
हरियाणा के अंबाला में मंगलवार को कई किसानों को उस समय हिरासत में ले लिया गया जब वे बाढ़ से हुए नुकसान के मुआवजे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन के लिए चंडीगढ़ की ओर जा रहे थे. पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक अधिकारियों ने यह जानकारी दी. रिपोर्ट के मुताबिक, किसानों को शंभू सीमा पर हिरासत में लिया गया और बाद में बसों में पुलिस स्टेशन ले जाया गया. मालूम हो कि इससे एक दिन पहले पंजाब के संगरूर जिले में एक किसान की ट्रैक्टर-ट्रॉली से कुचलकर मौत हो गई, जबकि कुछ किसान नेताओं की "हिरासत" को लेकर किसानों की पुलिस के साथ झड़प में पांच पुलिसकर्मी घायल हो गए.
गौरतलब है कि विरोध के मद्देनजर पंजाब, हरियाणा और केंद्र शासित प्रदेश की सीमाओं पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी. भारी पुलिस तैनाती और कई जगहों पर कड़ी चेकिंग के कारण कई किसान शंभू बॉर्डर तक नहीं पहुंच सके.
चंडीगढ़ में किसानों को प्रवेश करने से रोकने के लिए सभी प्रवेश और निकास बिंदुओं पर सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया गया है. इसके अलावा, अंबाला-चंडीगढ़ रोड पर पुलिस ने जगह-जगह बैरिकेड्स लगा रखे हैं और वहां से गुजरने वाले वाहनों की तलाशी भी ली जा रही है. वहीं राजपुरा में दंगा-रोधी वाहन और एक सीसीटीवी वाहन तैनात किया गया है.
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बता दें कि सोमवार को अंबाला से भारतीय किसान यूनियन शहीद भगत सिंह के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमरजीत सिंह मोहरी समेत कई किसान नेताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया गया था. वहीं, बाढ़ से हुए नुकसान का मुआवजा मांगने के लिए किसान मजदूर संघर्ष समिति, भारती किसान यूनियन (करंती कारी), बीकेयू (एकता आजाद), आजाद किसान समिति, दोआबा, बीकेयू (बेहरामके) और भूमि बचाओ मोहिम सहित सोलह कृषि निकायों ने यहां प्रदर्शन करने का ऐलान किया था.
किसान पंजाब समेत उत्तरी क्षेत्र में बाढ़ से हुए नुकसान के लिए केंद्र से 50,000 करोड़ रुपये के पैकेज की मांग कर रहे हैं. वे फसल के नुकसान के लिए 50,000 रुपये प्रति एकड़ मुआवजा, क्षतिग्रस्त घर के लिए 5 लाख रुपये और बाढ़ में मरने वाले व्यक्ति के परिवार के लिए 10 लाख रुपये मुआवजे की भी मांग कर रहे हैं.
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किसानों ने दावा किया था कि उनके कई नेताओं को सोमवार को पंजाब के विभिन्न हिस्सों में हिरासत में लिया गया, जबकि कुछ किसानों को उनकी विरोध योजना से पहले हरियाणा के अंबाला और कुरुक्षेत्र में भी हिरासत में लिया गया. किसानों ने अपने नेताओं की हिरासत के विरोध में अमृतसर और तरनतारन में कुछ टोल प्लाजा की घेराबंदी भी की थी. वहीं गन्ना संघर्ष समिति और भारतीय किसान यूनियन ने सरकार से हिरासत में लिए गए सभी किसान नेताओं को तुरंत रिहा करने को कहा, अन्यथा एक "बड़ा आंदोलन" शुरू किया जाएगा.