
देशभर में प्याज की कीमतें उपभोक्ताओं के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं. पिछले सप्ताह दामों में थोड़ी राहत देखने को मिली थी, लेकिन अब बाजार में फिर से तेजी लौट आई है. महाराष्ट्र के नासिक जिले स्थित लासलगांव मंडी, जिसे एशिया की सबसे बड़ी प्याज मंडी माना जाता है, वहां प्याज के थोक भाव एक बार फिर बढ़ गए हैं. मंगलवार को यहां प्याज का औसत थोक भाव 48 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया.
पिछले सप्ताह बाजार में कीमतें करीब 9 फीसदी तक नीचे आई थीं. उस समय यह माना जा रहा था कि सरकार की सख्ती और जमाखोरी के खिलाफ कार्रवाई का असर दिखाई दे रहा है. हालांकि, यह राहत ज्यादा दिनों तक नहीं टिक सकी और इस सप्ताह प्याज के दामों ने फिर ऊपर की ओर रुख कर लिया.
बाजार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पिछले दिनों व्यापारियों के बीच इस बात की चर्चा थी कि सरकार जमाखोरी के खिलाफ बड़ा अभियान चला सकती है. इसी आशंका में कई व्यापारियों ने अपने स्टॉक की बड़ी मात्रा मंडियों में उतार दी थी.
अचानक बढ़ी आवक की वजह से बाजार में सप्लाई बढ़ी और प्याज के भाव 4 से 5 रुपये प्रति किलो तक नीचे आ गए. इसी दौरान कुछ किसानों ने भी अपने भंडारित प्याज को बेचने में तेजी दिखाई, जिससे बाजार में अतिरिक्त उपलब्धता बनी.
विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में आई यह नरमी अस्थायी थी. जैसे ही अतिरिक्त स्टॉक की बिक्री कम हुई, कीमतें फिर चढ़ने लगीं. जिन किसानों के पास अभी भी अच्छी क्वालिटी का प्याज बचा हुआ है, वे ऊंचे दाम मिलने की उम्मीद में धीरे-धीरे माल बाजार में ला रहे हैं.
इसका असर थोक और खुदरा दोनों बाजारों में दिखाई दे रहा है. सीमित आवक के कारण व्यापारियों को ऊंचे भाव पर खरीदारी करनी पड़ रही है, जिसका असर सीधे उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है.
इस साल प्याज के भंडारण को लेकर भी कई समस्याएं सामने आई हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक अधिक नमी के कारण गोदामों में रखा गया काफी प्याज खराब हो गया. इससे बाजार में अच्छी क्वालिटी वाले प्याज की उपलब्धता कम हो गई है.
जब स्टॉक घटता है और मांग बनी रहती है, तो कीमतों में तेजी आना स्वाभाविक है. यही वजह है कि पिछले चार से पांच महीनों के दौरान प्याज के दाम लगभग दोगुने हो चुके हैं.
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार कई किसानों ने अपनी उपज सरकारी एजेंसियों को बेचने के बजाय निजी व्यापारियों को बेचना ज्यादा फायदेमंद समझा. इसका कारण बाजार में मिल रहे बेहतर दाम थे.
कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का फायदा उठाने के लिए किसानों ने खुले बाजार का रुख किया, जिससे निजी व्यापारियों के पास स्टॉक बढ़ा और बाजार की गतिविधियां उसी के हिसाब से संचालित होने लगीं.
प्याज की कीमतों में तेजी के पीछे मौसम भी एक बड़ी वजह माना जा रहा है. कई इलाकों में सामान्य से कम बारिश होने के कारण खरीफ फसलों की स्थिति प्रभावित हुई है. इससे उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ी है.
व्यापारियों और किसानों दोनों को आशंका है कि यदि उत्पादन अपेक्षा से कम रहा तो आने वाले महीनों में सप्लाई पर दबाव और बढ़ सकता है. यही चिंता अभी से बाजार में दिखाई देने लगी है.
जहां एक ओर महंगे प्याज से घरेलू ग्राहक परेशान हैं, वहीं दूसरी ओर निर्यातकों की चुनौतियां भी कम नहीं हैं. शिपिंग और फ्रेट लागत से जुड़ी परेशानियों के कारण निर्यात प्रभावित हो रहा है.
इसके अलावा कुछ आयातक देशों ने भारतीय प्याज के बजाय चीन से खरीदारी बढ़ानी शुरू कर दी है. इससे भारतीय निर्यातकों पर अतिरिक्त दबाव बन रहा है.
सरकार का कहना है कि कई शहरों में प्याज की कीमतों में नरमी देखने को मिली है. वाराणसी, अमृतसर और दिल्ली समेत कुछ शहरों में रेट पहले की तुलना में कम हुए हैं. सरकार का दावा है कि इन शहरों के आसपास के क्षेत्रों में भी कीमतों पर असर पड़ा है.
हालांकि देश के प्रमुख थोक बाजारों में मौजूदा रुझान यह संकेत दे रहे हैं कि प्याज के दामों में बड़ी गिरावट अभी आसान नहीं होगी. अच्छी क्वालिटी वाले प्याज की कमी, सीमित आवक, खराब स्टॉक और उत्पादन को लेकर बनी अनिश्चितता आने वाले समय में भी कीमतों को सहारा दे सकती है.