
हरियाणा के झज्जर जिले की झज्जर, मातनहेल और बादली मंडियों में इस समय बहुत ज्यादा मात्रा में गेहूं आ रहा है. किसान अपनी फसल बेचने के लिए बड़ी संख्या में मंडियों में पहुंच रहे हैं. अब तक इन तीनों मंडियों में कुल 7.19 लाख क्विंटल गेहूं आ चुका है. इसमें से 2.80 लाख क्विंटल गेहूं सरकार ने MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) पर खरीदा है, लेकिन केवल 74 हजार क्विंटल गेहूं ही मंडी से उठाया गया है.
सबसे बड़ी समस्या यह है कि जितनी तेजी से गेहूं आ रहा है, उतनी तेजी से उसे मंडी से उठाया नहीं जा रहा है. झज्जर मंडी में 4.11 लाख क्विंटल गेहूं आया, लेकिन सिर्फ 40 हजार क्विंटल ही उठाया गया. वहीं मातनहेल मंडी में 2.11 लाख क्विंटल गेहूं आया, लेकिन सिर्फ 20 हजार क्विंटल ही उठाया गया. इस कारण मंडियों में गेहूं के बड़े-बड़े ढेर लग गए हैं और जगह की कमी हो रही है.
जब गेहूं मंडी में ज्यादा समय तक पड़ा रहता है, तो किसानों को चिंता होने लगती है. अगर बारिश हो जाए या मौसम खराब हो जाए, तो गेहूं खराब भी हो सकता है. किसानों को अपनी फसल बेचने में भी देरी हो रही है, जिससे उन्हें आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
पूर्व मंत्री और कांग्रेस की नेता गीता भुक्कल ने मंडियों का दौरा किया और किसानों से बात की. उन्होंने देखा कि मंडियों में गेहूं के ढेर लगे हुए हैं. उन्होंने कहा कि सरकार ने किसानों के लिए बहुत ज्यादा नियम बना दिए हैं, जिससे उन्हें परेशानी हो रही है.
उन्होंने बताया कि किसानों को ट्रैक्टर पर नंबर प्लेट लगानी पड़ती है, बायोमेट्रिक जांच करानी पड़ती है और समय तय करके ही फसल बेचनी पड़ती है. ये सभी चीजें किसानों के लिए मुश्किल बन रही हैं.
गीता भुक्कल ने कहा कि मंडियों में कई जगह मोबाइल नेटवर्क भी ठीक से काम नहीं करता. इससे OTP आने में दिक्कत होती है और किसान अपनी फसल बेच नहीं पाते. उन्होंने यह भी कहा कि मंडियों में जरूरी सुविधाएं भी ठीक नहीं हैं. इसके अलावा, बेमौसम बारिश के कारण खुले में पड़ा गेहूं खराब होने का खतरा भी बढ़ गया है.
वहीं, झज्जर के डिप्टी कमिश्नर एस. रविंद्र पाटिल ने कहा कि प्रशासन पूरी कोशिश कर रहा है कि किसानों को कोई परेशानी न हो. उन्होंने कहा कि मंडियों में सभी जरूरी सुविधाएं दी जा रही हैं और अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि काम तेजी से किया जाए, ताकि किसानों को परेशानी न हो.
इस पूरी स्थिति में देखा जा सकता है कि मंडियों में गेहूं तो बहुत ज्यादा आ रहा है, लेकिन उसका उठान धीमा है. इससे किसानों को दिक्कत हो रही है. एक तरफ विपक्ष सरकार पर सवाल उठा रहा है, वहीं सरकार कह रही है कि सब कुछ ठीक चल रहा है.
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