
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को यूपी विधान परिषद में बजट सत्र के दौरान विपक्ष पर जमकर निशाना साधा है. सीएम योगी आदित्यनाथ ने किसानों को लेकर पिछले 9 सालों में हुए कार्य का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि पूर्व की सरकार ने अन्नदाता किसानों की हालत खराब कर दी थी. किसानों को केवल वोट बैंक बनाकर छोड़ दिया गया था और बिचौलियों का वर्चस्व था. योगी ने कहा कि किसानों को लागत अधिक और आय कम का सामना करना पड़ रहा था. आज एफपीओ के माध्यम से पहचान बना रहा है. अन्नदाता से उद्यमी बनने की कहानी आज उत्तर प्रदेश में देखी जा सकती है.
सीएम योगी ने कहा कि औपनिवेशिक काल में यहां शोषण हुआ, लूट हुई, परंपरागत उद्यम समाप्त किए गए. अन्नदाता किसानों को, जो पहले उत्पादक था, उसे उपभोक्ता बनाकर रख दिया गया. वहीं कच्चा माल यहां से बाहर जाता था, फिर पक्का माल बनकर आता था और उस पर भारी टैक्स लगाकर महंगा बेचा जाता था. आज हम कह सकते हैं कि पिछली सरकारों में भी औपनिवेशिक मानसिकता के साथ अन्नदाता किसानों, एमएसएमई सेक्टर और परंपरागत उद्यम से जुड़े कारीगरों के साथ यही व्यवहार हुआ.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आगे कहा कि ड्रोन दीदी के जरिए गांव में अपनी पहचान बना रहा है. हमारा लक्ष्य अन्नदाता की आय बढ़ाना है. कृषि विकास दर 8.5 फीसदी से बढ़कर 18 फीसदी तक पहुंच गया है. सीएम योगी ने कहा कि अन्नदाता किसानों को ग्लोबल मार्केट एक्सेस में मदद की गई है. वहीं उन्नत बीज, प्राकृतिक खेती, ड्रोन और जलवायु आधारित खेती को उपलब्ध कराया जा रहा है. उधर,कृषि वैज्ञानिक खेतों में जाकर किसानों को मदद कर रहे हैं. एग्री स्टार्टअप और फूड प्रोसेसिंग पर जोर दिया जा रहा है.
योगी ने कहा कि 2017 के पहले प्रदेश में स्लॉटर हाउस धड़ल्ले से चलते थे. व्यापक तस्करी होती थी और आस्था के साथ खिलवाड़ होता था. जीरो टॉलरेंस नीति के तहत गोहत्या को लेकर कठोर कानून बनाए गए और गोतस्करी पर रोक लगी. आज 7,727 गो आश्रय स्थल प्रदेश में संचालित हैं जिनमें 16 लाख से अधिक गोवंश संरक्षित हैं. उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती को भी इसके माध्यम से आगे बढ़ाया जा रहा है. आज उत्तर प्रदेश दुग्ध उत्पादन में अग्रणी राज्य है और मत्स्य उत्पादन में भी दोगुनी से अधिक वृद्धि हुई है.
सीएम ने आगे कहा आज ओडीओपी के माध्यम से उत्पादकों को बाजार से जोड़ा. वहीं 96 लाख एमएसएमई यूनिट में 96 लाख युवाओं के लिए रोजगार का रास्ता खुला. जो सरकार अपने हस्तशिल्पियों का सम्मान नहीं करती, उसका सपा जैसा हाल होगा. निवेश की पहली शर्त सुरक्षा, दूसरी सुविधा और तीसरी शर्त पालिसी बनाकर उसका क्रियान्वयन करना है. आज यूपी में तीनों हैं. जहां पहले मात्र 14 हजार कारखाने थे, 2017 के बाद से इनकी संख्या 31 हजार पार कर गई है.
सीएम योगी ने कहा कि विपक्ष के लोग भी गाहे-बगाहे अन्नदाता की चर्चा करते हैं, लेकिन नीयत उनकी साफ नहीं है. उत्तर प्रदेश देश की सबसे बड़ी आबादी वाला राज्य भी है. सबसे ज्यादा खाद्यान्न उत्पादन भी करता है लेकिन अन्नदाता किसानों की स्थिति उनके समय में क्या थी. इन्होंने कहां पहुंचा दिया था? भारत आज से 2000 वर्ष पहले दुनिया की अर्थव्यवस्था का सिरमौर था. उन्होंने कहा कि 44 प्रतिशत वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भारत का अधिकार था. वह भारत का स्वर्ण युग था. आज से 400 वर्ष पहले भी भारत की स्थिति यही थी और ग्लोबल इकॉनामी में भारत का शेयर 24-25 प्रतिशत था.
सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि में भी उत्तर प्रदेश के किसानों को 95 हजार करोड़ रुपये की धनराशि उनके खाते में हस्तांतरित हुई है. आज अन्नदाता किसानों को उन्नत बीज, प्राकृतिक खेती, ड्रोन और जलवायु संबंधी तकनीकी जानकारी सरल भाषा में पहुंचाई जा रही है. कृषि वैज्ञानिकों, स्टार्टअप और प्रगतिशील किसानों के माध्यम से व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री योगी ने आगे कहा कि ड्रोन दीदी, एफपीओ, एग्री स्टार्टअप और फूड प्रोसेसिंग के माध्यम से फसलों का मूल्यवर्धन हो रहा है. यूपी एग्रीकल्चर ग्रोथ एंड एंटरप्राइज इकोसिस्टम” परियोजना के माध्यम से उत्पादकता बढ़ाने, संसाधनों के बेहतर उपयोग और कृषि आधारित उद्योगों की गुणवत्ता सुधार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है.
सीएम योगी ने कहा कि गन्ना किसानों की चर्चा अक्सर सदन में होती है. आज देश के कुल गन्ना उत्पादन का 55 प्रतिशत प्रदेश का किसान करता है. सन 2000 से 2017 के बीच ₹2,14,000 करोड़ का भुगतान हुआ था, जबकि पिछले साढ़े आठ वर्षों में ₹3,06,000 करोड़ का गन्ना मूल्य भुगतान किया गया है. यानी आधे समय में ₹90,000 करोड़ अधिक भुगतान हुआ है.
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