
महाराष्ट्र के चंद्रपुर में गणेशोत्सव की धूम के बीच गणपति बाप्पा का एक ऐसा रूप देखने को मिल रहा है, जो भक्ति के साथ किसानों की मेहनत और उनके संघर्ष की कहानी भी बयां कर रहा है. शहर के पानी टांकी परिसर स्थित युवा गणेश मंडल ने इस साल अपनी झांकी देश के अन्नदाता को समर्पित की है. यहां गणपति बाप्पा भगवान के पारंपरिक स्वरूप के साथ किसान की भूमिका में खेत में हल चलाते दिखाई दे रहे हैं.
सिर पर पारंपरिक दुपट्टा, शरीर पर धोती-कुर्ता, हाथ में छड़ी और सामने बैलों की कमान. किसान के रूप में सजे गणपति बाप्पा की यह झांकी श्रद्धालुओं का ध्यान अपनी ओर खींच रही है. बाप्पा के सामने खेत और धान की फसल दिखाई गई है, जबकि खूबसूरती से सजाई गई बैलों की जोड़ी पूरे दृश्य को जीवंत बना रही है.
इस झांकी को देखकर ऐसा लगता है जैसे गणपति बाप्पा खुद खेत में उतरकर अन्नदाता के साथ मेहनत कर रहे हों.
झांकी की खूबसूरती के पीछे एक गंभीर सामाजिक संदेश भी छिपा है. युवा गणेश मंडल ने इसके जरिए किसानों के सामने आने वाली चुनौतियों को समाज के सामने रखने की कोशिश की है.
मॉनसून की बेरुखी, सूखा, प्राकृतिक आपदाएं, फसल बर्बाद होने का खतरा और बढ़ता आर्थिक संकट जैसे किसानों से जुड़े मुद्दों को झांकी की थीम का हिस्सा बनाया गया है. इसके साथ ही कृषि संकट से पैदा होने वाली निराशा और किसान आत्महत्या जैसे संवेदनशील मुद्दे की ओर भी ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया गया है.
मंडल का संदेश है कि त्योहार की खुशी और बाप्पा की भक्ति के बीच उस किसान को भी याद किया जाए, जिसकी मेहनत से देश के करोड़ों लोगों की थाली तक अनाज पहुंचता है.
किसान महीनों तक खेत में मेहनत करता है. बीज बोने से लेकर फसल तैयार होने तक उसकी उम्मीद काफी हद तक अनुकूल मौसम से जुड़ी रहती है. लेकिन कई बार कम बारिश, सूखा या दूसरी प्राकृतिक परिस्थितियां उसकी मेहनत पर पानी फेर देती हैं.
झांकी इसी अनिश्चितता को बाप्पा के किसान रूप के जरिए लोगों तक पहुंचाने की कोशिश करती है. संदेश यह है कि खेत में फसल उगाना केवल खेती का काम नहीं, बल्कि मेहनत, धैर्य और उम्मीद की लंबी प्रक्रिया है.
आधुनिक कृषि तकनीकों के बढ़ते इस्तेमाल के बावजूद बड़ी संख्या में किसान आज भी अपनी खेती के लिए मॉनसून और पारंपरिक संसाधनों पर निर्भर रहते हैं. ऐसे में मौसम का बिगड़ता मिजाज उनकी फसल के साथ घरेलू अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित कर सकता है.
किसानों के जीवन की इन्हीं परिस्थितियों को केंद्र में रखते हुए मंडल ने बाप्पा के सामने अन्नदाता की खुशहाली की कामना की है.
झांकी का भाव है कि जिस किसान के पसीने और मेहनत से करोड़ों लोगों का पेट भरता है, उसके जीवन में भी सुख और समृद्धि आए. किसानों के खेत हरियाली से भरे रहें और फसलों पर प्राकृतिक आपदाओं का संकट न आए.
“हे बाप्पा, जिस अन्नदाता के पसीने से करोड़ों लोगों का पेट भरता है, उसके जीवन में सुख, समृद्धि और खुशहाली लाओ. किसानों के संकट दूर करो और उनके खेतों में हमेशा हरियाली और समृद्धि बरसाओ.”
इसी प्रार्थना और भाव को गणेश मंडल ने अपनी पूरी झांकी का आधार बनाया है.
युवा गणेश मंडल का यह 15वां वर्ष है. मंडल की ओर से हर साल गणेशोत्सव के दौरान अलग-अलग सामाजिक और जनजागृति से जुड़े विषयों को झांकियों के माध्यम से लोगों के सामने लाने का प्रयास किया जाता है.
इस बार मंडल ने किसान को अपनी थीम के केंद्र में रखा है. इसके लिए गणपति बाप्पा को ही किसान का स्वरूप दिया गया है, ताकि श्रद्धालुओं तक किसानों की मेहनत और परेशानियों का संदेश प्रभावी तरीके से पहुंचे.
झांकी में खेत से लेकर धान और बैल तक उन चीजों को जगह दी गई है जो ग्रामीण कृषि जीवन की तस्वीर पेश करती हैं. इनके बीच हल चलाते बाप्पा आकर्षण का मुख्य केंद्र बने हुए हैं.
किसान के रूप में गणपति बाप्पा को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं. लोगों के लिए यह महज गणेश प्रतिमा के दर्शन भर नहीं हैं, बल्कि खेती और किसान के जीवन से जुड़े सामाजिक संदेश को समझने का भी मौका है.
खेत में काम करते बाप्पा का स्वरूप उस किसान की याद दिलाता है, जो गर्मी, बारिश और तमाम दूसरी चुनौतियों के बावजूद खेतों में मेहनत करता है.
खास तौर पर धान की खेती, बैलों की जोड़ी और हल चलाते बाप्पा की प्रस्तुति पूरी झांकी को ग्रामीण परिवेश से जोड़ती है.
गणेशोत्सव आम तौर पर उत्साह, भक्ति और उल्लास का अवसर होता है, लेकिन चंद्रपुर के युवा गणेश मंडल ने इसमें सामाजिक सरोकार को जोड़कर अलग संदेश देने की कोशिश की है.
यहां बाप्पा का किसान रूप एक ओर श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण बना हुआ है, तो दूसरी तरफ अन्नदाता के जीवन की चुनौतियों की ओर उनका ध्यान भी खींच रहा है.
झांकी का संदेश साफ है कि किसान सिर्फ खेत में अनाज पैदा करने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि देश की खाद्य व्यवस्था की एक अहम कड़ी है. उसकी खुशहाली और खेतों की हरियाली से ही समाज की थाली जुड़ी हुई है.
यही वजह है कि इस बार चंद्रपुर में आवाज सिर्फ ‘गणपति बाप्पा मोरया’ की नहीं है, बल्कि उसके साथ अन्नदाता के लिए एक प्रार्थना भी जुड़ी है- बाप्पा, किसानों के संकट दूर करो और उनके खेतों में खुशहाली लाओ.(विकास राजूरकर की रिपोर्ट)