
महाराष्ट्र में प्याज की कीमत को लेकर सियासी और कृषि विवाद गहराता जा रहा है. एक तरफ किसान कम भाव मिलने से नाराज होकर सड़कों पर उतर आए हैं, वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने केंद्र द्वारा तय कीमत का बचाव करते हुए विपक्ष के आंदोलन को “राजनीतिक” करार दिया है. मुख्यमंत्री फडणवीस ने मंगलवार को मुंबई में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि केंद्र सरकार ने प्याज की कीमत बढ़ाकर 15 रुपये प्रति किलो कर दी है, जो पहले की तुलना में 3.5 रुपये अधिक है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों की समस्याओं को लेकर संवेदनशील है और इस मुद्दे पर केंद्र के साथ बैठक कर भविष्य का समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है.
हालांकि, जमीन पर स्थिति अलग नजर आ रही है. नासिक समेत कई इलाकों में किसानों का आक्रोश खुलकर सामने आया है. बड़ी संख्या में प्याज उत्पादक किसानों ने ‘कांदा उत्पादक शेतकरी क्रांति महामोर्चा’ के तहत मुंबई-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग को जाम कर दिया. इस दौरान यातायात पूरी तरह बाधित हो गया और पुलिस को दखल देकर कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेना पड़ा.
प्रदर्शन का नेतृत्व महा विकास अघाड़ी (MVA) के नेताओं ने किया. एनसीपी (एसपी) के विधायक रोहित पवार, शिवसेना (यूबीटी) के नेता अंबादास दानवे और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल बैलगाड़ी पर सवार होकर प्रदर्शन में शामिल हुए.
किसानों का आरोप है कि सरकार की ओर से तय 1,580 रुपये प्रति क्विंटल (लगभग 15 रुपये/kg) कीमत बेहद कम है और इससे लागत भी नहीं निकल पा रही है. वे कम से कम 24 रुपये प्रति किलो भाव और 3,000 रुपये प्रति क्विंटल MSP की मांग कर रहे हैं.
रोहित पवार ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान कई किसान भावुक हो गए थे और उनकी आंखों में आंसू थे. उन्होंने बताया कि कई किसान आर्थिक संकट में हैं, कुछ पर कर्ज है, तो कुछ को बच्चों की फीस और इलाज का खर्च उठाना मुश्किल हो रहा है.
कांग्रेस नेता हर्षवर्धन सपकाल ने आरोप लगाया कि बाजार में कुछ किसानों को केवल 200-300 रुपये प्रति क्विंटल तक की दर मिल रही है, जो बेहद चिंताजनक है. उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों पर किसानों के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि केवल घोषणा करने से समस्या हल नहीं होगी, खरीद प्रक्रिया को जमीन पर लागू करना जरूरी है.
विवाद के बीच प्रदर्शनकारियों ने एक अनोखे तरीके से विरोध दर्ज कराया. किसानों के बीच ‘Melody’ टॉफी बांटी गई और तंज कसते हुए कहा गया कि अगर प्याज भी उपहार में दिए जाएं तो शायद उसके दाम भी बढ़ जाएं.
मुख्यमंत्री फडणवीस ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि यह आंदोलन “सौ फीसदी राजनीतिक” है और कुछ लोग केवल “फोटो ऑपर्च्युनिटी” के लिए किसानों का इस्तेमाल कर रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि जिन दलों ने पहले सत्ता में रहते हुए किसानों को बेहतर कीमत नहीं दिलाई, वही अब भावनात्मक मुद्दा बना रहे हैं.
किसानों की प्रमुख मांगों में 3,000 रुपये प्रति क्विंटल MSP तय करना, बेचे गए प्याज पर 1,500 रुपये प्रति क्विंटल सब्सिडी, निर्यात पर लगी रोक हटाना और NAFED की खरीद प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच शामिल है.
मौजूदा हालात ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि किसानों को उनकी उपज का सही दाम कब मिलेगा. जहां सरकार इसे स्थिर बाजार के नजरिए से देख रही है, वहीं किसान इसे अपनी आजीविका का सवाल मानकर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दे रहे हैं.(एजेंसी)