धरने पर डटे रहे और प्रशासन के सामने अपनी मांगों के समाधान की बात रखी.(प्रमोद कारपेंटर का इनपुट)