
बिहार सरकार अब पशुपालन को बड़े किसानों तक सीमित नहीं रखना चाहती. सरकार की तैयारी ऐसे मॉडल पर काम करने की है, जिसमें छोटे और सीमांत किसानों को भी आसानी से डेयरी व्यवसाय से जोड़ा जा सके. इसी सोच के साथ राज्य के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन मंत्री नंद किशोर राम ने 'किसान तक' को दिए अपने इंटरव्यू में बड़ा संकेत दिया है. उन्होंने कहा कि सरकार 15-20 गाय वाले बड़े प्रोजेक्ट की बजाय छोटे किसानों को दो-दो गाय उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रही है, ताकि गांवों में रोजगार बढ़े और पलायन रुके.
उन्होंने कहा कि उनका विभाग गांव तक पहुंचेगा. उनका मानना है कि अगर डेयरी, मत्स्य और पशु संसाधन की योजनाएं गांवों तक पहुंचीं तो दो बड़े बदलाव होंगे, बेरोजगारी कम होगी और पलायन पर ब्रेक लगेगा.
डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन मंत्री ने साफ कहा कि बड़े डेयरी प्रोजेक्ट हर किसान के बस की बात नहीं होती है. इसलिए सरकार छोटे और सीमांत किसानों को ध्यान में रखते हुए नई रणनीति पर काम कर रही है. उन्होंने कहा, "हम 15-20 गायों का प्रोजेक्ट नहीं देंगे. हमारी कोशिश है कि किसानों को दो-दो गाय उपलब्ध कराई जाए. इससे गरीब और छोटे किसान भी डेयरी व्यवसाय शुरू कर सकेंगे.
नंद किशोर राम ने कहा कि गांवों में पहले बड़ी संख्या में पशुधन होता था. गोबर की खाद खेतों में डाली जाती थी, जिससे जमीन की उर्वरता बनी रहती थी. लेकिन अब रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता बढ़ गई है. उन्होंने कहा कि अगर पशुपालन बढ़ेगा तो किसानों को दोहरा फायदा होगा. एक तरफ दूध से नियमित आय होगी, वहीं दूसरी तरफ गोबर से जैविक खाद मिलेगी, जिससे खेतों की सेहत सुधरेगी.
मंत्री ने रासायनिक उर्वरकों के बढ़ते इस्तेमाल पर भी चिंता जताई. उनका कहना था कि लगातार रासायनिक खाद और कीटनाशकों के इस्तेमाल से खेतों की उर्वरा शक्ति घट रही है. उन्होंने कहा, "अगर समय रहते गोबर की खाद का इस्तेमाल नहीं बढ़ाया गया तो एक दिन बिहार की जमीन बंजर होने का खतरा पैदा हो सकता है.
मंत्री ने कहा कि उनका लक्ष्य सिर्फ योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उन्हें गांव तक पहुंचाना है. उन्होंने कहा कि जब विभाग गांवों में सक्रिय होगा, तभी किसानों को योजनाओं का वास्तविक लाभ मिलेगा. उनके मुताबिक, पशुपालन, डेयरी और मत्स्य क्षेत्र को मजबूत बनाकर गांवों में ही रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकते हैं, जिससे बड़ी संख्या में लोगों का दूसरे राज्यों की ओर पलायन भी कम होगा.
विभाग के मंत्री ने 'किसान तक' से खास बातचीत में विभाग के अधिकारियों के तबादलों को लेकर अपने और अपने परिवार पर लगाए जा रहे आरोपों पर भी खुलकर जवाब दिया. उन्होंने कहा, विभाग में कई अधिकारी 10 से 18 वर्षों से एक ही जिले या एक ही स्थान पर पदस्थापित थे. जब ऐसे अधिकारियों का तबादला कर उन्हें दूसरी जगह भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई, तभी से उन पर इस तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं.
मंत्री ने स्पष्ट कहा कि उनके कार्यकाल में अब यह व्यवस्था नहीं चलेगी. चाहे विभाग का बड़ा अधिकारी हो या छोटा कर्मचारी, जो भी लंबे समय से एक ही स्थान पर तैनात है, उसे दूसरे जिले या दूसरे स्थान पर भेजा जाएगा.