
भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर चिंता जताई है. दिल्ली स्थित प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि प्रस्तावित व्यापार समझौते से देश के किसानों, पशुपालकों, डेयरी सेक्टर, पोल्ट्री उद्योग और भारत की खाद्य सुरक्षा पर नकारात्मक असर पड़ सकता है. चढ़ूनी ने आरोप लगाया है कि अगर अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए भारतीय बाजार को ज्यादा खोल दिया गया तो छोटे और मध्यम किसान विदेशी उत्पादों से प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाएंगे. उन्होंने सरकार से मांग की है कि किसी भी व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने से पहले किसानों, मजदूरों और कृषि विशेषज्ञों से व्यापक चर्चा की जाए.
किसान नेता ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता लंबे समय से चल रही है और अब इसके अंतिम चरण में पहुंचने की खबरें सामने आ रही हैं. उन्होंने आशंका जताई कि समझौते के तहत कुछ कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क कम किए जा सकते हैं, जिससे भारतीय किसानों पर दबाव बढ़ सकता है. उन्होंने कहा कि कपास, लाल ज्वार, सोयाबीन तेल, संतरे के रस और अन्य कृषि उत्पादों के आयात में बढ़ोतरी होने से भारतीय किसान मुश्किल में आ सकते हैं, क्योंकि अमेरिकी किसानों को मिलने वाली सरकारी सहायता और सब्सिडी के कारण वहां के उत्पाद कम कीमत पर बाजार में आ सकते हैं.
गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि ट्रेड डील के जरिए अमेरिकी डेयरी और पोल्ट्री उत्पादों के लिए भारतीय बाजार में रास्ता आसान होने की संभावना है. उन्होंने कहा कि इसका असर देश के लाखों पशुपालकों और छोटे डेयरी किसानों पर पड़ सकता है. उन्होंने जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) कृषि उत्पादों को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि ऐसे उत्पादों के प्रवेश से किसानों और उपभोक्ताओं दोनों के हित प्रभावित हो सकते हैं.
किसान नेता चढ़ूनी ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) व्यवस्था पर भी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि अगर किसी भी अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते MSP या सरकारी खरीद व्यवस्था में बदलाव किया गया तो इसका सबसे ज्यादा असर गेहूं और धान किसानों पर पड़ेगा. उन्होंने कहा कि पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में बड़ी संख्या में किसान सरकारी खरीद व्यवस्था पर निर्भर हैं. ऐसे में MSP व्यवस्था कमजोर होने से किसानों की आय और कृषि व्यवस्था पर असर पड़ सकता है.
किसान नेता ने केंद्र सरकार से भारत-अमेरिका ट्रेड डील से जुड़े सभी प्रस्तावों को सार्वजनिक करने की मांग की. उन्होंने कहा कि किसानों, डेयरी उत्पादकों, मजदूरों और कृषि विशेषज्ञों से बातचीत के बिना कोई बड़ा फैसला नहीं लिया जाना चाहिए. उन्होंने प्रधानमंत्री से किसानों, मछुआरों, डेयरी और पोल्ट्री क्षेत्र के हितों की रक्षा करने की अपील की.
गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने देशभर के किसानों, मजदूर संगठनों, युवा संगठनों और आम लोगों से 23 जून 2026 को भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की अपील की. उन्होंने कहा कि लोग काली पट्टी बांधकर, बैनर और तख्तियां लेकर अपने-अपने क्षेत्रों में विरोध दर्ज करा सकते हैं. उन्होंने कहा कि कृषि और खाद्य सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सभी संगठनों को एकजुट होकर आवाज उठानी होगी.
उन्होंने बताया कि 25 जून 2026 को चंडीगढ़ स्थित किसान भवन में विभिन्न किसान, मजदूर, सामाजिक और जन संगठनों की संयुक्त बैठक बुलाई गई है. इस बैठक में ट्रेड डील के संभावित प्रभावों पर चर्चा की जाएगी और आगे की रणनीति तैयार की जाएगी. चढ़ूनी ने कहा कि अगर यह समझौता किसानों के हितों के खिलाफ हुआ तो देशभर में व्यापक आंदोलन किया जाएगा. उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र और किसानों के हितों की रक्षा के लिए सभी संगठनों को मिलकर आगे बढ़ना होगा.