
महाराष्ट्र के जलगांव से बड़ी मात्रा में केले खाड़ी देशों में एक्सपोर्ट किए जाते हैं. लेकिन ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण जलगांव जिले के केले फंसे हुए हैं. मुंबई के जेएनपीटी बंदरगाह पर जलगांव के केलों के सौ से ज्यादा कंटेनर फंसे हुए हैं. रमजान के महीने में खाड़ी देशों में केलों की बहुत ज्यादा डिमांड होती है. डर है कि एक्सपोर्ट रुकने से केले के दाम भी गिर जाएंगे. जलगांव के केलों की तरह नासिक के अंगूर भी फंसे हुए हैं.
ईरान-अमेरिका की लड़ाई महाराष्ट्र में अंगूर एक्सपोर्ट करने वालों पर भारी आर्थिक बोझ डाल रही है. रमजान के दौरान खाड़ी देशों में अंगूरों की बहुत अधिक डिमांड होती है. हालांकि, दूसरी तरफ, भारत में हजारों कंटेनर विदेशी बाजारों में जाने का इंतजार कर रहे हैं. ट्रांसपोर्टेशन का खर्च बढ़ गया है, माल खराब होने का डर है. चूंकि माल एक्सपोर्ट नहीं हो रहा है, इसलिए डर है कि भारत में अंगूर के दाम काफी गिर जाएंगे. पिछले साल लगभग छह महीने बारिश होने के कारण अंगूर का प्रोडक्शन कम हो गया था. इन सब हालातों के कारण किसान पहले से ही मुश्किल में हैं.
नासिक की तरह इंदापुर और सांगली से भी बड़ी मात्रा में अंगूर एक्सपोर्ट होते हैं. इंदापुर तालुका से अंगूर एक्सपोर्ट पूरी तरह से बंद हो गया है. इंदापुर से सऊदी अरब और दुबई में अंगूर एक्सपोर्ट होते हैं. सांगली के कोल्ड स्टोरेज में अभी सांगली से अंगूर के करीब साढ़े तीन सौ कंटेनर पड़े हैं जबकि 700 से ज्यादा कंटेनर वाइन यार्ड में तैयार हैं. ड्राइवर भी इस स्थिति से अटके पड़े हैं.
माल से भरे 300 कंटेनर मुंबई पोर्ट पर इंतजार कर रहे हैं. सांगली से करीब 15 हजार टन अंगूर खाड़ी देशों में जाने का इंतजार कर रहे हैं. इन सबके कारण करोड़ों का लेन-देन रुक गया है. अब किसानों का सवाल है कि एक्सपोर्ट कैसे करें. और अगर ये सामान ऐसे ही पड़ा रहा तो खर्चा बढ़ जाएगा, एक्सपोर्ट व्यापारियों को इस बात का डर सता रहा है. यार्ड में माल जब तक पड़ा रहेगा, तब तक उसका खर्च बढ़ता रहेगा. उलटे में व्यापारी और किसान को लगातार नुकसान उठाना पड़ेगा.
जेएनपीटी बंदरगाह घरेलू और इंटरनेशनल दोनों तरह के एक्सपोर्ट और इंपोर्ट को हैंडल करता है. यह पोर्ट बड़ी मात्रा में गाड़ियां, इंडस्ट्रियल सामान, फार्मास्यूटिकल्स, स्टील, खेती के प्रोडक्ट और कंटेनर हैंडल करता है. हाल के सालों में पोर्ट में डिजिटल और लॉजिस्टिक सुधार हुए हैं, जिससे इसकी ट्रांसपोर्ट कैपेसिटी बढ़ी है. लेकिन अब खाड़ी देशों में ईरान-अमेरिका युद्ध के असर नवी मुंबई स्थित बंदरगाह पर दिख रहे हैं.
2025 में, भारत ने ईरान के साथ मध्य पूर्व के कई देशों में काफी सामान एक्सपोर्ट किया, जिसमें मुख्य रूप से चावल, केले और चाय जैसे प्रोडक्ट शामिल हैं. इस बार ये सभी तरह के प्रोडक्ट अलग-अलग गोडाउन, कोल्ड स्टोरेज और कंटेनर यार्ड में फंसे हुए हैं. केले से लदे कई कंटेनर बंदरगाह में अटके हैं. सांगली, जलगांव, इंदापुर, नासिक के किसान इंतजार कर रहे हैं कि कब युद्ध खत्म होगा और उनका माल खाड़ी देशों में सप्लाई होगा.(नीलेश पाटिल का इनपुट)