
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले की सिसौली के किसान भवन में चार दिवसीय प्राकृतिक खेती शिविर की शुरुआत की गई. कार्यक्रम का शुभारंभ किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत के चित्र पर पुष्प अर्पित कर और दीप जलाकर किया गया. इस मौके पर देशभर से आए किसानों ने उत्साह के साथ भाग लिया. शिविर के पहले दिन प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक सुभाष पालेकर ने प्राकृतिक खेती के बारे में विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने कहा कि आज की रासायनिक खेती किसानों के लिए नुकसानदायक साबित हो रही है, जिससे उनकी आय घट रही है और स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है. इसके विपरीत, प्राकृतिक खेती अपनाने से किसान कर्ज से मुक्त हो सकते हैं और उनकी आमदनी भी बढ़ सकती है.
इस अवसर पर भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत सहित अनेक किसान नेता और हजारों किसान उपस्थित रहे. शिविर के प्रथम दिन अपने संबोधन में सुभाष पालेकर ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि किस प्रकार उन्होंने अपने क्षेत्र में बिना किसी रासायनिक खाद और कीटनाशक के खेती कर उल्लेखनीय सफलता हासिल की है.
उन्होंने ‘जीरो बजट प्राकृतिक खेती’ के बारे में बताते हुए कहा कि बिना रासायनिक खाद और कीटनाशक के भी अच्छी खेती की जा सकती है. इससे जमीन की उर्वरता बढ़ती है और आने वाली पीढ़ियों के लिए खेती सुरक्षित रहती है. उन्होंने यह भी बताया कि प्राकृतिक खेती सिर्फ एक तरीका नहीं, बल्कि एक जीवन शैली है, जो पर्यावरण और किसानों दोनों के लिए फायदेमंद है. उनकी जानकारी को किसानों ने बड़े ध्यान से सुना और अनेक किसानों ने उनसे सीधा संवाद कर अपने सवालों के जवाब भी पूछे.
इस दौरान भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत भी मौजूद रहे. उन्होंने सुभाष पालेकर के काम की सराहना करते हुए कहा कि उनकी पद्धति किसानों के लिए नई उम्मीद लेकर आई है. टिकैत ने कहा कि आज किसान बढ़ती लागत और घटती आय से परेशान है, ऐसे में प्राकृतिक खेती एक अच्छा विकल्प बन सकती है. उन्होंने किसानों से अपील की कि वे इस शिविर से मिली जानकारी को अपने खेतों में अपनाएं. साथ ही कहा कि अगर किसान आत्मनिर्भर बनेंगे, तो देश की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी.
राकेश टिकैत ने कहा कि भारतीय किसान यूनियन हमेशा से किसानों के हितों के लिए संघर्ष करती रही है और आगे भी प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए हर संभव प्रयास करेगी. उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती न केवल किसानों की आय बढ़ाएगी, बल्कि देश को रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर निर्भरता से भी मुक्त करेगी.
शिविर के पहले दिन अलग-अलग राज्यों से आए किसानों ने अपने अनुभव साझा किए और विशेषज्ञों से सवाल पूछकर अपनी जिज्ञासाएं दूर कीं. आयोजन में किसानों के लिए अच्छी व्यवस्थाएं की गई हैं, ताकि वे पूरे ध्यान से प्रशिक्षण ले सकें. यह चार दिवसीय शिविर किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है. अंत में किसानों ने संकल्प लिया कि वे प्राकृतिक खेती अपनाकर अपनी आय बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देंगे.