चीन के साथ GMO विवाद पर विपक्ष का हमला, “बैन के बावजूद GM चावल आया कहां से?”

चीन के साथ GMO विवाद पर विपक्ष का हमला, “बैन के बावजूद GM चावल आया कहां से?”

भारत से चीन भेजे गए नॉन-बासमती चावल में GMO तत्व होने के आरोपों के बाद नया अंतरराष्ट्रीय विवाद खड़ा हो गया है. चीन ने कुछ भारतीय कंपनियों की खेप रोक दी है, जिससे निर्यातकों को नुकसान और भारत की वैश्विक साख पर असर का खतरा बढ़ गया है. ICAR ने इन आरोपों को खारिज किया है, जबकि विपक्ष ने सरकार से जवाब मांगा है.

भारतीय चावल की बढ़ी मांगभारतीय चावल की बढ़ी मांग
क‍िसान तक
  • New Delhi,
  • Apr 29, 2026,
  • Updated Apr 29, 2026, 2:09 PM IST

भारत से चीन भेजे गए नॉन-बासमती चावल को लेकर एक नया अंतरराष्ट्रीय विवाद सामने आया है. चीन ने भारतीय चावल की कुछ खेपों को यह कहकर रोक दिया है कि उनमें जेनेटिकली मॉडिफाइड ऑर्गेनिज्म (GMO) के अंश पाए गए हैं. इस कार्रवाई से भारतीय चावल निर्यातकों को भारी नुकसान का खतरा पैदा हो गया है. दूसरी ओर, इस मामले में विपक्ष ने भी कई सवाल खड़े किए हैं और सरकार से जवाब मांगा है.

छत्तीसगढ़ राइस एक्सपोर्टर्स का केंद्र से गुहार

इस मामले को लेकर छत्तीसगढ़ राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (TREACG) ने केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है. संगठन ने कहा है कि चीन द्वारा तीन भारतीय कंपनियों को अस्थायी रूप से सस्पेंड करना और चावल की खेपों को रोकना गलत और निराधार आरोपों पर आधारित है. निर्यातकों के अनुसार, इस कदम से न केवल कारोबार प्रभावित हुआ है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की साख को भी नुकसान पहुंच सकता है.

बिहार से विपक्ष का सरकार पर हमला

इस मुद्दे पर बिहार के आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह ने केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि चीन का यह कहना कि भारतीय चावल में GMO तत्व पाए गए हैं, सिर्फ व्यापार का मामला नहीं, बल्कि यह भारत की साख और किसानों की मेहनत पर सीधा हमला है. सुधाकर सिंह ने सवाल उठाया, जब भारत में GM चावल की खेती पर प्रतिबंध है, तो यह चावल आया कहां से? क्या देश में चोरी-छिपे GM बीज बेचे जा रहे हैं? क्या सरकार को अपने कृषि तंत्र पर कोई नियंत्रण नहीं रह गया है?

उन्होंने कहा कि सरकार बताए कि बीज किसने दिया, निगरानी किसकी थी और इस पूरे मामले का जिम्मेदार कौन है.

GMO आरोप बना विवाद की जड़

निर्यातकों के मुताबिक, चीन ने भारतीय चावल में GMO अंश होने का हवाला देकर कार्रवाई की है. हालांकि, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने इस आरोप को पूरी तरह खारिज किया है.

ICAR ने साफ कहा है कि भारत में किसी भी तरह के GM चावल की व्यावसायिक खेती को मंजूरी नहीं है. ICAR की किसी भी रिसर्च परियोजना में GMO चावल पर काम नहीं हो रहा है और भारत से निर्यात होने वाला पूरा चावल नॉन-GMO है.

भारत की वैश्विक साख पर असर का डर

निर्यातकों का कहना है कि भारत दुनिया के सबसे बड़े और भरोसेमंद नॉन-GMO चावल सप्लायर्स में से एक है. चीन जैसे बड़े बाजार में इस तरह के आरोप लगने से अंतरराष्ट्रीय कारोबार पर नकारात्मक असर पड़ सकता है.

इसी वजह से राइस एक्सपोर्टर्स ने केंद्र सरकार से मांग की है कि वह कूटनीतिक और व्यापारिक स्तर पर तुरंत हस्तक्षेप करे, ताकि विवाद सुलझे, चावल की खेपें जारी हों और निर्यातकों को हो रहे नुकसान को रोका जा सके. निर्यातकों को उम्मीद है कि सरकार जल्द ठोस कदम उठाकर भारतीय किसानों और चावल उद्योग के हितों की रक्षा करेगी.

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