Onion Price: मंडी में प्याज के दाम धड़ाम, लागत से आधी कीमत पर बेचने को मजबूर किसान

Onion Price: मंडी में प्याज के दाम धड़ाम, लागत से आधी कीमत पर बेचने को मजबूर किसान

नासिक की लासलगांव मंडी में प्याज की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जहां थोक भाव करीब 30% गिरकर 775 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं. उत्पादन लागत लगभग 1800 रुपये प्रति क्विंटल होने के बावजूद किसानों को 500 से 800 रुपये में प्याज बेचनी पड़ रही है, जिससे उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. किसानों ने सरकार से राहत पैकेज और 1500 रुपये प्रति क्विंटल अनुदान की मांग की है, जबकि कीमतों में गिरावट की वजह बढ़ती आवक और कमजोर मांग को बताया जा रहा है.

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क‍िसान तक
  • New Delhi ,
  • Apr 13, 2026,
  • Updated Apr 13, 2026, 1:59 PM IST

नासिक की लासलगांव मंडी में प्याज की कीमतों में बड़ी गिरावट है. एग्रीकल्चर प्रोड्यूस मार्केट कमेटी (APMC) में खरीफ की देर से आने वाली प्याज की औसत थोक कीमत में भारी गिरावट दर्ज की गई है. करीब एक महीने पहले जो कीमत 1,100 रुपये प्रति क्विंटल थी, वह शनिवार (11 अप्रैल) को लगभग 30% गिरकर 775 रुपये प्रति क्विंटल हो गई, जो एक साल का सबसे निचला स्तर है.

APMC के एक अधिकारी ने TOI से बात करते हुए बताया कि कीमतों में यह गिरावट प्याज की आवक बढ़ने और मांग कम होने की वजह से हुई है. अधिकारी ने कहा, "अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मांग कम होने का भी थोक कीमतों पर दबाव पड़ा है."

लागत अधिक, कमाई कम

इसके विपरीत, लासलगांव मंडी में गर्मियों की प्याज को अभी भी बेहतर दाम मिल रहे हैं, जो लगभग 1,100 रुपये प्रति क्विंटल हैं. हालांकि, किसानों का कहना है कि मौजूदा कीमतें उत्पादन लागत से काफी कम हैं. किसानों के अनुमान के मुताबिक, उत्पादन लागत लगभग 1,800 रुपये प्रति क्विंटल है, जिससे उनका आर्थिक संकट और बढ़ गया है.

महाराष्ट्र प्याज उत्पादक संघ के अध्यक्ष भरत दिघोले ने कहा कि प्रमुख बाजारों में प्याज की थोक कीमतें बुरी तरह गिर गई हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है.

दिघोले ने कहा, "जहां प्याज के उत्पादन की लागत लगभग 1,800 रुपये प्रति क्विंटल है, वहीं किसानों को अपनी प्याज 500 से 800 रुपये प्रति क्विंटल की कीमत पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है, लेकिन राज्य सरकार ने इस स्थिति पर कोई ध्यान नहीं दिया है."

उन्होंने आगे कहा कि जब भी प्याज की कीमतें बढ़ती हैं, तो सरकार तुरंत दखल देती है और न्यूनतम निर्यात मूल्य (MEP), आयात शुल्क या निर्यात पर प्रतिबंध जैसे नियम लागू कर देती है. दिघोले ने कहा, "हम चाहते हैं कि सरकार उन किसानों को तत्काल आर्थिक राहत देने के लिए कदम उठाए, जिन्होंने पिछले छह महीनों में अपनी फसल कम कीमतों पर बेची है." 

उन्होंने किसानों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए 1,500 रुपये प्रति क्विंटल का अनुदान देने की अपनी मांग को फिर से दोहराया.

पिछले साल से 50% गिरावट

बाजार के जानकारों ने बताया कि पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में कीमतें 50% तक गिर गई हैं. इस बीच, केंद्र सरकार ने Nafed और Nccf को निर्देश दिया है कि वे किसानों से अप्रैल में ही दो लाख टन प्याज खरीद लें, ताकि सितंबर के बाद कीमतों में होने वाली सालाना बढ़ोतरी को रोका जा सके.

शनिवार को लोखंडवाला कॉम्प्लेक्स, अंधेरी में प्याज 30 रुपये प्रति किलो, गोरेगांव ईस्ट में 20-25 रुपये और चेंबूर में 20-24 रुपये प्रति किलो बिका. 

गोरेगांव में Veera Traders के मालिक ने कहा, "अक्सर जब कीमतों में गिरावट की खबरें आती हैं, तो उसमें सबसे कम क्वालिटी वाले माल को ही आधार बनाया जाता है. इसके अलावा, थोक कीमत में बाजार शुल्क, टैक्स, ढुलाई खर्च और लोडिंग शुल्क भी जुड़ जाते हैं. मैंने खुद थोक में अलग-अलग किस्मों का प्याज 4 से 15 रुपये प्रति किलो के भाव से खरीदा है. मुझे जो कई तरह के खर्च उठाने पड़ते हैं, उन्हें देखते हुए मैं खुदरा में इसे 16, 20 और 25 रुपये प्रति किलो के भाव से बेचता हूं. अगले एक हफ्ते के भीतर प्याज की वह किस्म बाजार में आ जाएगी जिसे लंबे समय तक स्टोर करके रखा जा सकता है. तब सभी व्यापारी प्याज का स्टॉक जमा करना शुरू कर देंगे."

चेंबूर स्थित Simon Traders ने बताया कि पिछले कुछ हफ्तों से थोक कीमतें 15-20 रुपये प्रति किलो पर स्थिर बनी हुई हैं, जबकि खुदरा कीमतें उससे पांच रुपये ज्यादा हैं.

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