
मध्य प्रदेश में मौसम एक बार फिर करवट ले रहा है. प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश का दौर जारी है, जबकि कई इलाकों में बारिश थमने से किसानों की चिंता बढ़ गई है. खासकर दक्षिणी हिस्सों में बारिश की कमी के कारण सूखे जैसे हालात बनते नजर आ रहे हैं. वहीं पूर्वी मध्य प्रदेश में अभी भी कुछ स्थानों पर बारिश की गतिविधियां देखने को मिल रही हैं.
8 सितंबर को मध्य प्रदेश के ऊपर सैटेलाइट तस्वीरों में बादलों की मौजूदगी काफी कम दिखाई दी. प्रदेश के बड़े हिस्से में आसमान लगभग साफ नजर आया. ऐसी स्थिति केवल मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं रही, बल्कि देश के कई हिस्सों में भी बादलों की गतिविधियां कमजोर दिखाई दीं. इससे संकेत मिल रहे हैं कि मानसून धीरे-धीरे कमजोर पड़ने की दिशा में बढ़ रहा है.
भोपाल स्थित मौसम केंद्र के प्रमुख अंजीत अंजन के मुताबिक, अगले तीन से चार दिनों तक कोई सक्रिय मौसम सिस्टम नहीं है. इसके चलते प्रदेश में बारिश की गतिविधियों में फिलहाल कमी रहने की संभावना है. हालांकि स्थानीय परिस्थितियों के कारण कुछ जिलों में हल्की बारिश या गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं.
9 सितंबर 2026, बुधवार को मध्य प्रदेश में मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है. प्रदेश के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है. इसके साथ ही कुछ इलाकों में गरज-चमक और झोंकेदार हवाएं चल सकती हैं.
पूर्वी मध्य प्रदेश के कुछ जिलों में बारिश की गतिविधियां अपेक्षाकृत ज्यादा रह सकती हैं, जबकि प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मौसम सामान्य या लगभग साफ रहने का अनुमान है.
मध्य प्रदेश में अब मानसून अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है. मौसम के मौजूदा बदलाव को देखते हुए सितंबर के अंत तक मानसून की विदाई शुरू होने की संभावना जताई जा रही है. आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियां धीरे-धीरे कम हो सकती हैं और तापमान में भी बदलाव देखने को मिल सकता है.
राजधानी भोपाल में आज मौसम मिलाजुला रहने की संभावना है. आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रह सकते हैं. दिन के दौरान कहीं-कहीं हल्की बारिश या गरज-चमक देखने को मिल सकती है.
भोपाल में हवा की रफ्तार करीब 14 से 16 किलोमीटर प्रति घंटे रहने का अनुमान है.अधिकतम तापमान करीब 32 डिग्री सेल्सियस, जबकि न्यूनतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है. दिन में हल्की गर्मी के साथ उमस महसूस हो सकती है.
बारिश के इस बदलते पैटर्न का सीधा असर खरीफ फसलों पर पड़ सकता है. जहां ज्यादा बारिश वाले इलाकों में जलभराव और फसल प्रबंधन की चुनौती है, वहीं दक्षिणी और कम बारिश वाले क्षेत्रों में किसान फसल की नमी को लेकर चिंतित हैं. ऐसे में अगले कुछ दिनों का मौसम सोयाबीन, मक्का, धान और अन्य खरीफ फसलों के लिए महत्वपूर्ण रहेगा.
किसानों को सलाह है कि स्थानीय मौसम पूर्वानुमान पर नजर रखें और सिंचाई, कीटनाशक या फफूंदनाशक के उपयोग जैसे फैसले मौसम की स्थिति और स्थानीय कृषि विभाग की सलाह के अनुसार ही लें.