गेहूं खरीद पर संकट के आसार (सांकेतिक तस्वीर)पंजाब में इन दिनों गेहूं की सरकारी खरीद को लेकर बड़ी चिंता सामने आ रही है. राज्य की खरीद एजेंसियों के कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने गुणवत्ता के नियमों में ढील नहीं दी, तो वे मंडियों में गेहूं खरीद का काम बंद कर सकते हैं. इससे किसानों और सरकार दोनों के लिए परेशानी बढ़ सकती है.
पंजाब में इस बार बारिश और खराब मौसम की वजह से गेहूं की फसल को नुकसान हुआ है. कई जगहों पर गेहूं में नमी ज्यादा है और उसका रंग भी थोड़ा खराब हो गया है. ऐसे में केंद्र सरकार के जो सख्त नियम हैं, उनके हिसाब से यह गेहूं खरीद के लायक नहीं माना जा रहा है.
लेकिन किसान चाहते हैं कि उनका सारा गेहूं खरीदा जाए, क्योंकि उन्होंने मेहनत से फसल उगाई है. दूसरी तरफ, एजेंसियों के कर्मचारी कह रहे हैं कि वे नियमों के खिलाफ जाकर खराब गेहूं नहीं खरीद सकते.
राज्य में अब तक लगभग 1 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा गेहूं मंडियों में आ चुका है, लेकिन इसमें से बहुत कम गेहूं ही खरीदा गया है. अगर कर्मचारी सच में काम रोक देते हैं, तो गेहूं खरीद पूरी तरह रुक सकती है. इससे किसानों को बहुत नुकसान होगा, क्योंकि उनका गेहूं मंडियों में ही पड़ा रह जाएगा.
खरीद एजेंसियों के कर्मचारियों का कहना है कि सरकार पहले गुणवत्ता के नियमों को थोड़ा आसान बनाए. वे चाहते हैं कि खराब गेहूं को भी "रिलैक्स्ड नियम" यानी थोड़ी ढील देकर खरीदा जाए. उनका कहना है कि जब तक ऐसा नहीं होगा, वे खरीद का काम शुरू नहीं करेंगे.
उन्होंने यह भी बताया कि कुछ जगहों पर उन पर दबाव डाला जा रहा है कि वे खराब गेहूं भी खरीद लें. एक घटना में तो एक अधिकारी को ड्यूटी से हटा दिया गया, क्योंकि उसने खराब गेहूं खरीदने से मना कर दिया था.
खाद्य और आपूर्ति विभाग के अधिकारी ने कहा है कि किसी भी कर्मचारी पर दबाव नहीं डाला जाएगा. उन्होंने कर्मचारियों से कहा है कि वे खरीद का काम बंद न करें. सरकार ने किसानों को भी भरोसा दिया है कि उनका हर दाना खरीदा जाएगा. यानी किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है.
केंद्र सरकार ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है. बारिश से फसल को कितना नुकसान हुआ है, यह देखने के लिए टीम बनाई गई है. कुछ टीमें पंजाब पहुंच चुकी हैं और अलग-अलग जिलों से गेहूं के सैंपल ले रही हैं.
इन सैंपल्स की जांच लैब में की जाएगी और उसके बाद रिपोर्ट बनाई जाएगी. इसी रिपोर्ट के आधार पर तय होगा कि गुणवत्ता के नियमों में ढील दी जाए या नहीं.
अगर केंद्र सरकार नियमों में ढील देती है, तो खरीद का काम फिर से तेज हो सकता है. लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ, तो पंजाब में गेहूं खरीद पर बड़ा संकट आ सकता है.
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ सकता है. इसलिए जरूरी है कि जल्द से जल्द कोई हल निकले, ताकि किसान परेशान न हों और उनकी फसल सही समय पर बिक सके.
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