संत कबीर नगर पहुंचा ‘किसान कारवां’ का 47वां पड़ाव, किसानों ने कहा- बहुत कुछ सीखकर जा रहे हैं घर!

संत कबीर नगर पहुंचा ‘किसान कारवां’ का 47वां पड़ाव, किसानों ने कहा- बहुत कुछ सीखकर जा रहे हैं घर!

किसान कारवां का 47वां पड़ाव संत कबीर नगर में आयोजित किया गया, जिसमें किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक, जैविक खेती, फसल चक्र और कीट प्रबंधन की जानकारी दी गई. कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिकों ने सरकारी योजनाओं, फार्मर रजिस्ट्री और कृषि यंत्रों के उपयोग के बारे में बताया. लकी ड्रॉ के जरिए किसानों को नगद पुरस्कार देकर उत्साह बढ़ाया गया.

संत कबीर नगर पहुंचा किसान कारवांसंत कबीर नगर पहुंचा किसान कारवां
अंक‍ित कुमार स‍िंह
  • Noida,
  • Mar 23, 2026,
  • Updated Mar 23, 2026, 5:15 PM IST

राप्ती और घाघरा नदियों के बीच स्थित संत कबीर नगर जनपद में ‘किसान तक’ के किसान कारवां का 47वां पड़ाव पहुंचा. जनपद के छपरा मगर्वी गांव में किसान कारवां कार्यक्रम का आयोजन किया गया.उत्तर प्रदेश सरकार और इंडिया टुडे ग्रुप की संयुक्त पहल के तहत प्रदेश के 75 जिलों में चल रहे इस विशेष अभियान में बड़ी संख्या में महिला और पुरुष किसानों ने भाग लिया और खेती से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल कीं. दो नदियों की गोद में बसे होने के कारण संत कबीर नगर जिले की भूमि खेती के लिहाज से काफी उपजाऊ है. यहां के किसान समय के साथ खेती में बदलाव भी कर रहे हैं. धान (विशेषकर काला नमक), गेहूं और गन्ना की पारंपरिक खेती के साथ अब कृषक जैविक खेती, ड्रैगन फ्रूट की उन्नत खेती तथा आधुनिक कृषि तकनीकों को तेजी से अपना रहे हैं.

खेती के मामले में समृद्ध इस जिले में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं की पूरी जानकारी दी और योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की. वहीं, इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) के विशेषज्ञों ने बदलते जलवायु परिवर्तन के दौर में खेती के नए तरीकों, फसल प्रबंधन तथा केवीके की उपयोगिता के बारे में विस्तार से जानकारी दी. कार्यक्रम के अंत में लकी ड्रॉ के माध्यम से 12 किसानों को नगद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया, जिससे किसानों में खासा उत्साह देखने को मिला.

रासायनिक उर्वरकों का उचित उपयोग है जरूरी

पहले चरण में केवीके संत कबीर नगर के वैज्ञानिक डॉ. सुरेंद्र प्रताप सोनकर ने किसानों को रासायनिक उर्वरकों के सही उपयोग के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि अलग-अलग फसलों के लिए उर्वरकों की मात्रा अलग होती है और किसानों को फसल की आवश्यकता के अनुसार ही उर्वरकों का प्रयोग करना चाहिए. उन्होंने कहा कि उर्वरकों की सही मात्रा और उपयोग संबंधी पूरी जानकारी कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा समय-समय पर किसानों को दी जाती है, इसलिए किसानों को वैज्ञानिकों से संपर्क बनाए रखना चाहिए. आगे उन्होंने किसानों को मिट्टी जांच के महत्व के बारे में जागरूक करते हुए कहा कि यदि किसान अच्छी गुणवत्ता वाली फसल उगाना चाहते हैं, तो उन्हें समय-समय पर अपनी मिट्टी की जांच अवश्य करवानी चाहिए. इसके साथ ही उन्होंने खेत से मिट्टी का नमूना जांच के लिए निकालने की सही विधि भी किसानों को विस्तार से समझाई.

फसल चक्र अपनाने से किसानों की बढ़ेगी आमदनी

दूसरे चरण में कृषि विज्ञान केंद्र संत कबीर नगर के वैज्ञानिक डॉ. देवेश कुमार ने किसानों को संबोधित करते हुए बताया कि यदि किसान अपनी मिट्टी की जांच नहीं करवाते हैं, तो उन्हें कई प्रकार के नुकसान उठाने पड़ सकते हैं. उन्होंने इस विषय पर विस्तार से जानकारी देते हुए प्रत्येक महत्वपूर्ण बिंदु को सरल तरीके से किसानों के सामने रखा. इसके साथ ही उन्होंने खेतों में जैविक पदार्थ बढ़ाने के लिए ढैंचा (ग्रीन मैन्योर) की खेती करने का सुझाव दिया.  उन्होंने कहा कि यदि किसान अपनी मिट्टी की उर्वर शक्ति बढ़ाना चाहते हैं, तो ढैंचा की खेती अवश्य करें. इससे मिट्टी की गुणवत्ता सुधरती है और खेत की उत्पादकता बढ़ती है. डॉ. देवेश कुमार ने यह भी बताया कि खेतों की उर्वर शक्ति बढ़ने से खेती की लागत कम हो जाती है, जिससे किसानों की आय में सुधार होता है. इसके अलावा उन्होंने किसानों को फसल चक्र अपनाने की सलाह दी और बताया कि फसल चक्र में कौन-कौन सी फसलें किस समय लगानी चाहिए, इसकी भी विस्तृत जानकारी दी. आगे उन्होंने किसानों को कार्बन क्रेडिट के बारे में बताया और समझाया कि. किसान इससे कैसे कमाई कर सकते है.इसको लेकर किसानों को जागरूक किया.

चार माध्यमों से करवा सकते हैं फार्मर रजिस्ट्री

तीसरे चरण में कृषि विभाग के भूमि संरक्षण अधिकारी दीपचंद चौरसिया ने किसानों को फार्मर रजिस्ट्री के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि फार्मर रजिस्ट्री किसानों के लिए क्यों आवश्यक है. बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि आने वाले समय में सरकार द्वारा चलाई जाने वाली सभी कृषि संबंधी योजनाओं का लाभ लेने के लिए फार्मर आईडी बेहद जरूरी होगी. आगे उन्होंने किसानों को बताया कि चार मोड़ के तहत किसान फार्मर रजिस्ट्री करवा सकते हैं.

किराए पर ले सकते है किसान कृषि यंत्र

चौथे चरण में कृषि विभाग के अपर जिला कृषि अधिकारी डॉ. ब्रजेश कुमार चौधरी ने किसानों को कृषि यंत्र किराये पर प्राप्त करने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा कस्टम हायरिंग सेंटर योजना एवं कृषि यंत्रीकरण योजना के तहत किसानों को कृषि यंत्रों पर अनुदान (सब्सिडी) प्रदान किया जा रहा है, जिससे किसान कम खर्च में आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग कर सकते हैं. उन्होंने आधुनिक खेती की तकनीकों पर भी विस्तार से चर्चा करते हुए बताया कि किसान नई तकनीकों को अपनाकर कम लागत में अधिक उत्पादन और बेहतर मुनाफा हासिल कर सकते हैं.

पशुपालकों को सरकार दे रही है किसान क्रेडिट कार्ड

पांचवें चरण में पशुपालन विभाग के विनय कुमार पाण्डेय ने किसानों को पशुपालन किसान क्रेडिट कार्ड (Animal Husbandry Kisan Credit Card - AHKCC) योजना के बारे में विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने बताया कि इस योजना का उद्देश्य किसानों को पशुपालन के लिए आसान ऋण उपलब्ध कराना है, ताकि किसान निजी साहूकारों से ऊंचे ब्याज पर पैसा उधार लेने से बच सकें. सरकार द्वारा शुरू की गई इस सुविधा से पशुपालकों को कम ब्याज दर पर ऋण मिल जाता है, जिससे वे डेयरी, बकरी पालन, मुर्गी पालन आदि गतिविधियों को आसानी से बढ़ा सकते हैं.

अधिक उत्पादन के लिए बीजों का उपचार जरूरी

छठवें चरण में कृषि विज्ञान केंद्र संत कबीर नगर के वैज्ञानिक डॉ. धर्मेंद्र कुमार ने किसानों को फसल चक्र के अंतर्गत विभिन्न फसलों की खेती किस समय और किस प्रकार करनी चाहिए, इस बारे में विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने किसानों से कहा कि खेती में उपयोग होने वाले बीजों को बुवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले खरीद लें और उनका अंकुरण (जमाव) परीक्षण अवश्य करें. इससे बीज की गुणवत्ता और संभावित उत्पादन का सही अनुमान लगाया जा सकता है. उन्होंने किसानों को सलाह दी कि बीजों का उपचार करने के बाद ही फसलों की बुवाई करें. विशेष रूप से अन्न एवं दलहनी फसलों के बीजों का उपचार करना अत्यंत आवश्यक है, जिससे रोगों से बचाव होता है और उत्पादन में वृद्धि होती है.

एग्रो फॉरेस्ट्री से किसान बढ़ा सकते है अपनी आमदनी

सातवें चरण में कृषि विज्ञान केंद्र संत कबीर नगर के कृषि वैज्ञानिक डॉ. तरुण कुमार सिंह ने किसानों को एग्रो फॉरेस्ट्री (Agroforestry) के प्रति जागरूक किया. उन्होंने बताया कि एग्रो फॉरेस्ट्री कम समय में अधिक आय प्राप्त करने का प्रभावी माध्यम है. इसके तहत किसानों को आय बढ़ाने वाले वृक्षों की खेती अपनाने की सलाह दी गई. साथ ही उन्होंने किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए भी प्रेरित किया.

समेकित कृषि प्रणाली की ओर बढ़ें किसान

आठवें चरण में कृषि विज्ञान केंद्र संत कबीर नगर के मत्स्य एवं पशुपालन वैज्ञानिक डॉ. प्रकाश चंद्र ने किसानों को समेकित कृषि प्रणाली (Integrated Farming System) के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि इस तकनीक को अपनाकर किसान अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं.उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वे अपने खेतों में विभिन्न प्रकार की फसलों, पशुपालन एवं मत्स्य पालन को एक साथ अपनाएं, ताकि उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग किया जा सके. इससे किसान स्वयं शुद्ध एवं पौष्टिक भोजन प्राप्त कर सकेंगे और साथ ही अन्य लोगों को भी गुणवत्तापूर्ण एवं शुद्ध अनाज उपलब्ध करा सकेंगे.

कला के जरिए खेती का संदेश

नौवें चरण में जादूगर सलमान ने अपनी कला के माध्यम से खेती से जुड़ी जानकारी प्रस्तुत की. उन्होंने किसानों को गोबर खाद के उपयोग और पशुपालन को बढ़ावा देने का सुझाव दिया. इसके साथ ही उन्होंने किसानों को हर शुभ अवसर पर वृक्ष लगाने के लिए भी अपील की.

किसान वहीं, जिसके पास पशु हैं

दसवें चरण में प्रगतिशील किसान सुरेन्द्र राय ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि आज किसान यदि आगे बढ़ रहे हैं, तो इसका श्रेय कृषि वैज्ञानिकों और सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं को जाता है. उन्होंने आगे कहा कि वास्तविक किसान वही है, जिसके पास पशु हों. यदि किसान अपनी खेती में सड़ी हुई गोबर खाद का उपयोग करना चाहता है, तो उसके पास पशुधन होना आवश्यक है.

लकी ड्रॉ के जरिए किसानों को दी गई नकद राशि

अंतिम दसवें चरण में लकी ड्रॉ का आयोजन किया गया, जिसमें 10 विजेताओं को 500 रुपये और दूसरे विजेता प्रीति रही,जिन्हें 2000 रुपए दिए गए. इसके साथ प्रथम विजेता सुरेंद्र को 3000 रुपए की राशि दी गई. किसान तक’ का यह कारवां किसानों को आधुनिक तकनीक, बाजार से जुड़ाव और आय बढ़ाने के उपायों से जोड़ने का एक प्रभावी मंच प्रदान कर रहा है.

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