Goat Farming: तेजी से बढ़ रही है बकरी पालन करने वालों की संख्या, ये हैं वो 20 वजह

Goat Farming: तेजी से बढ़ रही है बकरी पालन करने वालों की संख्या, ये हैं वो 20 वजह

Goat Farming सरकारी आंकड़ों पर जाएं तो पशुपालन लोन के लिए आने वाले आवेदन में 80 फीसद बकरी पालन के लिए होते हैं. एनिमल एक्सपर्ट इसके पीछे की वजह का जिक्र करते हुए बताते हैं कि बकरी पालन आज सबसे सस्ता और आसान है. ये कम से कम जगह और लागत में शुरू हो जाता है. दूसरा ये कि इससे मुनाफा भी खूब होता है. 

नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Jul 18, 2026,
  • Updated Jul 18, 2026, 9:00 AM IST

पहले के मुकाबले बकरी के दूध की डिमांड बढ़ी है. अब तो बकरी के दूध का पाउडर भी बनने लगा है. देश की कुछ बड़ी डेयरी कंपनियां बकरी का पैक्ड दूध भी बेचने लगी हैं. लेकिन ये भी सच्चाई है कि आज भी बकरी के दूध से ज्यादा उसके मीट का कारोबार होता है. यहां तक की साल में एक बार सबसे ज्यादा होने वाली बकरों की बिक्री भी बकरीद पर कुर्बानी के लिए होती है. अब क्योंकि दूध की भी डिमांड बढ़ने लगती है तो बकरी पालन करने वालों की संख्या भी बढ़ रही है. 

दूध के मामले में तो अब ऐसा भी है कि कई बड़ी बीमारियों में डॉक्टर भी बकरी का दूध इस्तेमाल करने की सलाह रहे हैं. डिमांड के चलते आज गांव ही नहीं शहर में भी बकरी पालन बढ़ रहा है. सरकारी बकरी पालन ट्रेनिंग सेंटर में भी 8वीं पास से लेकर बीए, एमबीए, इंजीनियरिंग, पीएचडी आदि की डिग्री लेकर लोग कोर्स करने आ रहे हैं. 

सस्ता और आसान है बकरी पालन करना 

  • बकरियों के लिए चारे का इंतजाम करने में परेशानी नहीं होती.   
  • बकरियां गाय-भैंस के मुकाबले 20 फीसद ही चारा खाती हैं.
  • बकरी और इंसानों की खुराक में कोई समानता नहीं है इसलिए लागत कम आती है. 
  • जैसे पोल्ट्री फीड में शामिल मक्का-सोयाबीन इंसान भी खाते हैं, इसलिए दाम बढ़े हुए रहते हैं.  
  • सबसे ज्यादा मुनाफा बकरी के बच्चों से होता है. बकरी एक बार में दो से चार तकए बच्चे देती है. 
  • बकरी शरीर से मजबूत होती है तो दूसरे पशुओं के मुकाबले कम बीमारी लगती हैं. 
  • बकरियों को कम बीमारी लगती हैं जिससे लागत कम हो जाती है. 
  • बकरी का दूध आसानी से पचने और मेडिशन वैल्यू वाला होता है. 
  • बकरी के दूध से आने वाली अजीब से गंध को भी कंट्रोल कर लिया गया है. 
  • बकरी के दूध में अमीनो एसिड जैसे हिस्टिडीन, एस्पार्टिक एसिड, फेनिलएलनिन और थ्रेओनीन होते हैं. बकरी के दूध में खनिज जैसे सोडियम, आयरन, कॉपर भरपूर मात्रा में होते हैं. 
  • बकरी के दूध में विटामिन ए, निकोटिनिक एसिड और कोलीन भरपूर मात्रा में होते हैं.
  • चमड़े के लिए बकरी की खाल उच्च गुणवत्ता वाली होती है. 
  • ब्लैक बंगाल बकरी की खाल दुनिया में सबसे अच्छी गुणवत्ता वाली मानी जाती है. 
  • बकरे का मीट बहुत स्वादिष्ट, पौष्टिक और स्वास्थ्यवर्धक होता है.
  • पहाड़ी इलाकों की बकरी के बाल जैसे पश्मीना और मोहायर की कीमत बहुत ज्यादा है.  
  • बकरी के मल-मूत्र में एनपीके की मात्रा ज्यादा होती है, इससे खेत में मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है. 
  • बकरियां कम जगह में और दूसरे पशुओं के साथ आराम से रह लेती हैं. 
  • जमीन पर जगह कम हो तो अच्छी ग्रोथ के साथ बकरियों को छत पर भी पाला जा सकता है.
  • जरूरी नहीं है कि बकरियों को खुले में चराने के लिए ले जाया जाए. 
  • बकरियों की ज्यादातर नस्ल अब स्टॉल फीड पर ही पल जाती हैं.
  • पालने के लिए  बकरियां आसानी से मिल जाती हैं. गाय-भैंस के मुकाबले सस्ती भी होती हैं. 
  • बकरियों की 39 नस्ल हैं जो हर तरह के मौसम में पल जाती हैं. 
  • दूध-मीट और ब्रीडिंग के लिए बकरियां पालकर मोटा मुनाफा कमाया जा सकता है.

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