
मध्यप्रदेश को सरदार सरोवर परियोजना से जुड़े पुनर्वास व्यय के मामले में बड़ी वित्तीय राहत मिली है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि लंबे समय से लंबित इस विवाद का समाधान केंद्र सरकार के प्रयासों से हो गया है. अब राज्य सरकार को करीब 1500 करोड़ रुपये के बजाय केवल 217 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा.
बुधवार को मंत्रिपरिषद की बैठक से पहले अपने संबोधन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल के प्रयासों से लगभग 30 वर्षों से लंबित सरदार सरोवर परियोजना से जुड़े जटिल मुद्दे का सर्वसम्मति से समाधान संभव हुआ है. उन्होंने इस उपलब्धि के लिए प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री और केंद्रीय जलशक्ति मंत्री का आभार व्यक्त किया.
मुख्यमंत्री ने बताया कि सरदार सरोवर परियोजना के पुनर्वास व्यय का मुद्दा मध्यप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के बीच लंबे समय से लंबित था. पुनर्वास लागत के बंटवारे को लेकर स्पष्ट निर्णय नहीं होने से मामला वर्षों तक अटका रहा.
मुख्यमंत्री ने बताया कि फरवरी 2026 में भारत के अटॉर्नी जनरल ने अभिमत दिया था कि पुनर्वास की लागत परियोजना के भागीदार राज्यों के बीच विभाजित की जानी चाहिए.इस व्यवस्था के तहत मध्यप्रदेश पर लगभग 1500 करोड़ रुपये का वित्तीय भार आने की संभावना बन गई थी.
मुख्यमंत्री ने कहा कि नई दिल्ली में हुई बैठक में सभी पक्षों के बीच सहमति बनने के बाद पुनर्वास व्यय के बंटवारे में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया. पहले जहां गुजरात को 50 प्रतिशत खर्च वहन करना था, वहीं अब यह हिस्सा बढ़ाकर 75 प्रतिशत कर दिया गया है.
इस निर्णय के बाद मध्यप्रदेश पर आने वाला वित्तीय भार काफी कम हो गया है और अब राज्य सरकार को केवल 217 करोड़ रुपये का ही भुगतान करना होगा.यह फैसला राज्य के लिए बड़ी आर्थिक राहत माना जा रहा है.
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इस निर्णय से राज्य के हजारों करोड़ रुपये की बचत होगी। इससे विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के समन्वित प्रयासों और चारों राज्यों की सहमति से तीन दशक पुराने इस जटिल विवाद का समाधान संभव हुआ है, जो सहकारी संघवाद का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है.