
इंडोनेशिया ने मूंगफली के आयात को लेकर नया कोटा सिस्टम लागू किया है, जिससे भारत के निर्यात पर असर पड़ सकता है. इस नए नियम के तहत गुणवत्ता मानकों को और सख्त कर दिया गया है. सबसे बड़ी समस्या यह है कि व्यापारियों को तैयारी के लिए बहुत कम समय मिला है. आमतौर पर ऐसे बदलावों के लिए 90 दिन मिलते हैं, लेकिन इस बार सिर्फ 14 दिन का समय दिया गया, जिससे निर्यातकों के लिए स्थिति मुश्किल हो गई है.
नए नियम के अनुसार, अब इंडोनेशिया को मूंगफली भेजने के लिए किसानों और निर्यातकों को ग्लोबल GAP (Good Agricultural Practices) सर्टिफिकेट लेना होगा. यह सर्टिफिकेट लेना आसान नहीं है और इसमें 3 से 6 महीने तक का समय लग सकता है. ऐसे में अगले कुछ महीनों तक भारत से मूंगफली का निर्यात रुक सकता है.
निर्यात रुकने से बाजार में मूंगफली की कमी हो सकती है, जिससे कीमतों में 60 से 80 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है. कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि दाम दोगुने तक भी हो सकते हैं, क्योंकि इतनी जल्दी कोई देश इन नए नियमों को पूरा नहीं कर पाएगा.
हालांकि यह नियम सभी देशों पर लागू होता है, लेकिन भारत पर इसका असर ज्यादा पड़ेगा, क्योंकि इंडोनेशिया भारत से सबसे ज्यादा मूंगफली खरीदता है. पिछले कुछ वर्षों में भारत की कुल मूंगफली निर्यात का बड़ा हिस्सा इंडोनेशिया को जाता रहा है.
भारत में मूंगफली के निर्यात को बढ़ाने के लिए APEDA (कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण) लगातार प्रयास कर रहा था, लेकिन नए नियमों से इन कोशिशों को झटका लगा है. अब मूंगफली के दाने और छिलके वाली मूंगफली दोनों पर यह नियम लागू होंगे, जबकि भुनी हुई मूंगफली पर यह नियम लागू नहीं है.
इंडोनेशिया पहले भी गुणवत्ता के मुद्दे पर भारत से मूंगफली का आयात रोक चुका है. खासकर अफ्लाटॉक्सिन नाम के तत्व की मात्रा ज्यादा होने पर आपत्ति जताई गई थी. हालांकि भारतीय निर्यातकों का कहना है कि इंडोनेशिया के टेस्टिंग नियम अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार नहीं हैं और इसमें कई खामियां हैं.
कुछ समय पहले निरीक्षण के बाद इंडोनेशिया ने भारत से आयात फिर शुरू किया था, लेकिन साथ ही नियमों को और सख्त कर दिया गया. इससे कई छोटे निर्यातकों ने बाजार से दूरी बना ली. आंकड़ों के अनुसार, 2024-25 में भारत ने कुल 7.46 लाख टन मूंगफली निर्यात की, जिसमें से करीब 2.77 लाख टन इंडोनेशिया को भेजी गई.
मौजूदा हालात को देखते हुए यह साफ है कि आने वाले महीनों में मूंगफली के व्यापार में अनिश्चितता बनी रहेगी. अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो इसका असर किसानों, व्यापारियों और बाजार सभी पर पड़ेगा. साथ ही, भारत के लिए यह जरूरी हो जाएगा कि वह नए बाजार तलाश करे और गुणवत्ता मानकों को और बेहतर बनाए, ताकि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में उसकी स्थिति मजबूत बनी रहे.
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