पश्चिम बंगाल के किसानों और चाय बागानों को बड़ी राहत, कंटेनर और बैरल में डीजल ले जाने की मिली अनुमति

पश्चिम बंगाल के किसानों और चाय बागानों को बड़ी राहत, कंटेनर और बैरल में डीजल ले जाने की मिली अनुमति

पश्चिम बंगाल सरकार ने किसानों और चाय बागान से जुड़े लोगों को बड़ी राहत दी है. खेती और चाय उद्योग की जरूरतों को देखते हुए कंटेनर और बैरल में डीजल ले जाने पर लगी पाबंदियों में ढील दी गई है. इससे किसानों को सिंचाई और कृषि कार्यों में आसानी होगी.

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  • Noida,
  • Jun 28, 2026,
  • Updated Jun 28, 2026, 3:24 PM IST

पश्चिम बंगाल सरकार ने किसानों और चाय बागान से जुड़े लोगों को बड़ी राहत दी है. दरअसल, सरकार ने  कंटेनर और बैरल में डीजल खरीदने और ले जाने पर लगी पाबंदियों में ढील दी है. सरकार ने यह कदम खेती और चाय उद्योग जैसे जरूरी क्षेत्रों में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने और कामकाज को बिना रुकावट जारी रखने के लिए उठाया है. मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि डीजल की सप्लाई से जुड़ी पाबंदियों के कारण किसानों और चाय बागान संचालकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था. खेती के कामों, सिंचाई और चाय उत्पादन से जुड़ी गतिविधियों में डीजल की अहम भूमिका होती है, ऐसे में सरकार ने जनहित को ध्यान में रखते हुए नियमों में राहत देने का फैसला किया है.

खेती के कामों में मिलेगी आसानी

डीजल की आसान उपलब्धता से किसानों को ट्रैक्टर, पंपसेट और अन्य कृषि मशीनों के इस्तेमाल में मदद मिलेगी. खासकर खेती के सीजन यानी खरीफ फसलों में सिंचाई और खेत तैयार करने जैसे काम समय पर पूरे हो सकेंगे. इससे किसानों को अतिरिक्त परेशानी और लागत से राहत मिलने की उम्मीद है. ऐसे में सरकार ने तेल कंपनियों को निर्देश दिए हैं कि खेती से जुड़े लोगों को डीजल खरीद में छूट दी जाए. अब किसान जरूरी पहचान पत्र दिखाकर कंटेनर या बैरल में डीजल खरीद सकेंगे.

चाय उद्योग को भी मिलेगा फायदा

पश्चिम बंगाल के चाय बागानों में मशीनों और परिवहन के लिए डीजल की जरूरत होती है. ऐसे में पाबंदियों में ढील मिलने से चाय बागानों में उत्पादन से जुड़े कामों को गति मिलेगी. इससे चाय उद्योग से जुड़े श्रमिकों और कारोबारियों को भी फायदा मिलने की उम्मीद है.

रोजाना डीजल खरीद सीमा में भी राहत

राज्य सरकार ने जरूरी क्षेत्रों के लिए डीजल की दैनिक खरीद सीमा में भी छूट देने का फैसला किया है. सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य किसानों और चाय उद्योग जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में ईंधन की कमी से होने वाली परेशानी को दूर करना है. इस फैसले से खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है. डीजल की उपलब्धता बेहतर होने से किसान समय पर कृषि कार्य कर सकेंगे, वहीं चाय बागानों में उत्पादन प्रक्रिया भी सुचारू रूप से चल सकेगी. (PTI)

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