
मध्यप्रदेश के गन्ना किसानों, खासकर मुरैना जिले के किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है. भारतीय किसान संघ (बीकेएस) और प्रदेश सरकार के बीच हुई अहम बैठक में मुरैना की बंद पड़ी शुगर मिल को दोबारा शुरू करने और वहां 100 प्रतिशत एथेनॉल यूनिट स्थापित करने पर सहमति बनी है.यदि यह योजना जमीन पर उतरती है तो इससे न केवल गन्ना किसानों को स्थायी बाजार मिलेगा, बल्कि प्रदेश में एथेनॉल आधारित कृषि उद्योग को भी नई गति मिलेगी.
यह जानकारी भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष के. साई रेड्डी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात के बाद दी.उन्होंने कहा कि बैठक में गन्ना किसानों के भुगतान, बंद पड़ी शुगर मिलों के संचालन और एथेनॉल उत्पादन बढ़ाने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई. मुख्यमंत्री ने किसानों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और उनके समाधान के लिए सकारात्मक पहल का भरोसा दिया.
के. साई रेड्डी ने कहा कि केंद्र सरकार की एथेनॉल मिश्रण नीति किसानों के लिए किसी अवसर से कम नहीं है. देश में पेट्रोल में एथेनॉल की हिस्सेदारी बढ़ने के साथ ही गन्ना और मक्का जैसी फसलों की मांग तेजी से बढ़ेगी. इससे किसानों को अपनी उपज के बेहतर दाम मिलेंगे और उनकी आय में स्थायी बढ़ोतरी होगी.
उन्होंने कहा कि भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में भी एथेनॉल नीति की महत्वपूर्ण भूमिका है.यदि एथेनॉल उद्योग का विस्तार होता है तो ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे और कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा.
राष्ट्रीय अध्यक्ष ने E20 पेट्रोल को लेकर सामने आ रही खबरों पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि E20 पेट्रोल के कारण वाहन खराब होने की खबरें तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं.रायपुर उपभोक्ता फोरम के एक फैसले का हवाला देकर पूरे एथेनॉल कार्यक्रम पर सवाल उठाना उचित नहीं है. किसी एक घटना के आधार पर ऐसी धारणा बनाना वैज्ञानिक दृष्टि से भी सही नहीं माना जा सकता.
उन्होंने कहा कि इस तरह की खबरों से किसानों और आम लोगों के बीच अनावश्यक भ्रम पैदा हो रहा है, जबकि एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम पूरी तरह तकनीकी परीक्षण और विशेषज्ञों की सलाह के बाद लागू किया जा रहा है.
के. साई रेड्डी ने किसानों से अपील की कि वे अपनी उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से कम कीमत पर न बेचें.उन्होंने कहा कि यदि किसान संगठित होकर अपनी फसल का उचित मूल्य सुनिश्चित करेंगे तो उनकी आर्थिक स्थिति और मजबूत होगी. भारतीय किसान संघ लगातार किसानों को उनकी उपज का वाजिब मूल्य दिलाने के लिए प्रयासरत है.
उन्होंने कहा कि खेती की बढ़ती लागत आज किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी है. रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर बढ़ती निर्भरता से खेती महंगी होती जा रही है.ऐसे में प्राकृतिक खेती एक बेहतर विकल्प है, जिससे उत्पादन लागत कम होगी, मिट्टी की गुणवत्ता सुधरेगी और लंबे समय में किसानों की आय भी बढ़ेगी.
बैठक में मुरैना जिले के गन्ना किसानों के भुगतान से जुड़ी समस्याओं पर भी विस्तार से चर्चा हुई.भारतीय किसान संघ ने मुख्यमंत्री के समक्ष किसानों के बकाया भुगतान और बंद पड़ी शुगर मिल को दोबारा चालू करने की मांग रखी. इस दौरान मुरैना में बंद शुगर मिल को फिर से शुरू करने तथा वहां 100 प्रतिशत एथेनॉल यूनिट स्थापित करने पर सहमति बनी.
यदि यह परियोजना शुरू होती है तो क्षेत्र के हजारों गन्ना किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए स्थानीय स्तर पर बड़ा बाजार मिलेगा.परिवहन लागत कम होगी, भुगतान की व्यवस्था बेहतर होगी और गन्ना उत्पादन को भी नया प्रोत्साहन मिलेगा.
भारतीय किसान संघ का मानना है कि एथेनॉल आधारित अर्थव्यवस्था, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा और किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने जैसे प्रयास भारतीय कृषि को अधिक आत्मनिर्भर, टिकाऊ और लाभकारी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. संगठन ने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार जल्द ही बैठक में हुई सहमति को अमल में लाएगी, जिससे गन्ना किसानों को वास्तविक लाभ मिल सके.