
महाराष्ट्र में प्याज किसानों की स्थिति इन दिनों बेहद चिंताजनक बनी हुई है. ताजा मामला बीड जिले से सामने आया है, जहां एक किसान को अपनी मेहनत की फसल मात्र 50 पैसे प्रति किलो के भाव पर बेचनी पड़ी. यह घटना ना सिर्फ किसानों की आर्थिक बदहाली को दर्शाती है, बल्कि राज्य में कृषि संकट की गंभीरता को भी उजागर करती है. बीड जिले के अरणवाड़ी गांव के किसान भास्कर शिंगारे ने बताया कि वे 22 मई को अपनी 602 किलो प्याज की खेप लेकर सोलापुर कृषि उपज मंडी समिति पहुंचे थे. उम्मीद थी कि उन्हें फसल का उचित दाम मिलेगा, लेकिन वास्तविकता बेहद निराशाजनक रही. उन्हें पूरी खेप के बदले केवल 301 रुपये मिले, यानी करीब 50 पैसे प्रति किलो.
शिंगारे के मुताबिक, इस फसल को उगाने में मजदूरी, परिवहन और अन्य खर्च मिलाकर कुल लागत 1382 रुपये आई थी. ऐसे में उन्हें लगभग 1082 रुपये का सीधा नुकसान झेलना पड़ा. उन्होंने बताया कि वे इस राशि से अपने छोटे ट्रैक्टर की EMI चुकाने वाले थे, लेकिन अब उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है. उन्होंने कहा, "अगर मैं प्याज को वापस घर ले जाता, तो ढुलाई का खर्च दोगुना हो जाता. इसलिए मजबूरी में जो भाव मिला, उसी पर बेच दिया."
यह समस्या सिर्फ बीड तक सीमित नहीं है. महाराष्ट्र की कई प्रमुख मंडियों में पिछले कुछ दिनों से प्याज के दाम 1 से 2 रुपये प्रति किलो तक गिर गए हैं. अहिल्यानगर, छत्रपति संभाजीनगर, नासिक और सोलापुर जैसे बड़े उत्पादन क्षेत्रों से भी इसी तरह की खबरें सामने आ रही हैं.
नासिक और सोलापुर, जो देश के प्रमुख प्याज उत्पादक केंद्र माने जाते हैं, वहां भी किसान अपनी उपज के लिए न्यूनतम मूल्य पाने के लिए तरस रहे हैं. कई किसानों ने इस तरह के बेहद कम दाम पर बिक्री से इनकार कर दिया, जबकि कुछ को बिक्री के साथ अतिरिक्त खर्च भी उठाना पड़ा.
इस गंभीर स्थिति के विरोध में राज्य भर में किसानों का आंदोलन तेज हो गया है. 26 मई को नासिक जिले में बड़ा विरोध प्रदर्शन हुआ, जिसमें हजारों की संख्या में प्याज उगाने वाले किसानों ने हिस्सा लिया. मुंबई-आगरा नेशनल हाईवे के कई हिस्सों को किसानों ने जाम कर दिया. उनका आरोप है कि सरकार लगातार गिरती कीमतों के बीच किसानों को राहत देने में नाकाम रही है.
यह आंदोलन 'कांदा उत्पादक शेतकरी क्रांति महामोर्चा' के बैनर तले आयोजित किया गया, जिसमें नासिक समेत कई क्षेत्रों के किसान शामिल हुए. नासिक भारत के सबसे बड़े प्याज उत्पादक क्षेत्रों में से एक है, इसलिए यहां के किसानों का आक्रोश विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
इस आंदोलन को विपक्षी गठबंधन ‘महा विकास अघाड़ी’ (MVA) के नेताओं का भी समर्थन मिला. रोहित पवार, हर्षवर्धन सपकाल और अंबादास दानवे जैसे नेताओं ने किसानों के मुद्दों को उठाते हुए सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की.
कम कीमतों के चलते किसानों की आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ रही है. लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है, जिससे कर्ज और मानसिक तनाव दोनों बढ़ रहे हैं. किसानों का कहना है कि अगर जल्द ही सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) या कोई अन्य राहत उपाय नहीं किया, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है.
महाराष्ट्र में प्याज की कीमतों में आई भारी गिरावट ने किसानों को गंभीर संकट में डाल दिया है. लागत से भी कम कीमत मिलने के कारण किसान आर्थिक रूप से टूट रहे हैं. राज्य भर में हो रहे विरोध प्रदर्शन इस बात का संकेत हैं कि समस्या अब विकराल रूप ले चुकी है और तत्काल समाधान की जरूरत है.