
विधायिका में अपराधियों के पहुंचने से जुड़ी चिंता अब समय के साथ भले ही कम हो रही हो, लेकिन इसके साथ ही विधायिका में धन बल का तेजी से बढ़ रहा प्रभाव, नए सिरे से चिंता पैदा कर रहा है. हाल ही में संपन्न हुए हरियाणा और जम्मू कश्मीर के Election Results ने इस चिंता को बढ़ा दिया है. चुनाव वाले इन दोनों राज्यों के Newly Elected MLAs के हलफनामे की विश्लेषण रिपोर्ट में यह चिंता व्यक्त की गई है. इससे जुड़ी एक रिपोर्ट के मुताबिक हरियाणा में चुने गए लगभग सभी विधायक करोड़पति हैं. वहीं जम्मू कश्मीर में यह आंकड़ा 84 फीसदी तक पहुंच गया है. रिपोर्ट के मुताबिक इन दाेनों राज्यों में राहत की बात सिर्फ इतनी सी है कि आपराधिक पृष्ठभूमि वाले विधायक चुने जाने की वृद्धि दर में मामूली ठहराव आया है.
पिछले कुछ दशकों से राजनीति में धनबल और बाहुबल को बढ़ावा मिलने पर लगातार चिंता जताई जा रही है. इस चिंता के समाधान के लिए Electoral Reforms के सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप आपराधिक पृष्ठभूमि वाले निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की वृद्धि दर में मामूली गिरावट के बीच विधायिका में धनबल का जाेर लगातार बढ़ रहा है. हाल ही में संपन्न हुए हरियाणा और जम्मू कश्मीर का विधानसभा चुनाव इसका ताजा उदाहरण है.
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पिछले सालों में इसका ग्राफ लगातार बढ़ा है. हरियाणा विधानसभा में साल 2009 के चुनाव में 72 प्रतिशत करोड़पति विधायक चुने गए थे. इसके बाद 2014 में यह बढ़कर 83 फीसदी हो गया और 2019 में यह 93 प्रतिशत से बढ़कर इस चुनाव में 96 प्रतिशत तक पहुंच गया है. इसी प्रकार जम्मू कश्मीर विधानसभा में भी 2014 में 75 प्रतिशत विधायक करोड़पति थे. इस चुनाव में यह बढ़कर 84 प्रतिशत हो गया है.
एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा में पिछले 4 विधानसभा चुनाव के दौरान आपराधिक पृष्ठभूमि वाले विधायकाें का ग्राफ धीमी गति से ही सही, लेकिन इसमें गिरावट दर्ज की जा रही है. वहीं, Serious Criminal Cases का सामना कर रहे विधायकों की संख्या में इजाफा हो रहा है. रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा में 2009 के चुनाव में 17 फीसदी विधायकों के विरुद्ध आपराधिक और 2 फीसदी के विरुद्ध गंभीर किस्म के आपराधिक मामले दर्ज थे.
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इसके बाद 2014 के चुनाव में Criminal Cases का सामना कर रहे विधायकों की भागीदारी गिरकर 10 प्रतिशत रह गई, जबकि गंभीर आपराधिक मामलों का सामना कर रहे विधायकों का प्रतिशत 2 से बढ़ कर 6 हो गया. वहीं, 2019 के चुनाव आपराधिक मामलों में फंसे विधायकों का प्रतिशत बढ़कर 13 हो गया, जाे 2014 में भी स्थिर रहते हुए 13 प्रतिशत पर ही टिका है. जबकि 2019 में गंभीर आपराधिक मामलों का सामना कर रहे विधायकों का प्रतिशत 8 था जो 2014 में घटकर 7 प्रतिशत पर आ गया.
इसके अलावा जम्मू कश्मीर की अगर बात की जाए तो यहां की विधानसभा में 2014 के चुनाव में 6 प्रतिशत विधायकों के विरुद्ध आपराधिक एवं 2 प्रतिशत विधायकों के विरुद्ध गंभीर आपराधिक मामले दर्ज थे. जबकि 2024 के चुनाव में यह प्रतिशत बढ़कर 10 और 9 हो गया.
निष्कर्ष के तौर पर यह कहा जा सकता है कि चुनाव वाले इन दोनों राज्यों में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले नेताओं की वृद्धि दर में या तो गिरावट हो रही है या ठहराव की स्थिति है. वहीं, विधायिका में धनबल का बाहुल्य तेज गति से बढ़ रहा है.