सितंबर में प्याज के थोक भाव में बड़ा उछाल, एक महीने में औसतन 30% बढ़े दाम, कई राज्यों में 50% तक तेजी

सितंबर में प्याज के थोक भाव में बड़ा उछाल, एक महीने में औसतन 30% बढ़े दाम, कई राज्यों में 50% तक तेजी

सितंबर 2026 में देशभर में प्याज के थोक भाव में बड़ी तेजी देखने को मिली है. औसत थोक कीमत बढ़कर 4,202 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गई, जो अगस्त के मुकाबले करीब 30 फीसदी अधिक है. गुजरात, उत्तर प्रदेश, पंजाब, महाराष्ट्र और राजस्थान समेत कई राज्यों में प्याज के दामों में 40 से 50 फीसदी तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

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रवि कांत सिंह
  • New Delhi,
  • Sep 09, 2026,
  • Updated Sep 09, 2026, 11:50 AM IST

देशभर में प्याज की थोक कीमतों में सितंबर 2026 के दौरान उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई है. राज्यवार थोक मूल्य विश्लेषण के अनुसार प्याज की औसत कीमत 4,202.49 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गई है, जबकि अगस्त में यह 3,235.10 रुपये प्रति क्विंटल थी. यानी केवल एक महीने में औसतन करीब 30 फीसदी का उछाल देखने को मिला है.

सबसे ज्यादा थोक कीमत मणिपुर में दर्ज की गई, जहां प्याज 6,082.30 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है. इसके अलावा मेघालय (6,028.85 रुपये), केरल (5,841.77 रुपये), तमिलनाडु (5,707.81 रुपये) और जम्मू-कश्मीर (5,353.20 रुपये प्रति क्विंटल) में भी प्याज के भाव ऊंचे स्तर पर बने हुए हैं.

गुजरात में सबसे अधिक मासिक कीमत बढ़ोतरी

मासिक बढ़ोतरी की बात करें तो गुजरात में प्याज के दामों में सबसे अधिक 50.1 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई. इसके अलावा उत्तर प्रदेश में 45.4 फीसदी, पंजाब में 43.3 फीसदी, महाराष्ट्र में 43.3 फीसदी, चंडीगढ़ में 44.2 फीसदी और जम्मू-कश्मीर में 41.9 फीसदी की तेजी देखने को मिली. इससे साफ है कि उत्तर और पश्चिम भारत के बाजारों में प्याज की आपूर्ति और मांग के बीच अंतर बढ़ने का असर कीमतों पर दिखाई दे रहा है.

सालाना आधार पर भी प्याज की कीमतों में बड़ी छलांग लगी है. आंध्र प्रदेश में थोक भाव सितंबर 2025 के मुकाबले 536.5 फीसदी बढ़े हैं. वहीं मध्य प्रदेश में 338.8 फीसदी, महाराष्ट्र में 264.2 फीसदी, गुजरात में 257.3 फीसदी और कर्नाटक में 243.3 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है. यह संकेत देता है कि पिछले साल की तुलना में बाजार में प्याज काफी महंगा हुआ है.

उत्तर प्रदेश में प्याज के भाव में 54% तेजी

उत्तर प्रदेश में प्याज का थोक भाव 2,821.58 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़कर 45.4 फीसदी की मासिक तेजी के साथ दर्ज किया गया. हरियाणा में 3,608.76 रुपये, बिहार में 4,234.89 रुपये और राजस्थान में 3,200.61 रुपये प्रति क्विंटल का भाव रिकॉर्ड किया गया.

विशेषज्ञों का मानना है कि मॉनसून के दौरान हुई बारिश, भंडारण संबंधी चुनौतियां और नई फसल की सीमित आवक कीमतों में तेजी की प्रमुख वजह हो सकती हैं. यदि आने वाले दिनों में मंडियों में प्याज की आवक नहीं बढ़ी तो खुदरा बाजार में भी उपभोक्ताओं को महंगे प्याज का सामना करना पड़ सकता है.

कई साल बाद किसानों की बढ़ी कमाई

महाराष्ट्र के प्याज उत्पादक संघ के अध्यक्ष भारत दिघोले ने कीमतों में बढ़ोतरी को किसानों के हित में बताया. उन्होंने कहा कि कई साल बाद ऐसा मौका आया है जब किसानों की जेब में अच्छी कीमत जा रही है. किसान वर्षों से इसकी मांग कर रहे थे. दिघोले ने कहा, इस बार किसानों ने अपनी उपज नेफेड और एनसीसीएफ को नहीं बेचा क्योंकि उन्हें पता था कि सरकार इस प्याज का इस्तेमाल बाजार में दाम गिराने के लिए करेगी. इससे किसानों को भारी नुकसान होता. किसानों का यह फैसला सही रहा और उन्हें बेहतर दाम मिल रहे हैं.

सरकारी खरीद होने के बावजूद बाजार में प्याज की अच्छी क्वालिटी नहीं आ रही है, जबकि ग्राहकों को 60 रुपये किलो का रेट देना पड़ रहा है. इस बारे में दिघोले ने कहा, CWC ने इस बार प्याज की खरीद की. शुरू में अच्छे प्याज नहीं मिले तो सरकार ने नियमों में कुछ ढील दी जिससे कम क्वालिटी के प्याज की भी खरीद हुई. इस वजह से मार्केट में कुछ खराब प्याज भी बिक रहे हैं.

दिल्ली में प्याज की मुनाफाखोरी ज्यादा

एक तरफ किसानों को प्याज का सही रेट मिल रहा है तो दूसरी ओर बिचौलियों की जेब में बहुत पैसा जा रहा है. मंडी में प्याज का थोक भाव 30-40 रुपये किलो है जबकि मार्केट में ग्राहक को 60-70 रुपये किलो का रेट देना पड़ रहा है. इस मुद्दे पर महाराष्ट्र के कृषि पत्रकार संदीप भुजबल ने कहा कि रेट का इतना बड़ा अंतर केवल दिल्ली-एनसीटी के इलाके में है जबकि महाराष्ट्र में प्याज का भाव अधिकतम 40 रुपये है. भुजबल ने कहा कि दिल्ली सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह प्याज के अंतर की निगरानी करे और ग्राहकों को सस्ते रेट में प्याज दिलाए.  

प्रमुख आंकड़े

औसत थोक भाव: 4,202.49 रुपये/क्विंटल
अगस्त के मुकाबले वृद्धि: करीब 30%
सबसे महंगा प्याज: मणिपुर (6,082 रुपये/क्विंटल)
सबसे ज्यादा मासिक उछाल: गुजरात (50.1%)
सबसे ज्यादा सालाना बढ़ोतरी: आंध्र प्रदेश (536.5%)
उत्तर प्रदेश में मासिक बढ़ोतरी: 45.4%
महाराष्ट्र में मासिक बढ़ोतरी: 43.3%

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