
दुनिया की प्रमुख फर्टिलाइजर कंपनियों में से एक, 'यारा इंडिया' ने नई दिल्ली के फिक्की फेडरेशन हाउस में अपनी साल 2025 की सस्टेनेबिलिटी रिपोर्ट जारी की है. इस खास रिपोर्ट को “बिल्डिंग ट्रस्ट थ्रू 15 इयर्स ऑफ रिस्पॉन्सिबल ग्रोथ”नाम दिया गया है.ग्लोबल रिपोर्टिंग इनिशिएटिव (GRI) के मानकों पर तैयार यह रिपोर्ट पूरी पारदर्शिता के साथ कंपनी के पर्यावरण, समाज और गवर्नेंस (ESG) से जुड़े कामकाज का पूरा लेखा-जोखा देती है. इसमें उत्तर प्रदेश के बबराला प्लांट, गुरुग्राम हेडक्वार्टर और पुणे ऑफिस के प्रदर्शन की जानकारी शामिल है. इस मौके पर भारत में नॉर्वे की राजदूत हेर एक्सीलेंसी मे-एलिन स्टेनर ने दोनों देशों के मजबूत व्यापारिक रिश्तों और पर्यावरण को बचाने के प्रयासों की तारीफ की. वहीं यारा साउथ एशिया के एमडी संजीव कंवर ने कहा कि कंपनी के लिए भरोसा ही तरक्की का पैमाना है. पिछले 15 सालों में कंपनी ने फैक्ट्रियों के प्रदूषण को कम किया है और डिजिटल तकनीक से करोड़ों छोटे किसानों को आत्मनिर्भर बनाया है.
यारा इंडिया की यह रिपोर्ट उनके लोकल '5Cs' फ्रेमवर्क—कमिट, कनेक्ट, केयर, कंसर्न और कंट्रीब्यूट पर आधारित है, जो सीधे यूनाइटेड नेशन्स के सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (SDGs) से मेल खाता है. इसका मकसद मौसम बदलाव, पानी की कमी और मिट्टी की घटती ताकत जैसी समस्याओं को दूर करना है. और साल 2040 तक के पर्यावरणीय खतरों से निपटने का मजबूत सिस्टम बनाया है. ट्रांसपोर्टेशन के क्षेत्र में कंपनी ने "ऑपरेशन मूनशॉट" चलाकर सड़कों के बजाय रेलवे और बड़े समुद्री जहाजों से माल भेजा, जिससे लॉजिस्टिक्स के प्रदूषण को 52.41 फीसदी तक घटाने में बड़ी सफलता मिली. इसके अलावा, कंपनी के 'याराफार्मकेयर' ऐप को 61.5 लाख से ज्यादा बार डाउनलोड किया जा चुका है, और फैक्ट्रियों में AI कैमरा सिस्टम लगाकर बोरियों की पैकिंग से जुड़ी शिकायतों को 64% तक कम किया गया है.
पर्यावरण और कर्मचारियों की सुरक्षा के मामले में कंपनी ने अपने स्कोप 1 और 2 एमिशन्स में 3.4% की कमी की है, जिससे उनका ग्रीनहाउस गैस इंटेंसिटी स्कोर 2.522 रहा जो वैश्विक टारगेट से बेहतर है. जल संरक्षण के लिए रिकॉर्ड 177.84 मेगा लीटर पानी को रीसायकल किया गया और 90.285 मेगा लीटर बारिश का पानी इकट्ठा किया गया. साथ ही फैक्ट्री में 'जीरो एक्सीडेंट' का रिकॉर्ड भी बरकरार रहा. किसानों की मदद ( के लिए कंपनी के एक्सपर्ट्स ने देश भर में 71,784 से ज्यादा खेती से जुड़ी ट्रेनिंग गतिविधियां चलाईं. महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए 5 महिला पीएचडी स्कॉलर्स को 'वूमेन इन एग्रोनॉमी स्कॉलर अवार्ड' दिया गया. समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाते हुए कंपनी ने 'किरण' योजना से 353 महिला स्वयं सहायता समूहों की 4,700 से ज्यादा महिलाओं को मदद दी, मोबाइल वैन से हजारों मरीजों का मुफ्त इलाज किया, 20,000 से ज्यादा बच्चों के लिए स्मार्ट क्लासरूम बनाए और 300 से ज्यादा परिवारों को पीने का साफ पानी दिया.
यारा ने भारत में अपने सफर की शुरुआत साल 2011 में महाराष्ट्र से की थी. साल 2018 में कंपनी ने यूपी के बबराला में मौजूद टाटा केमिकल्स का यूरिया प्लांट खरीदा, जो भारत के फर्टिलाइजर सेक्टर में अब तक का सबसे बड़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश है. आज कंपनी अपने 'यारा क्रॉप न्यूट्रिशन सेंटर' के जरिए देश के 17 राज्यों और 1 केंद्र शासित प्रदेश में फैले 1500 से अधिक केंद्रों की मदद से 12 लाख से ज्यादा किसानों को फायदा पहुंचा रही है. डिजिटल माध्यम से कंपनी 55 लाख किसानों और 218 FPOs से जुड़ी है. साल 2019 में बना 'यारा इंडिया टेक्नोलॉजी सेंटर' दुनिया के तीन सबसे बड़े ग्लोबल डिजिटल हब्स में से एक है, जो खेती के डिजिटल समाधान बनाता है. आने वाले भविष्य के लिए कंपनी ने तीन मुख्य प्राथमिकताएं तय की हैं—पहला, बायोगैस और जैविक खादों के पोर्टफोलियो को तेजी से बढ़ाना; दूसरा, बबराला प्लांट की कार्यक्षमता को और बेहतर करना; और तीसरा, अपने ट्रांसपोर्टेशन नेटवर्क को पूरी तरह इको-फ्रेंडली और कार्बन-कुशल बनाना ताकि प्रदूषण को खत्म किया जा सके