Paddy Farming: धान की खेती कर रहे किसानों के चेहरे पर बारिश की वजह से आई खुशी

Paddy Farming: धान की खेती कर रहे किसानों के चेहरे पर बारिश की वजह से आई खुशी

मॉनसून के आगमन पर देश के किसानों ने धान की बुआई शुरू कर दी है. हालांकि अभी देश के कई राज्यों में मॉनसून की एंट्री नहीं हुई है, लेकिन प्री-मॉनसून और चक्रवाती तूफान बिपरजॉय की वजह से हुई बारिश ने धान की खेती करने वाले किसानों का काम आसान कर दिया है. जिससे किसान काफी खुश नजर आ रहे हैं.

धान की खेती कर रहे किसानों के चेहरे पर छाई खुशीधान की खेती कर रहे किसानों के चेहरे पर छाई खुशी
प्राची वत्स
  • Noida,
  • Jun 20, 2023,
  • Updated Jun 20, 2023, 1:17 PM IST

अरब सागर में 6 जून को उठे चक्रवाती तूफान बिपरजॉय का असर अब दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान सहित कई अन्य राज्यों में दिखने लगा है. जिस वजह से मौसम में कई बदलाव देखे जा रहे हैं. आपको बता दें चक्रवाती तूफान बिपरजॉय की वजह से इन राज्यों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई है. वही कुछ इलाकों में मूसलाधार बारिश भी हुई है. कुछ क्षेत्रों में इस तूफान से खेती को बहुत नुकसान हुआ है. लेक‍िन, धान की खेती वाले राज्यों में किसानों के चेहरे पर खुशी की लहर देखने को मिल रही है. ज‍िन राज्यों में लू चल रही है वहां लोगों को गर्मी से राहत मिली है. सोमवार को अंबाला में हुई भारी बारिश की वजह से धान किसानों के चेहरे खिल उठे. 

इस वक़्त धान की बुवाई चल रही है, किसानों को खेतों में पानी लगाने के लिए ट्यूबवेल चलाकर अपने खेतों की सिंचाई करने पड़ती है. ऐसे में बारिश से उन्हें ट्यूबवेल का उपयोग नहीं करना पर रहा है. अंग्रेजी अखबार द ट्रिब्यून के मुताबिक अंबाला में हर साल लगभग 86,000 हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती की जाती है. ऐसे में हो रही बारिश की वजह से धान की खेती कर रहे किसान इस वक्त काफी खुश नजर आ रहे हैं.  हालांकि, बारिश से जिले में सूरजमुखी और मक्का की बची हुई फसल की कटाई पर बुरा असर भी पड़ा है. 

क‍िसानों ने क्या कहा? 

भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) के अंबाला अध्यक्ष मलकीत सिंह ने कहा, 'धान की फसल के लिए बारिश अच्छी होती है क्योंकि इसके लिए पानी की बहुत जरूरत होती है. नलकूप चलाना एक महंगा मामला है, क्योंकि किसानों को खेतों को सींचने के लिए इसे घंटों चलाना पड़ता है, लेकिन बारिश ने आवश्यक सिंचाई पूरी कर दी है. इससे जमीन का पानी यानी ग्राउंड वॉटर की भी बचत होगी. हालांकि, सूरजमुखी और मक्का की फसलों के लिए बारिश अच्छी नहीं है क्योंकि इससे न केवल कटाई में देरी होगी बल्कि बाजारों में पड़ी उपज भी प्रभावित होगी. जहां एक ओर हो रही बारिश से धान की खेती कर रहे किसानों के चेहरे पर खुशी है वहीं दूसरी तरफ सूरजमुखी और मक्का की खेती कर रहे किसान परेशान नजर आ रहे हैं.

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हो रही बारिश को लेकर उप निदेशक कृषि जसविंदर सिंह का बयान

इस पूरे मामले को लेकर उप निदेशक कृषि जसविंदर सिंह ने कहा, "बारिश धान और गन्ने की फसल के लिए अच्छी है, लेकिन साथ ही सूरजमुखी और मक्का की फसल प्रभावित होगी. लगभग 18,000 एकड़ सूरजमुखी थी, जिसमें से लगभग 3 से 4 प्रतिशत ही बची हुई है, जबकि लगभग 4,000 हेक्टेयर में मक्का की खेती की जा रही है, जिसमें से लगभग 5 प्रतिशत की कटाई बाकी है.” 

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