Basmati Price: हरियाणा में बासमती के भाव ₹4200 क्विंटल तक पहुंचे, किसानों को बंपर कमाई की उम्मीद

Basmati Price: हरियाणा में बासमती के भाव ₹4200 क्विंटल तक पहुंचे, किसानों को बंपर कमाई की उम्मीद

हरियाणा में बासमती धान किसानों के लिए अच्छी खबर है. कटाई के मुख्य सीजन से पहले ही Pusa 1509 और Pusa 1692 जैसी किस्मों के भाव 4,000 से 4,200 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं. रिकॉर्ड शुरुआती कीमतों से किसानों को उम्मीद है कि Pusa 1121, Pusa 1718 और पारंपरिक बासमती ताराओरी जैसी प्रीमियम किस्मों को इस सीजन में और बेहतर दाम मिल सकते हैं.

बासमती पछेती किस्मेंबासमती पछेती किस्में
क‍िसान तक
  • New Delhi,
  • Aug 28, 2026,
  • Updated Aug 28, 2026, 2:22 PM IST

बासमती चावल की खुशबू हरियाणा के धान किसानों के लिए इस सीजन में बंपर फसल की उम्मीद जगा रही है, क्योंकि कटाई के मुख्य सीजन से पहले ही बासमती की कीमतों में तेजी आई है. 

हरियाणा की मंडियों में, खासकर बासमती उगाने वाले इलाकों में, जल्दी तैयार होने वाली किस्मों (जैसे PUSA 1509 और PUSA 1692) की आवक तेजी से बढ़ रही है और कुछ अनाज मंडियों में इनका भाव 4,000 रुपये से 4,200 रुपये प्रति क्विंटल तक मिल रहा है.

जानकारी के मुताबिक, यह पहली बार है जब ये सेमी-प्रीमियम किस्में इस कीमत पर बिक रही हैं. इससे उम्मीद बढ़ गई है कि प्रीमियम किस्में—जैसे Pusa 1121 मूछल, Pusa 1718 और पारंपरिक बासमती ताराओरी—इन जल्दी तैयार होने वाली किस्मों के मुकाबले 40% से 50% ज़्यादा कीमत दिला सकती हैं.

बासमती के दाम में 1000 रुपये की तेजी

किसानों और व्यापारियों का कहना है कि शुरुआती कीमतें पिछले कुछ सीजन की शुरुआत में चल रही कीमतों से काफी ज्यादा हैं. आम तौर पर जल्दी तैयार होने वाली इन किस्मों की कीमत 3,000 से 3,200 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास रहती है और मुख्य सीजन के दौरान भी ये गिरकर 2,500 से 2,800 रुपये प्रति क्विंटल तक आ जाती हैं.

किसानों के अनुसार, बासमती की कुछ जल्दी तैयार होने वाली किस्मों की कीमतें पिछले सालों की इसी अवधि की तुलना में लगभग 1,000 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ी हैं, जिससे किसानों को प्रति एकड़ लगभग 20,000 रुपये ज्यादा कमाने में मदद मिल रही है.

करनाल की नीलोखेड़ी अनाज मंडी के किसान और कमीशन एजेंट प्रवीण कुमार ने 'हिंदुस्तान टाइम्स’ से कहा, "अभी जो रेट मिल रहे हैं, वे पिछले तीन-चार सालों में देखे गए सबसे अच्छे रेट में से हैं, खासकर कटाई के सीजन की शुरुआत में."

हरियाणा में धान कटाई में रफ्तार

हरियाणा में धान की कटाई ने भी तेजी पकड़ ली है, खासकर सोनीपत, पानीपत, करनाल और यमुनानगर जिलों के यमुना वाले क्षेत्रों में. खबरों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के किसान भी अपनी उपज हरियाणा की मंडियों में बेच रहे हैं क्योंकि उन्हें अपने राज्य की तुलना में यहां बेहतर कीमत मिल रही है.

हरियाणा की एक बासमती ट्रेडिंग कंपनी से जुड़े ऋषि कुमार ने कहा, "भले ही इस साल उत्तर प्रदेश की मंडियों में बासमती की कीमतें ज्यादा हैं, फिर भी यूपी के किसान अपनी उपज हरियाणा में बेचना पसंद करते हैं, क्योंकि उन्हें अपनी स्थानीय मंडियों के मुकाबले प्रति क्विंटल लगभग 500 रुपये ज्यादा मिलते हैं."

ऋषि को उम्मीद है कि कीमतें थोड़ी कम हो सकती हैं, लेकिन इस बात की पूरी संभावना है कि खरीफ का यह सीजन बासमती उगाने वालों के लिए अच्छा रहेगा.

व्यापारियों के अनुसार, कीमतों में बढ़ोतरी की वजह मॉनसून की असमान बारिश और कुछ चावल उत्पादक इलाकों में कम पैदावार की आशंका है. व्यापारियों ने भी इस उम्मीद में खरीदारी बढ़ा दी है कि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चावल की कीमतें स्थिर बनी रह सकती हैं.

कीमतें 10 महीने के रिकॉर्ड स्तर पर

रिपोर्ट्स बताती हैं कि जुलाई के आखिर में धान की कम सप्लाई और मॉनसून की बेतरतीब बारिश के बीच भारतीय चावल के निर्यात की कीमतें लगभग 10 महीने के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गईं. व्यापारी कीमतों में इस बढ़ोतरी का कारण देश से बासमती के निर्यात में लगातार हो रही वृद्धि को मानते हैं.

एग्रीकल्चरल एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी (APEDA) के व्यापार आंकड़ों के अनुसार, भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में 50,138 करोड़ रुपये मूल्य का 65.21 लाख मीट्रिक टन (MT) बासमती चावल निर्यात किया, जबकि 2024-25 में 60.65 लाख MT और 2023-24 में 52.42 लाख MT का निर्यात किया गया था.

ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष विजय सेठिया ने बासमती की कीमतों में बढ़ोतरी को किसानों के लिए अच्छा बताते हुए कहा, "मध्य पूर्व में कई देश अपनी सामान्य खरीदारी की तुलना में ज्यादा चावल खरीद रहे हैं."

लेकिन बासमती उगाने वालों और आढ़तियों का एक वर्ग इस बढ़ोतरी को अस्थायी मानता है क्योंकि उनका मानना ​​है कि अगले महीने जब कटाई जोरों पर होगी, तो कीमतें गिर सकती हैं. गोहाना के किसान सत्यवान ने कहा, "असली परीक्षा तब होगी जब मंडियों में आवक (फसल की आमद) काफी बढ़ जाएगी. अभी सप्लाई सीमित है और व्यापारी अच्छी क्वालिटी वाली उपज के लिए होड़ कर रहे हैं. अगर मांग मजबूत बनी रहती है और निर्यात या घरेलू कीमतों में अचानक कोई गिरावट नहीं आती है, तो बासमती उगाने वालों को इस सीजन में अच्छा मुनाफा मिल सकता है."

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