
देश के कई प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में पिछले कई महीनों से गेहूं के दाम दबाव में बने हुए हैं. किसानों को उम्मीद थी कि मार्च में सरकारी खरीद शुरू होने के बाद बाजार में भाव सुधरेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. कई राज्यों में खरीद देर से शुरू हुई और निजी मंडियों में आवक बढ़ने से किसानों को एमएसपी से नीचे दाम पर फसल बेचनी पड़ी. अप्रैल और मई में भी हालात में खास सुधार नहीं दिखा. केंद्र सरकार के आधिकारिक पोर्टल एगमार्कनेट पर जारी राज्यवार थोक मूल्य विश्लेषण रिपोर्ट इस बात की तस्दीक करती है कि राष्ट्रीय औसत कीमत भी गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य तक नहीं पहुंच सकी.
केंद्र सरकार ने रबी मार्केटिंग सीजन 2026-27 के लिए गेहूं का एमएसपी 2585 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है. लेकिन मार्च, अप्रैल और मई 2026 के आंकड़े बताते हैं कि देश के ज्यादातर बड़े उत्पादक राज्यों में औसत थोक भाव इससे नीचे रहे. कुछ राज्यों में मामूली सुधार जरूर दर्ज हुआ, लेकिन कुल मिलाकर बाजार का रुख किसानों के पक्ष में नहीं दिखा.
मार्च 2026 में देश का औसत गेहूं भाव 2495.49 रुपये प्रति क्विंटल रहा, जो एमएसपी से करीब 90 रुपये कम था. इस दौरान उत्तर प्रदेश में औसत भाव 2368.24 रुपये, राजस्थान में 2372.10 रुपये और मध्य प्रदेश में 2295.57 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज हुआ.
बिहार में किसानों को औसतन 2483.33 रुपये मिले, जबकि पंजाब का औसत भाव 2504.22 रुपये प्रति क्विंटल रहा. मार्च में कई राज्यों की मंडियों दाम एमएसपी से नीचे बने रहे. महाराष्ट्र में औसत भाव फरवरी के मुकाबले 16.4 प्रतिशत गिर गया, जबकि दिल्ली में 7.7 प्रतिशत और मध्य प्रदेश में 4.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई.
अप्रैल में सरकारी खरीद बढ़ने के बाद कुछ राज्यों में दाम सुधरे, लेकिन राष्ट्रीय औसत फिर भी एमएसपी से नीचे ही रहा. अप्रैल 2026 में देश का औसत गेहूं भाव 2539.37 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया. यह एमएसपी से करीब 46 रुपये कम रहा. इस महीने पंजाब में औसत भाव 2631.70 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गया, जो एमएसपी से ऊपर था. हरियाणा में भी औसत कीमत 2586.04 रुपये रही.
लेकिन, मध्य प्रदेश में किसानों को औसतन 2352.30 रुपये, उत्तर प्रदेश में 2403.41 रुपये और राजस्थान में 2448.65 रुपये प्रति क्विंटल ही मिले. महाराष्ट्र में भी औसत भाव 2681.52 रुपये रहा, लेकिन वहां पिछले साल की तुलना में कीमतें करीब 18 प्रतिशत कमजोर रहीं. बता दें कि महाराष्ट्र कम गेहूं उत्पादन वाले राज्यों में शामिल है, ऐसे में यहां एमसपी से ऊपर कीमत होना कोई हैरानी की बात नहीं है.
मई 2026 के आंकड़े भी यह बताते हैं कि किसानों को राहत मिलती नहीं दिखी. एगमार्कनेट की रिपोर्ट के अनुसार, इस महीने देश का औसत गेहूं भाव 2551.05 रुपये प्रति क्विंटल रहा, जो एमएसपी से करीब 34 रुपये कम है. यानी सरकारी खरीद सीजन के चरम पर भी राष्ट्रीय औसत समर्थन मूल्य तक नहीं पहुंच पाया.
मई में हरियाणा और पंजाब जैसे राज्यों में औसत कीमतें एमएसपी से ऊपर रहीं. हरियाणा में औसत भाव 2585 रुपये और पंजाब में 2596.96 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया. वहीं, मध्य प्रदेश में औसत भाव 2419.62 रुपये, उत्तर प्रदेश में 2469.52 रुपये और राजस्थान में 2518.21 रुपये प्रति क्विंटल रहा. गुजरात और पश्चिम बंगाल में भी कीमतें एमएसपी से नीचे दर्ज की गईं.
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार कई राज्यों में ज्यादा उत्पादन, सरकारी खरीद की धीमी शुरुआत और मांग कमजोर रहने से गेहूं के दाम पर दबाव बना रहा. वहीं, मार्च और अप्रैल में हुई बारिश और ओलावृष्टि भी एक कारण रहा, जिससे फसल की क्वालिटी पर बुरा असर पड़ा. यही वजह रही कि सरकारी खरीद में सरकार ने क्वालिटी में थोड़ी ढील दी, लेकिन निजी बाजार/मंडियों में किसानों को नुकसान उठाना पड़ा.
पंजाब- 122 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा खरीद हुई
हरियाणा- 72 लाख मीट्रिक टन
मध्य प्रदेश- 100 लाख टन से ज्यादा खरीद हुई (28 मई आखिरी तारीख), किसानों को 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस की राहत मिली.
उत्तर प्रदेश, बिहार- खरीदी जारी
राजस्थान-देश में सबसे पहले 10 मार्च से खरीद शुरू हुई, 30 जून तक जारी, किसानों को 150 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस