
मध्य प्रदेश की तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में नर्मदा ने अपना रौद्र रूप दिखाया जिससे यहां भीषण तबाही मची. केवल नर्मदा घाट और उसके किनारे की दुकानें डूबीं बल्कि यहां मुख्य बाज़ार तक में पानी घुसा जिससे बहुत नुकसान हुआ. बारिश थमने के बाद नर्मदा तो शांत हुई है लेकिन अब यहां के स्थानीय निवासियों की आंखों में गुस्सा है, आंसू है.
यहां के लोगों का प्रशासन पर खुला आरोप है कि प्रशासन की हठधर्मिता और गैर ज़िम्मेदाराना बर्ताव के कारण यह त्रासदी हुई है. यहां डैम को सिर्फ इसलिए भरते चले गए कि मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के लिए ओंकार पर्वत पर वाहन से जाने के लिए बनाई गई पुलिया पर पानी न आए.
इसके बाद ओंकारेश्वर में बीते दिन नर्मदा का रौद्र रूप सामने आया. बाढ़ ने खासा तांडव मचाया. यहां न सिर्फ़ घाट डूबे, घाट की दुकानें डूबीं, नावें बहीं बल्कि बहुत ऊंचाई पर ओंकारेश्वर मुख्य मंदिर के प्रवेश द्वार के पहले का पूरा बाज़ार डूब गया.
दुकानों में पानी भर गया. यहां जो कुछ भी बिक्री के लिए रखा था वो सब नर्मदा को भेंट चढ़ गया. जिन दुकानों में भगवान की मूर्तियां, पूजन सामग्री, पीतल या अन्य धातु की मूर्तियां, अन्य कीमती सामग्री या आर्टिफिशियल ज्वेलरी सजी रहती थीं, वे सब आज खाली दिख रही हैं.
यहां के बाज़ार में सन्नाटा पसरा हुआ है. लोगों के चेहरे पर दुःख से ज़्यादा गुस्सा दिख रहा है. लेकिन इसे पढ़ने-सुनने वाला कोई नहीं है. अब जब कुछ सरकारी अधिकारी, कर्मचारी नुकसाना के सर्वे के नाम पर आ रहे हैं तो लोगों का गुस्सा फूट रहा है.
लोगों का गुस्सा इस बात को लेकर है कि आखिर नर्मदा का पानी क्यों रोक कर रखा गया. क्या सिर्फ इसलिए कि मुख्यमंत्री का कार्यक्रम होना था. लोग पूछ रहे हैं अगर कोई बड़ी त्रासदी हो जाती तो इसका जिम्मा कौन लेता.
यहां की तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि किस कदर ओंकार की पहाड़ियों पर तबाही मची है. लोगों का सारा समान खराब हो गया है. यहां तक कि घर के सामान भी बर्बाद हो गए हैं. लोग अपने को बेघर महसूस कर रहे हैं और प्रशासन पर गुस्सा जाहिर कर रहे हैं.