
जिस शुगरकेन कंट्रोल ऑर्डर, 2026 के ड्राफ्ट को लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश समेत देश के कई गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में किसान संगठनों का विरोध और किसानों के बीच तरह-तरह की आशंकाएं सामने आ रही थीं, केंद्र सरकार ने उसे वापस ले लिया है. केंद्र सरकार के खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग ने 29 मई 2026 को जारी कार्यालय ज्ञापन में बताया कि राज्य सरकारों और विभिन्न हितधारकों से मिले सुझावों और आपत्तियों के बाद ड्राफ्ट शुगरकेन कंट्रोल ऑर्डर 2026 को फिलहाल वापस लिया जा रहा है और इस पर दोबारा समीक्षा की जाएगी.
दरअसल, केंद्र सरकार ने 20 अप्रैल 2026 को मौजूदा शुगरकेन कंट्रोल ऑर्डर 1966 में बदलाव के उद्देश्य से नया ड्राफ्ट जारी किया था और एक महीने के भीतर राज्यों, चीनी उद्योग, संस्थानों और अन्य पक्षों से सुझाव मांगे थे. इस दौरान कई राज्यों और गन्ना क्षेत्र से जुड़े संगठनों ने प्रस्तावित प्रावधानों पर अपनी राय सरकार को भेजी. इसके बाद सरकार ने माना कि मसौदे पर और व्यापक समीक्षा की जरूरत है.
गन्ना किसानों के बीच इस ड्राफ्ट को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा गन्ने के उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) और भविष्य में भुगतान व्यवस्था पर संभावित असर को लेकर थी. पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान संगठनों और गन्ना उत्पादकों के बीच यह आशंका भी जताई जा रही थी कि नए प्रावधानों से किसानों के हित प्रभावित हो सकते हैं. इसी मुद्दे को लेकर विभिन्न मंचों पर बहस तेज हुई थी और कई सवाल भी उठाए गए थे. 'किसान तक' ने भी विश्लेषणात्मक खबर के माध्यम से किसानों के हक की आवाज मुखर रूप से रखी थी. खबर पढ़ें... इथेनॉल, बायो-गैस और बिजली से बढ़ी मिलों की कमाई तो सिर्फ चीनी रिकवरी से क्यों तय हो रहा गन्ने का दाम?
सरकार की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि ड्राफ्ट शुगरकेन कंट्रोल ऑर्डर 2026 को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाता है. साथ ही संकेत दिए गए हैं कि प्राप्त सुझावों और टिप्पणियों का अध्ययन करने के बाद संशोधित रूप में नया प्रस्ताव तैयार किया जा सकता है.
यह सूचना कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, उपभोक्ता मामले विभाग, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, सहकारिता मंत्रालय और विधि विभाग समेत कई केंद्रीय विभागों को भेजी गई है. इसके अलावा गन्ना उत्पादक राज्यों के प्रमुख सचिवों, कानपुर स्थित राष्ट्रीय शर्करा संस्थान, पुणे के वसंतदादा शुगर इंस्टीट्यूट, चीनी उद्योग संगठनों और देशभर की चीनी मिलों को भी इसकी प्रतियां भेजी गई हैं.
केंद्र सरकार के इस फैसले को गन्ना किसानों और चीनी उद्योग से जुड़े पक्षों की आपत्तियों के बाद उठाया गया महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. फिलहाल पुराने शुगरकेन कंट्रोल ऑर्डर 1966 के प्रावधान ही लागू रहेंगे, जबकि नए मसौदे पर आगे की प्रक्रिया समीक्षा पूरी होने के बाद तय की जाएगी.