किसान संगठनों का बड़ा ऐलान, US ट्रेड डील के खिलाफ इस तारीख को लखनऊ के सड़कों पर करेंगे रैली

किसान संगठनों का बड़ा ऐलान, US ट्रेड डील के खिलाफ इस तारीख को लखनऊ के सड़कों पर करेंगे रैली

किसान नेताओं ने आपस में बातचीत शुरू कर दी है, ताकि एकजुट होकर एक बड़ा विरोध प्रदर्शन किया जा सके. किसानों का मकसद है कि भारत और अमेरिका के बीच होने वाली ट्रेड डील में खेती और डेयरी सेक्टर को शामिल न किया जाए.

किसान संगठनों का ऐलानकिसान संगठनों का ऐलान
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Feb 14, 2026,
  • Updated Feb 14, 2026, 1:32 PM IST

एक बार फिर किसान सड़कों पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं. दरअसल, किसान नेताओं ने आपस में बातचीत शुरू कर दी है, ताकि एकजुट होकर एक बड़ा विरोध प्रदर्शन किया जा सके. किसानों का मकसद है कि भारत और अमेरिका के बीच होने वाली ट्रेड डील में खेती और डेयरी सेक्टर को शामिल न किया जाए. दोनों देशों के बीच करीब एक महीने में यह समझौता होने की संभावना है. इस बीच, एक किसान संगठन ने 22 मार्च को राज्य की राजधानी लखनऊ में किसान रैली करने का फैसला लिया है. राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के अध्यक्ष वी एम सिंह ने कहा  कि हम 22 मार्च को लखनऊ में भारत–US ट्रेड डील के खिलाफ विरोध रैली करेंगे. हमारी मांग है कि खेती और डेयरी को इस समझौते से बाहर रखा जाए.

जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपेने की अपील

उन्होंने अपने संगठनों से जुड़े किसानों से अपील की है कि वे इस ट्रेड डील के खिलाफ 16 फरवरी को अपने-अपने जिले के कलेक्टर को ज्ञापन सौंपें. राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के अध्यक्ष वी एम सिंह ने कहा कि इस समझौते को लेकर किसानों और कृषि से जुड़े लोगों से कोई सलाह-मशविरा नहीं किया गया. उन्होंने कहा कि अगर भारत कुछ कृषि उत्पादों पर सहमति दे देता है, तो धीरे-धीरे बाकी उत्पाद भी इस दायरे में आ जाएंगे, जिससे देश के छोटे किसानों को नुकसान होगा.  वहीं, भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत, जो उत्तर प्रदेश से हैं, वो भी इस मुद्दे पर किसानों के हितों को लेकर लगातार आवाज उठाते रहे हैं.

किसान नेताओं ने राहुल गांधी से की मुलाकात

इसी तरह की योजना के लिए समर्थन जुटाने के लिए किसान संगठन अन्य राज्यों की यात्रा कर रहे हैं, पंजाब, राजस्थान और मध्य प्रदेश के कुछ किसान नेताओं ने शुक्रवार को विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मुलाकात की और भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार सौदे के खिलाफ उनका समर्थन मांगा. बैठक में मौजूद एक किसान नेता ने बताया कि राहुल गांधी ने व्यापार सौदे के खिलाफ संयुक्त लड़ाई पर जोर देते हुए कहा कि एक बार भारत द्वारा सहमत होने के बाद, किसी भी बाद की सरकार के लिए रियायतों को पलटना मुश्किल होगा.

उन्होंने किसान नेताओं से कहा कि वे अपने व्यक्तिगत मतभेदों को भुलाकर एक संयुक्त संघर्ष के लिए एकजुट हों और किसानों और देश के हितों के लिए हानिकारक किसी भी प्रावधान को अनुमति न दें. कांग्रेस पार्टी ने एक बयान में कहा कि किसान नेताओं ने विशेष रूप से मक्का, सोयाबीन, कपास, फलों और मेवों के छोटे और सीमांत उत्पादकों की आजीविका के लिए अपनी गहरी चिंता व्यक्त की.

किसानों के साथ मजबूती से खड़े हैं राहुल

राहुल गांधी ने 12 फरवरी को कहा था कि सरकार उनके खिलाफ मामले या विशेषाधिकार प्रस्ताव दायर कर सकती है, लेकिन वह किसानों के साथ मजबूती से खड़े रहेंगे. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर "किसान विरोधी" होने और भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार सौदे के माध्यम से देश को "बेचने" का भी आरोप लगाया था. कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान शुक्रवार को व्यापार सौदे पर मीडिया को संबोधित करने वाले थे, लेकिन आखिरी समय में रद्द कर दिया.

ट्रेड डील पर क्या बोले शिवराज सिंह

वहीं, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान 8 फरवरी से अलग-अलग मंचों से इस सौदे पर बोल रहे है. उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने किसान समुदाय के हितों की पूरी तरह से रक्षा की है. दिल्ली में शुक्रवार को ICAR-IARI के 64वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए चौहान ने यह भी कहा कि न केवल US के साथ व्यापार समझौता, बल्कि यूरोप सहित अन्य देशों के साथ सभी मुक्त व्यापार समझौते राष्ट्र हित में किए गए हैं. उन्होंने कहा कि कोई भी प्रमुख फसल- जैसे गेहूं, मक्का, चावल, सोयाबीन और मोटे अनाज, किसी भी टैरिफ रियायत का सामना नहीं करती है, जो घरेलू उत्पादकों को नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि डेयरी और पोल्ट्री जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को पूरी तरह से सुरक्षित रखा गया है. लेकिन, संयुक्त बयान में US से “चारे के लिए लाल-ज्वार”, एक मोटा अनाज, शून्य या कम टैरिफ पर आयात की अनुमति देने का उल्लेख किया गया है. 

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