
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), नई दिल्ली के 64वें दीक्षांत समारोह में अपने उद्बोधन के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान शामिल हुए. उन्होंने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि आईएआरआई केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि भारत की कृषि प्रगति का प्राण केंद्र है. उन्होंने याद दिलाया कि हरित क्रांति की ऐतिहासिक शुरुआत इसी पावन भूमि से हुई और जब-जब देश खाद्यान्न संकट से जूझा, तब-तब पूसा ने समाधान प्रस्तुत किया. वहीं, इस वर्ष कुल 470 विद्यार्थियों को उपाधियां दी गईं, जिसमें 290 MCS/MTech और 180 PHD छात्र शामिल हैं.
विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि आप केवल डिग्रीधारी नहीं, बल्कि भविष्य के कृषि-नेता हैं. आपकी खोजें आने वाली पीढ़ियों की थाली भरेंगी. उन्होंने कृषि में 5 प्रतिशत वृद्धि दर बनाए रखने की आवश्यकता पर बल देते हुए विज्ञान-आधारित, टिकाऊ और समावेशी कृषि मॉडल अपनाने का अपील किया. कृषि मंत्री ने जलवायु परिवर्तन, मिट्टी की सबसे ऊपरी, जल संकट और पोषण सुरक्षा जैसी चुनौतियों के समाधान के लिए नवाचार और अनुसंधान को अनिवार्य बताया. उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि जिंदगी केवल मौज-मस्ती के लिए नहीं है, बल्कि उद्देश्यपूर्ण जीवन के लिए है; बड़ा लक्ष्य तय करो, उसका रोडमैप बनाओ और मेहनत से उस पर चलो.
भारत रत्न डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन का स्मरण कर उन्हें प्रणाम करते और उनका उदाहरण देते हुए शिवराज सिंह ने कहा कि अकाल को देखकर उन्होंने जिद ठानी कि धरती को ऐसा बनाना है कि कभी अकाल न पड़े, और उसी से हरित क्रांति का मार्ग प्रशस्त हुआ. उसी तरह हर युवा को कोई बड़ा लक्ष्य तय कर आगे बढ़ना चाहिए.
युवा शक्ति की भूमिका रेखांकित करते हुए मंत्री शिवराज सिंह ने विद्यार्थियों को “Job Seeker” के बजाय “Job Creator” बनने की प्रेरणा दी. उन्होंने एग्री-स्टार्टअप, एग्री-प्रोसेसिंग, वैल्यू एडिशन और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से किसानों को बाजार से जोड़ने और भारत को कृषि निर्यात में अग्रणी बनाने का अपील किया.
समारोह के बाद मीडिया से चर्चा में केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने डिग्री प्राप्त सभी छात्र-छात्राओं को शुभकामनाएं देते हुए अपेक्षा व्यक्त की कि उनका जीवन, जो Agri Education उन्होंने प्राप्त की है, उसके अनुरूप खेती और किसानों की सेवा में बीते. उन्होंने कहा कि अन्न, फल, सब्जियों और दालों का उत्पादन बढ़ाने के काम में इन युवाओं का योगदान मिलना चाहिए, ताकि भारत की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और पोषणयुक्त आहार जनता तक पहुंचे. उन्होंने यह भी कहा कि भारत अपनी जरूरत भी पूरी करे और दुनिया की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे. यही आज के कृषि स्नातकों से उनकी अपेक्षा है.
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जल-संरक्षण और माइक्रो-इरिगेशन तकनीकों के प्रसार, मिट्टी स्वास्थ्य संवर्धन, प्राकृतिक खेती, जैविक इनपुट, ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित स्मार्ट कृषि पर विशेष जोर दिया. उन्होंने कहा कि छोटे और सीमांत किसानों के लिए कम लागत वाली तकनीकों का विकास समय की मांग है और इसमें आईएआरआई और कृषि वैज्ञानिकों की भूमिका निर्णायक है. शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट संदेश दिया कि “Lab to Land” केवल नारा नहीं, बल्कि प्रत्येक वैज्ञानिक का दायित्व है कि शोध प्रयोगशालाओं में विकसित तकनीक खेत तक पहुंचे और किसान की आय बढ़ाए.
समारोह में केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी और रामनाथ ठाकुर, ICAR के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट, IARI के निदेशक डॉ. सी एच श्रीनिवास राव सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं और वैज्ञानिक उपस्थित रहे.