
पिछले कुछ दिनों से देशभर में प्याज की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है. कई शहरों में प्याज के दाम 35 रुपये किलो से बढ़कर 70 रुपये किलो तक पहुंच गए हैं. ऐसे में आम उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने नासिक से विशेष 'कांदा एक्सप्रेस' चलाकर दिल्ली में सस्ता प्याज पहुंचाने की पहल की है. हालांकि, इस योजना के साथ अब प्याज की क्वालिटी को लेकर बड़ा विवाद भी खड़ा हो गया है.
सरकार की ओर से नासिक से दिल्ली के लिए रवाना की गई कांदा एक्सप्रेस राजधानी पहुंच चुकी है. इस ट्रेन के जरिए करीब 456 मीट्रिक टन प्याज दिल्ली लाई गई है. सरकार का दावा है कि इससे बाजार में प्याज की उपलब्धता बढ़ेगी और बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी.
दिल्ली पहुंचने के बाद इस प्याज को पहले 9 केंद्रीय भंडार केंद्रों में भेजा जाएगा. इसके बाद केंद्रीय भंडार की 40 मोबाइल वैन अलग-अलग इलाकों में तैनात की जाएंगी, जहां आम लोगों को 35 रुपये प्रति किलो की दर से प्याज उपलब्ध कराई जाएगी. सरकार की योजना दिल्ली के अलावा उत्तर प्रदेश और हरियाणा के कुछ हिस्सों तक भी इस प्याज की आपूर्ति पहुंचाने की है.
सरकार ने NAFED और NCCF के बफर स्टॉक से प्याज निकालकर पांच विशेष कांदा एक्सप्रेस ट्रेनों के जरिए देश के अलग-अलग हिस्सों में भेजने का फैसला किया था. इसका व्यापक प्रचार भी किया गया. लेकिन जमीनी स्तर पर तस्वीर अलग दिखाई दे रही है.
दिल्ली के आदर्श नगर के लिए निर्धारित ट्रेन में 840 मीट्रिक टन प्याज भेजे जाने की योजना थी, लेकिन आखिरकार केवल लगभग 450 मीट्रिक टन प्याज ही लोड हो सकी. वहीं बाकी चार कांदा एक्सप्रेस अभी तक रद्द बताई जा रही हैं.
कांदा एक्सप्रेस के रवाना होने के समय किसान गणेश निम्बालकर ने ट्रेन का विरोध किया. उनका आरोप था कि ट्रेन में लोड किया गया प्याज बहुत छोटे आकार का है और बड़ी मात्रा में खराब भी है.
किसान ने कहा कि ट्रेन में मौजूद प्याज का आकार मात्र 10 से 20 मिलीमीटर है, जबकि उपभोक्ताओं को बेहतर क्वालिटी का प्याज मिलना चाहिए. उनका दावा था कि किसानों के पास 45 मिलीमीटर आकार का अच्छा और टिकाऊ प्याज उपलब्ध है, लेकिन उसकी बजाय खराब क्वालिटी वाला प्याज भेजा जा रहा है. विरोध के दौरान वह ट्रेन के सामने बैठ गए और प्रशासन से प्याज की क्वालिटी सार्वजनिक करने की मांग की.
मामले की पड़ताल के दौरान नासिक के लासलगांव-मनमाड रोड स्थित सेंट्रल वेयरहाउस में रखे NAFED और NCCF के प्याज भंडारों की स्थिति पर भी सवाल उठे.
बताया गया कि भंडारण केंद्र में बड़ी मात्रा में प्याज खराब हालत में मिला. मजदूर कई दिनों से प्याज की ग्रेडिंग कर रहे थे और खराब प्याज अलग निकाल रहे थे. हालत यह थी कि तीन टोकरी प्याज में से केवल एक टोकरी ही अच्छी क्वालिटी का निकल रहा था. सड़न रोकने के लिए पाउडर का इस्तेमाल भी किया जा रहा था, लेकिन इसके बावजूद काफी प्याज खराब पाया गया.
स्थानीय लोगों और किसानों का कहना है कि भंडारण में रखे गए प्याज का बड़ा हिस्सा लंबे समय तक सुरक्षित नहीं रह पाएगा.
जानकारी के मुताबिक कांदा एक्सप्रेस को रवाना करने में करीब 26 घंटे की देरी हुई. बताया जा रहा है कि प्याज की सफाई, ग्रेडिंग और पैकिंग का काम समय पर पूरा नहीं हो पाया था. मंगलवार से यह प्रक्रिया शुरू हुई और बुधवार दोपहर तक लगभग 450 मीट्रिक टन प्याज ट्रेन में लोड किया जा सका.
इसी दौरान वेयरहाउस के बाहर पहुंचे किसानों ने भी प्याज की क्वालिटी पर सवाल उठाए. उनका आरोप था कि सरकार सिर्फ कीमतें कम दिखाने के लिए यह कदम उठा रही है, जबकि इससे किसानों को कोई फायदा नहीं होगा. किसानों का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया का लाभ बिचौलियों को मिल सकता है.
NAFED और NCCF पिछले कई वर्षों से बफर स्टॉक के लिए किसानों से प्याज खरीद रही हैं. खरीद प्रक्रिया में यह शर्त भी शामिल है कि प्याज का आकार कम से कम 45 मिलीमीटर होना चाहिए ताकि भंडारण और आपूर्ति के दौरान क्वालिटी बनी रहे.
हालांकि, वेयरहाउस में कथित तौर पर बड़ी मात्रा में छोटे आकार के प्याज मिलने के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि खरीद के दौरान निर्धारित मानकों का पालन हुआ था या नहीं. किसानों का आरोप है कि भंडारण केंद्रों में मौजूद प्याज निर्धारित क्वालिटी मानकों पर खरा नहीं उतरता.
एक तरफ सरकार का कहना है कि कांदा एक्सप्रेस के जरिए सस्ता प्याज उपलब्ध कराकर महंगाई पर नियंत्रण किया जाएगा, वहीं दूसरी तरफ किसानों और स्थानीय लोगों के आरोप इस पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहे हैं.
दिल्ली और आसपास के राज्यों में लोगों को सस्ता प्याज जरूर मिल सकता है, लेकिन यदि क्वालिटी संबंधी आरोप सही साबित होते हैं तो यह योजना विवादों में घिर सकती है. फिलहाल कांदा एक्सप्रेस से आई प्याज बाजार में उतारने की तैयारी चल रही है और अब सभी की नजर इस बात पर है कि उपभोक्ताओं को वास्तव में किस क्वालिटी का प्याज मिलता है.(अंकित मिश्रा और प्रवीण ठाकरे की रिपोर्ट)