
आंध्र प्रदेश में इस बार कमजोर मॉनसून ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. राज्य में 1 जून से 15 जुलाई के बीच सामान्य से करीब 48.3 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है. कम बारिश का असर खेती पर साफ दिखाई देने लगा है. राज्य के 24 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है, जबकि चार जिलों में स्थिति और भी गंभीर बनी हुई है. ऐसे में राज्य सरकार ने अधिकारियों को सतर्क रहने और किसानों तक समय पर सलाह पहुंचाने के निर्देश दिए हैं.
कृषि विभाग के विशेष मुख्य सचिव बी. राजशेखर ने बताया कि अल नीनो के प्रभाव के कारण राज्य के कई इलाकों में खेती संकट में है. उन्होंने कहा कि खासकर रायलसीमा क्षेत्र की स्थिति काफी नाजुक है, जहां बारिश की कमी से खरीफ फसलों पर बड़ा असर पड़ सकता है. उन्होंने किसानों को वैज्ञानिक खेती अपनाने और मौसम के अनुसार फसल प्रबंधन करने की सलाह देने पर जोर दिया.
राज्य में किसानों की मदद के लिए बनाए गए 8,489 रायतू सेवा केंद्रों की भी समीक्षा की गई. इनमें से 1,357 केंद्रों को अत्यधिक जोखिम, 2,077 को मध्यम जोखिम और 5,055 को कम जोखिम वाली श्रेणी में रखा गया है. सरकार का कहना है कि इन केंद्रों के जरिए किसानों को मौसम और खेती से जुड़ी जरूरी जानकारी लगातार उपलब्ध कराई जाएगी. मुख्य सचिव जी. साई प्रसाद ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि रायतू सेवा केंद्रों और व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से किसानों तक समय पर सलाह पहुंचाई जाए. उन्होंने कहा कि कम पानी में तैयार होने वाली वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा दिया जाए और जरूरत पड़ने पर किसानों को तुरंत बीज उपलब्ध कराने के लिए सभी जिलों में पहले से पर्याप्त बीज का भंडारण रखा जाए.
सरकार ने किसानों को प्री-मॉनसून ड्राई सोइंग (PMDS) तकनीक अपनाने, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और कम पानी वाली फसलों की खेती करने की सलाह भी दी है. अधिकारियों का मानना है कि इन तरीकों से कम बारिश की स्थिति में भी फसल का नुकसान कुछ हद तक कम किया जा सकता है. बागवानी आयुक्त श्रीनिवासुलु ने बताया कि मिर्च, प्याज, सब्जियां, आम, संतरा और नींबू जैसी बागवानी फसलें अल नीनो के कारण सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकती हैं. पानी की कमी, बढ़ते तापमान और गिरते भूजल स्तर से इन फसलों की पैदावार घटने की आशंका है. इससे बचाव के लिए उन्होंने ड्रिप सिंचाई, खेतों में तालाब बनाने, सूक्ष्म पोषक तत्वों के उपयोग और शेड नेट जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाने की सलाह दी है.
इसके अलावा सरकार ने अधिकारियों को एक्वाकल्चर यानी मछली पालन पर भी विशेष नजर रखने के निर्देश दिए हैं. पानी के स्तर, उसकी क्वालिटी और ऑक्सीजन की मात्रा की लगातार निगरानी करने और संभावित बीमारियों को रोकने के लिए पहले से जरूरी कदम उठाने को कहा गया है, ताकि किसानों और मछली पालकों को नुकसान से बचाया जा सके. (PTI)