
महाराष्ट्र के जालना जिले में इस समय भीषण गर्मी और पानी की भारी कमी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. मौसंबी, नींबू, अनार और अमरूद जैसे फलों के बाग अब सूखने की कगार पर पहुंच गए हैं. किसान हजारों रुपये खर्च कर टैंकर के पानी से अपने बागों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं.
जालना जिले में लगातार तापमान बढ़ रहा है. तेज धूप और लू के कारण कुओं और बोरवेल का पानी तेजी से कम हो गया है. इसका सीधा असर फलों के बागों पर दिखाई दे रहा है. पेड़ों पर लगे फल सूख रहे हैं और जमीन में नमी खत्म होती जा रही है.
जालना जिले में करीब 38 हजार 740 हेक्टेयर क्षेत्र में फलों की खेती की जाती है. सबसे ज्यादा मौसंबी की खेती होती है, जो लगभग 29 हजार 545 हेक्टेयर में फैली हुई है. इसके अलावा अनार, नींबू, चीकू, केला, अंगूर, अमरूद और आम की खेती भी बड़े स्तर पर की जाती है.
जामवाड़ी इलाके में मौसंबी, अनार और नींबू के बाग तेजी से सूख रहे हैं. तेज गर्मी के कारण पेड़ों से फल लगातार गिर रहे हैं. इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है. कई किसानों का कहना है कि अब तक उन्हें करीब 50 प्रतिशत तक नुकसान हो चुका है.
किसानों के मुताबिक एक टैंकर पानी मंगवाने में 2 से 3 हजार रुपये तक खर्च हो रहे हैं. सप्ताह में दो से तीन बार टैंकर बुलाने पड़ रहे हैं. इससे खेती की लागत बहुत बढ़ गई है. इसके बावजूद फलों की गिरावट रुक नहीं रही है और किसान काफी परेशान हैं.
जिले में ईंधन संकट का असर अब पानी के टैंकरों पर भी दिखने लगा है. डीजल की कमी के कारण समय पर टैंकर नहीं मिल पा रहे हैं. कई किसानों को घंटों इंतजार करना पड़ता है, फिर भी उन्हें जरूरत के हिसाब से पानी नहीं मिल रहा है.
कृषि विभाग ने किसानों को कई जरूरी सुझाव दिए हैं. अधिकारियों ने खेतों में मल्चिंग यानी आच्छादन करने को कहा है, ताकि जमीन में नमी बनी रहे. साथ ही रासायनिक खाद कम इस्तेमाल कर जैविक खाद अपनाने की सलाह दी गई है.
कृषि विभाग ने किसानों से कहा है कि वे सुबह और शाम के समय ही पेड़ों को पानी दें. दोपहर की तेज धूप में सिंचाई करने से बचने को कहा गया है. इसके अलावा सूखी शाखाओं की कटाई और ड्रिप सिंचाई पद्धति अपनाने की भी सलाह दी गई है.
जालना जिले के 32 गांव और 27 वाडियां इस समय जलसंकट का सामना कर रही हैं. करीब 94 हजार 368 लोगों को 57 टैंकरों के जरिए पानी पहुंचाया जा रहा है. प्रशासन ने पानी की व्यवस्था के लिए कई कुओं का अधिग्रहण भी किया है.
एक तरफ तेज गर्मी, दूसरी तरफ पानी की भारी कमी और बढ़ता खर्च… इन सबके कारण किसान परेशान और निराश नजर आ रहे हैं. किसानों ने सरकार से मांग की है कि नुकसान का जल्द सर्वे किया जाए और प्रभावित किसानों को आर्थिक मदद दी जाए, ताकि वे अपने बाग और खेती को बचा सकें. (गौरव विजय साली का इनपुट)