
बिहार में ग्रामीण विकास को नई रफ्तार देने के लिए राज्य सरकार ने एक नई पहल शुरू की है. अब हर महीने के अंतिम रविवार को पूरे प्रदेश में ‘पंचायत विकास दिवस’ मनाया जाएगा. इस दिन ग्राम पंचायतों में विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी और स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए योजनाएं तैयार की जाएंगी. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मुंगेर जिले के टेटिया बंबर प्रखंड स्थित टेटिया ग्राम पंचायत से इस अभियान की शुरुआत की. उन्होंने कहा कि पंचायत विकास दिवस का मुख्य उद्देश्य गांवों को गरीबी मुक्त, स्वच्छ, समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाना है.
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि विकसित भारत और समृद्ध बिहार का सपना तभी पूरा हो सकता है, जब गांव मजबूत और आत्मनिर्भर बनेंगे. पंचायत विकास दिवस के माध्यम से ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को एक मंच पर लाकर विकास योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू करने की कोशिश की जाएगी. उन्होंने बताया कि इस विशेष दिवस पर पंचायत स्तर पर स्वास्थ्य, शिक्षा, जल प्रबंधन, सिंचाई, पेयजल व्यवस्था, स्वच्छता, हरित विकास, सामाजिक न्याय और सामाजिक सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जाएगी. ग्राम सभाओं के माध्यम से ग्रामीणों की समस्याएं सुनी जाएंगी और उनके समाधान के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे.
पंचायत विकास दिवस के पहले आयोजन की थीम ‘महिला हितैषी पंचायत’ रखी गई. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए लगातार काम कर रही है. उन्होंने जीविका दीदियों का जिक्र करते हुए कहा कि महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं. उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से अपील की कि वे ग्राम सभाओं के माध्यम से महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और उनके विकास से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता दें.
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में आयोजित सहयोग शिविरों के जरिए लाखों लंबित आवेदनों का समय पर निपटारा किया गया था. इसी अनुभव को आगे बढ़ाते हुए पंचायत विकास दिवस को ग्रामीण विकास का प्रभावी माध्यम बनाया जाएगा. उन्होंने कहा कि अब हर महीने पंचायत स्तर पर जनप्रतिनिधि और ग्रामीण एक साथ बैठेंगे, विकास कार्यों की समीक्षा करेंगे और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा करेंगे. पंचायत विकास दिवस के जरिए सरकार का लक्ष्य है कि गांवों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत किया जाए और लोगों की भागीदारी से पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाया जाए. यह पहल ग्रामीण बिहार के विकास में एक अहम कदम साबित हो सकती है.