
हिमाचल प्रदेश में लगातार दूसरे दिन दूध लेने से इनकार करने पर पशुपालकों ने मिल्क प्लांट के गेट के बाहर ही दूध उड़ेल दिया. इस विरोध प्रदर्शन में 1200 लीटर दूध का नुकसान हुआ. मंडी जिला चक्कर में संचालित मिल्कफेड के मिल्क प्लांट की यह घटना है जिसका वीडियो वायरल हो रहा है. पशुपालकों ने रोष जताते हुए सुक्खू सरकार के व्यवस्था परिवर्तन पर भी सवाल उठाए.
मिल्कफेड प्लांट प्रभारी विश्वकांत शर्मा ने बात की गई तो उन्होंने बताया कि इस प्लांट की क्षमता 1 लाख लीटर की है. इससे अधिक दूध को प्लांट में स्टोर करके नहीं रखा जा सकता है. इस स्थिति को देखते हुए पशुपालकों से एरिया वाइज दूध लिया जा रहा है. इस बारे में पशुपालकों को कुछ दिन पूर्व दिशा निर्देश भी दिए गए थे. संबंधित पशुपालक की इस हरकत की निंदा करते हुए उन्होंने इसकी शिकायत पुलिस में भी कराने की बात कही है.
दरअसल, मंडी जिला के चक्कर में सचांलित मिल्कफेड के मिल्क प्लांट में शनिवार और रविवार को प्लांट स्टाफ ने पशुपालकों का दूध लेने से साफ इनकार कर दिया. इसके बाद बल्ह क्षेत्र के गुस्साए एक पशुपालक ने 1200 लीटर दूध गाड़ी से निकालकर मिल्कफेड के गेट के बाहर ही उड़ेल दिया. इसका वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. इस वीडियो में पशुपालक प्रदेश सरकार की नीतियों पर भी कई सवाल खड़े करते नजर आ रहे हैं.
वीडियो में पशुपालक यह कहते हुए नजर आ रहे हैं कि चक्कर स्थित इस मिल्क प्लांट में महीने के चार दिन ऐसे ही जा रहे हैं, जिसमें कट्स लगाकर पशुपालकों से दूध नहीं खरीदा जा रहा है. पशुपालक रवि सैनी ने कहा कि मिल्क प्लांट वालों की इस मनमानी के चलते आज भी उनका 50 हजार का नुकसान हो गया है. सैनी ने बताया की वे 4 साल से डेयरी फार्मिंग कर रहे हैं और उनके पास 30 गाय हैं. उन्होंने एक करोड़ का कर्ज लेकर स्वरोजगार शुरू किया है और हर माह लाखों रुपये बैंक में किस्त के रूप में जमा करने पड़ते हैं. अगर इसी तरह मनमाने कट लगते रहे तो बैंक का कर्ज तक नहीं चुका पाऊंगा.
यह पहली बार नहीं है कि जिला और प्रदेश में पशुपालकों को सुक्खू सरकार के राज में परेशानियों का सामना करना पड़ा हो. पिछले कुछ माह पूर्व यही पशुपालक दूध का भुगतान न होने से प्रदेश सरकार से नाराज थे. वहीं अब इस तरह से कट लगने से पशुपालकों की समस्या और बढ़ती नजर आ रही है.
चक्कर मिल्कफेड प्लांट प्रभारी विश्वकांत शर्मा से बात की गई तो उन्होंने बताया कि इस प्लांट की क्षमता 1 लाख लीटर की ही है. इससे अधिक दूध को प्लांट में स्टोर करके नहीं रखा जा सकता है. इस स्थिति को देखते हुए पशुपालकों से एरिया वाइज दूध लिया जा रहा है. इस बारे में पशुपालकों को कुछ दिन पूर्व दिशा निर्देश भी दिए गए थे. संबंधित पशुपालक की इस हरकत की निंदा करते हुए उन्होंने इसकी शिकायत पुलिस में भी कराने की बात कही है.(कुलवीर सिंह का इनपुट)