
World Cotton Day हर साल 7 अक्टूबर को मनाया जाता है. संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अगस्त 2021 में 7 अक्टूबर को विश्व कपास दिवस घोषित किया था. इसका मकसद कपास की वैश्विक अहमियत और इससे जुड़े किसानों, मजदूरों और उद्योगों की भूमिका को सामने लाना है. कपास दुनिया की सबसे जरूरी प्राकृतिक फसलों में से एक है. लाखों किसान और उनके परिवार कपास की खेती और इससे जुड़े काम पर निर्भर हैं. कई देशों के लिए कपास निर्यात से होने वाली कमाई भी महत्वपूर्ण है. इसलिए इस दिन कपास की खेती में होने वाली समस्याओं और संभावनाओं पर चर्चा की जाती है.
कपास क्षेत्र के सामने मौसम में बदलाव, सप्लाई चेन में रुकावट, सिंथेटिक फाइबर से बढ़ती प्रतिस्पर्धा (Competition) और बाजार में बदलती मांग जैसी चुनौतियां हैं. ऐसे में खेती से लेकर कपड़ा बनाने तक पूरी वैल्यू चेन को मजबूत और टिकाऊ बनाने की जरूरत है. नई तकनीक, रिसर्च, डिजिटलाइजेशन और बेहतर निवेश इसमें मदद कर सकते हैं.
दुनिया में करीब 2.4 करोड़ किसान कपास उगाते हैं और इसकी पूरी वैल्यू चेन करीब 12.5 करोड़ लोगों को रोजगार देती है. इसलिए कपास की कीमत, उत्पादन और बाजार में होने वाले बदलाव का सीधा असर बड़ी संख्या में किसानों और कामगारों पर पड़ता है.
विश्व कपास दिवस 2026 का छठा वैश्विक आयोजन 7 अक्टूबर को उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में होने जा रहा है. इसमें सरकारों, किसानों, कपास और टेक्सटाइल कंपनियों, शोधकर्ताओं और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे.
इस साल के कार्यक्रम का मुख्य फोकस आर्थिक अवसर पैदा करने, ग्रामीण समुदायों को मजबूत करने, टिकाऊ विकास और साझा समृद्धि पर है. इसमें व्यापार, इनोवेशन, वैल्यू एडिशन, निवेश और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा की जाएगी.
कपास क्षेत्र को आगे बढ़ाने के लिए सिर्फ उत्पादन बढ़ाना काफी नहीं है. किसानों की आय, पर्यावरण, रोजगार, महिलाओं और युवाओं की भागीदारी, स्थानीय स्तर पर वैल्यू एडिशन और बेहतर बाजार व्यवस्था पर भी ध्यान देना जरूरी है. यही वजह है कि विश्व कपास दिवस कपास को सिर्फ एक फसल के तौर पर नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आजीविका से जुड़े क्षेत्र के रूप में देखने का मौका देता है.
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