Veterinary: इन दो सेक्टर में साल के 12 महीने खुले हैं नौकरियों के दरवाजे 

Veterinary: इन दो सेक्टर में साल के 12 महीने खुले हैं नौकरियों के दरवाजे 

डेयरी और पोल्ट्री प्रोडक्ट की डिमांड बढ़ रही है. उसी हिसाब से बड़े-बड़े हाईटेक डेयरी और पोल्ट्री फार्म खुल रहे हैं. जैसे फार्म खुल रहे हैं तो उसी हिसाब से कंपनियों को फार्म के लिए स्टॉफ की जरूरत महसूस हो रही है. कोरोना के बाद से तो हर तरह के स्टॉफ की कमी महसूस होने लगी है. कोरोना के बाद से तो बायो सिक्योरिटी के मानक पूरे करना भी जरूरी हो गया है. 

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Veterinary: इन दो सेक्टर में साल के 12 महीने खुले हैं नौकरियों के दरवाजे देश में पशु चिकित्सकों की कमी है.

नौकरियों की तलाश के बीच दो सेक्टर ऐसे भी हैं जिन्हें साल के 12 महीने स्टाफ की जरूरत रहती है. ढूंढे से भी उन्हें अच्छे लोग नहीं मिलते हैं. ये हाल तब है जब युवाओं को लगातार नौकरी के मौके नहीं मिल रहे हैं. विभागों में कई-कई साल से भर्तियां नहीं हो रही हैं. लेकिन जिन दो सेक्टर की हम बात कर रहे हैं वहां सरकारी और प्राइवेट नौकरियों के दरवाजे हमेशा खुले रहते हैं. ये दो वो सेक्टर हैं जहां सरकारी विभाग से लेकर प्राइवेट कंपनी तक को स्किल्ड लेबर, तकनीशियन से लेकर वेटनेरियन तक चाहिए. अगर लाइव स्टॉक एक्सपर्ट की मानें तो आज डेयरी, पोल्ट्री और फिशरीज सेक्टर तेजी से बढ़ रहे हैं. आने वाले सात साल में डेयरी सेक्टर में सबसे ज्यादा निवेश होने वाला है. 

तीनों ही सेक्टर में सबसे ज्यादा नौकरियों के मौके आने वाले हैं. एक्सपर्ट का कहना है कि कम से कम एक लाख की भैंस, 40 हजार की गाय और लाखों रुपये की कीमत वाले मुर्गे-मुर्गियों और मछलियों को खतरनाक बीमारियों से बचाने और अच्छे रेट के लिए उन्हें हेल्दी बनाए रखना जरूरी हो हो गया है. वर्ना एक छोटी से छोटी बीमारी भी पूरा पोल्ट्री फार्म साफ कर जाती है. खुरपका-मुंहपका बीमारी से भैंस की मौत तक हो जाती है. 

70 से ज्यादा कॉलेज फिर भी स्टाफ की कमी  

डॉ. इन्द्र्जीत सिंह, वाइस चांसलर, बि‍हार एनिमल साइंस यूनिवर्सिटी (बासु), बिहार का कहना है कि देश में 70 से ज्या दा वेटनरी कॉलेज और यूनिवर्सिटी हैं. आईवीआर, बरेली और डेयरी रिसर्च इंस्टीवट्यूट, करनाल जैसी चार डीम्ड यूनिवर्सिटी भी हैं. ये सरकारी संस्थान का आंकड़ा है. बावजूद इसके देश में वेटनेरियन और पैरा वेट तकनीशियनों की जरूरत पूरी नहीं हो पा रही है. हर एक राज्य  में कम से कम दो से तीन वेटरनरी कॉलेज हैं. यहां से हजारों की संख्या में छात्र डिप्लोमा से लेकर डिग्री तक हासिल कर फील्ड में जा रहे हैं. 

12वीं पास और नीट क्लीयर होते ही बंपर नौकरियां 

डॉ. इन्द्र्जीत सिंह ने किसान तक को बताया कि देश में संचालित होने वाले वेटरनरी कॉलेज अलग-अलग कोर्स की डिग्री दे रहे हैं. अगर गडवासु यूनिवर्सिटी की ही बात करें वहां साइंस स्ट्रीम से 12वीं करने वाला छात्र नीट क्लीयर करने के बाद वेटनेरियन की डिग्री ले सकता है. अगर नीट के अलावा बात करें तो साइंस स्ट्रीम वाले छात्र एनीमल बॉयो टेक्नोलाजी में बीटेक कर सकते हैं. फिशरीज साइंस में डिग्री ले सकते हैं. इतना ही नहीं अगर आपने 12वीं गणित से की है तो आप डेयरी एक्सपर्ट भी बन सकते हैं. एनडीआरआई से डेयरी में पीएचडी भी कर सकते हैं. 12वीं की मेरिट के आधार पर एडमिशन लिए जाते हैं. 

ये पढ़ाई करें और मिल जाएगी नौकरी 

आईवीआरआई, बरेली की बेवसाइड के मुताबिक लाइव स्टॉ‍क सेक्टर के अलग-अलग फील्ड में जाने के लिए आप वोकेशनल और सर्टिफिकेट कोर्स कर सकते हैं. इसके साथ ही वैल्यू एडेड कोर्स, डिप्लोमा कोर्स, यूजी प्रोग्राम के साथ ही मास्टर और डॉक्टरल प्रोग्राम में भी अपनी पसंद के कोर्स कर सकते हैं.

नौकरी के मामले में क्या कहते हैं एक्सपर्ट 

इंडियन डेयरी एसोसिएशन के पूर्व प्रेसिडेंट और अमूल के पूर्व एमडी डॉ. आरएस सोढ़ी का कहना है कि जब ऑर्गनाइज्ड तरीके से एक लाख लीटर दूध की प्रोसेसिंग होती है तो इससे छह हजार लोगों को नौकरी मिलती है. इसमे से चार हजार नौकरी के मौके तो सिर्फ गांव में ही खुलते हैं. 

पोल्ट्री फेडरेशन ऑफ इंडिया के प्रेसिडेंट रनपाल डाहंडा का कहना है कि आज छोटे से लेकर 50 हजार मुर्गे-मुर्गी वाले पोल्ट्री फार्म को कम से कम एक बायो सिक्योरिटी एक्सपर्ट की तो जरूरत है ही. जो बड़े लेवल के फार्म हैं जिनकी संख्या भी बड़ी है उन्हें तो वेटनेरियन तक की जरूरत होती है.  

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