भारत-अमेरिका ट्रेड डील के खिलाफ लामबंद हुए किसान संगठन, 1 जुलाई को तय करेंगे आंदोलन की रणनीति

भारत-अमेरिका ट्रेड डील के खिलाफ लामबंद हुए किसान संगठन, 1 जुलाई को तय करेंगे आंदोलन की रणनीति

चंडीगढ़ के सेक्टर-35 स्थित किसान भवन में 25 जून 2026 को किसान, मजदूर और सामाजिक संगठनों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई. बैठक में भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर किसानों, मजदूरों, पशुपालकों, छोटे व्यापारियों और पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की गई.

भारत-अमेरिका ट्रेड डील के खिलाफ किसान संगठनभारत-अमेरिका ट्रेड डील के खिलाफ किसान संगठन
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Jun 25, 2026,
  • Updated Jun 25, 2026, 7:31 PM IST

भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में किसान संगठनों ने अपनी रणनीति तैयार करने की कवायद तेज कर दी है. इसी कड़ी में  जुलाई 2026 को चंडीगढ़ के किसान भवन, सेक्टर-35 ए में सभी किसान, मजदूर और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों की साझा बैठक बुलाई गई है. इस बैठक में ट्रेड डील के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन की रूपरेखा, और आगे की रणनीति पर फैसला लिया जाएगा. इससे पहले 25 2026 जून यानी आज चंडीगढ़ के सेक्टर-35 स्थित किसान भवन में अलग-अलग किसान, मजदूर और सामाजिक संगठनों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई. बैठक में भारत-अमेरिका ट्रेड डील के किसानों, पशुपालकों, मजदूरों, छोटे व्यापारियों और देश की खाद्य और आर्थिक संप्रभुता पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को लेकर गंभीर चर्चा हुई.

चढूनी की पहल पर एकजुट हुए किसान संगठन 

दरअसल, किसान संगठनों की एकता को लेकर गुरनाम सिंह चढूनी की ओर से पत्र भेजा गया था, जिसमें भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और भूजल संरक्षण जैसे मुद्दों पर सभी किसान संगठनों को एक मंच पर आने की अपील की गई थी. इसके जवाब में संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) ने अपने सुझाव साझा किए और किसान संगठनों की व्यापक एकता को जरूरी बताया.

खेती और खाद्य सुरक्षा के मुद्दे पर किसान एकजुट

बैठक में संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक), एकेएमएम (गैर-राजनीतिक), आजाद किसान मोर्चा, किसान मजदूर संघर्ष मोर्चा हरियाणा, राष्ट्रीय किसान महासंघ, ऑल इंडिया एमएसपी मोर्चा सहित कई संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया. पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र, केरल, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों से किसान प्रतिनिधि भी बैठक में मौजूद रहे.

बैठक में सभी संगठनों ने एकमत होकर फैसला लिया कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील के खिलाफ व्यापक स्तर पर संयुक्त संघर्ष चलाया जाएगा. किसान नेताओं ने कहा कि यह समझौता किसानों, पशुपालकों, मजदूरों और आम लोगों के हितों को प्रभावित कर सकता है, इसलिए सभी संगठनों को एकजुट होकर अपनी आवाज उठानी होगी.

ट्रेड डील के खिलाफ बनेगा बड़ा प्लान

संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) ने बैठक में किसान संगठनों की व्यापक एकता को लेकर अपने सुझाव भी दिए. मोर्चे की ओर से कहा गया कि खेती-किसानी के क्षेत्र में बढ़ती चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए मजबूत, टिकाऊ और व्यापक एकता जरूरी है. इसके लिए सभी संगठनों के बीच साझा न्यूनतम कार्यक्रम, नियम-कानून और आंदोलन की दिशा को लेकर सहमति बनाना आवश्यक है.

1 जुलाई को बनेगी आंदोलन की रणनीति

मोर्चे ने अपने सुझाव पत्र में किसान संगठनों की एकता को मजबूत करने और भविष्य में लंबे संघर्षों को बेहतर तरीके से चलाने के लिए स्पष्ट रणनीति तय करने की बात कही. संगठन ने बताया कि ट्रेड डील के खिलाफ अभियान को लेकर सभी संगठनों से चर्चा जारी है और जल्द ही आगे की रूपरेखा तैयार की जाएगी. बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि 1 जुलाई की साझा बैठक में उन संगठनों और प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाएगा, जो 25 जून की बैठक में किसी कारण से शामिल नहीं हो सके. इसके जरिए ज्यादा से ज्यादा किसान, मजदूर और सामाजिक संगठनों को एक मंच पर लाकर मजबूत आंदोलन की तैयारी की जाएगी.

किसान नेताओं ने स्पष्ट किया कि देश की कृषि, पशुपालन, रोजगार और खाद्य सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा कि किसानों और मजदूरों की चिंताओं को नजरअंदाज किया गया तो संयुक्त मोर्चा देशव्यापी आंदोलन का रास्ता अपनाएगा. 

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