
देश में बेमौसम बारिश, तेज आंधी और ओलावृष्टि ने आम के बागानों का हुलिया बिगाड़ कर रख दिया है. उत्तर प्रदेश और बिहार समेत उत्तर भारत में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने आम के बागों को तहस-नहस कर दिया है. इस संकट पर डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा बिहार के पौध सुरक्षा विभाग के हेड डॉ. एस. के. सिंह ने आगाह किया है कि आम अभी 'मंजर' और 'टिकोले' की बेहद नाजुक स्थिति में है. डॉ. सिंह के मुताबिक, ओलों की चोट और बढ़ी नमी से परागण फेल हो सकता है. साथ ही, एन्थ्रेक्नोज और पाउडरी मिल्ड्यू जैसी बीमारियां पूरी फसल तबाह कर सकती हैं.
अगर तुरंत सही प्रबंधन नहीं हुआ, तो बागवानों को 80 फीसदी तक नुकसान हो सकता है. इस तबाही को रोकने के लिए डॉ. सिंह ने 30 दिनों का 'इमरजेंसी स्प्रे शेड्यूल' सुझाया है. उनका कहना है कि अगर किसान संतुलित पोषण और स्वच्छता के साथ समय पर वैज्ञानिक निर्णय लेते हैं, तो वे इस आपदा के बावजूद 30 से 60 फीसदी तक अपनी फसल बचाकर बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं.
डॉ. एस. के. सिंह के अनुसार, बारिश और ओलों की मार के तुरंत बाद 2 दिन के भीतर बागों में नमी का स्तर इतना बढ़ जाता है कि फफूंदजनित रोग बहुत तेजी से फैल सकते हैं. उनके मुताबिक, जैसे ही बारिश थमे, बागवानों को फौरन कार्बेंडाजिम + मैनकोजेब 2 ग्राम प्रति लीटर या हेक्साकोनाजोल 1 मिली प्रति लीटर का छिड़काव करना चाहिए. डॉ. सिंह बताते हैं कि ओलों से पेड़ों और मंजर पर जो बारीक जख्म हुई है, यह स्प्रे उन पर एक सुरक्षा कवच की तरह काम करेगा और संक्रमण को आगे बढ़ने से रोक देगा. बेहतर नतीजों के लिए दवा में 'स्टिकर' जरूर मिलाएं.
डॉ. एस. के. सिंह का मानना है कि बारिश के कारण मधुमक्खियों की गतिविधि कम हो जाती है, जिससे परागण प्रभावित होता है और फूल झड़ने लगते हैं. डॉ. सिंह के मुताबिक, इस 'स्ट्रेस' से पेड़ों को उबारने के लिए पोषण की सख्त जरूरत होती है. बारिश के बाद चौथे से पांचवें दिन पोटेशियम नाइट्रेट 13:0:45 का 0.5% और बोरॉन का 0.1% का घोल बनाकर स्प्रे करना चाहिए. यह तरीका न सिर्फ फूलों को मजबूती देता है, बल्कि 'पोलन ट्यूब' की ग्रोथ को बढ़ाकर फल सेट होने की प्रक्रिया को बेहतर बनाता है.
बारिश के कारण लगातार बनी रहने वाली नमी को देखते हुए डॉ. एस. के. सिंह ने दूसरे सुरक्षा स्प्रे की सलाह दी है. डॉ. सिंह के अनुसार, जब बीमारियां दोबारा सिर उठाने लगें, तब बारिश के दसवें से बारहवें दिन में एजोक्सिस्ट्रोबिन या ट्राइफ्लोक्सिस्ट्रोबिन + टेबुकोनाजोल जैसे आधुनिक फफूंदनाशकों का इस्तेमाल करना चाहिए. यह सुरक्षा चक्र छोटे फलों दूसरे संक्रमण से बचाएगा. विशेषज्ञ का कहना है कि इस समय की गई थोड़ी सी मेहनत आने वाले समय में आम की बंपर पैदावार दे सकती है.
जबआम के टिकोले छोटे दाने के बराबर हो जाएं, तो वे पेड़ों से झड़ने लगते हैं. डॉ. एस. के. सिंह के मुताबिक, बारिश के पंद्रह से अठारह दिन बाद इस 'फ्रूट ड्रॉप' को रोकने के लिए प्लानोफिक्स या सीवीड एक्सट्रैक्ट का छिड़काव संजीवनी की तरह काम करता है. यह पौधों की तनाव सहन करने की क्षमता को बढ़ाता है और फलों के विकास को गति देता है. डॉ. सिंह सुझाव दिया कि इस दौरान बाग में हल्की नमी बनाए रखें ताकि पेड़ों को जरूरी पोषण मिलता रहे.
डॉ सिंह ने कहा 30 दिनों के इस शेड्यूल का आखिरी पड़ाव फलों को 'मार्बल स्टेज' यानी इस चरण में आम के छोटे फल कंचे या छोटी गोलियों हो जाते हैं. तब तक सुरक्षित पहुंचाना है. डॉ. एस. के. सिंह के अनुसार, 25वें दिन के आसपास प्रोपीकोनाजोल या टेबुकोनाजोल का एक सुरक्षा स्प्रे अंतिम चरण के रोगों को खत्म कर देता है. उनका यह भी कहना है कि दवाओं के साथ-साथ बाग की सफाई और जल निकासी पर खास ध्यान दें. कीटों के हमले की सूरत में वे शाम के वक्त ही स्प्रे करने की सलाह देते हैं ताकि मित्र कीट और मधुमक्खियां सुरक्षित रहें.