
अमेरिका ने ईरान की वर्षों से फ्रीज की हुई अरबों डॉलर की संपत्ति के इस्तेमाल को लेकर नई योजना सामने रखी है. यह पहल ऐसे समय में आई है जब खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष समाप्त करने के लिए दोनों देशों के बीच अंतिम समझौते की दिशा में बातचीत जारी है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण विदेशों में रुकी हुई ईरानी संपत्ति का इस्तेमाल अमेरिकी कृषि उत्पाद खरीदने में किया जाएगा और यही सामान बाद में ईरान भेजा जाएगा.
व्हाइट हाउस में कृषि से जुड़े एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करते समय राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने किसानों को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि अमेरिका दुनिया भर में अपने कृषि निर्यात के लिए नए बाजार खोल रहा है और अब एक नया बाजार ईरान के रूप में सामने आ सकता है. ट्रंप ने कहा कि ईरान खाद्य संकट का सामना कर रहा है और अमेरिका उसकी फ्रीज हुई राशि का इस्तेमाल बड़ी मात्रा में गेहूं, सोयाबीन और मक्का खरीदने में करेगा. उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया जल्द शुरू होगी और इसका दायरा काफी बड़ा हो सकता है.
अगर अमेरिकी प्रस्ताव लागू होता है तो लगभग 12 अरब डॉलर की राशि अमेरिका और ईरान के बीच सीमित व्यापारिक संबंधों में प्रवेश कर सकती है. फिलहाल दोनों देशों के बीच व्यापार मुख्य रूप से मानवीय जरूरतों से जुड़े सामान तक सीमित है. कभी दोनों देश एक-दूसरे के महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार थे, लेकिन पिछले करीब पांच दशकों में संबंध लगातार खराब होते गए और अब दोनों एक-दूसरे के प्रमुख प्रतिद्वंद्वी माने जाते हैं.
हालांकि, अमेरिका की ओर से इस योजना को आगे बढ़ाने की बात कही जा रही है, लेकिन ईरान ने अब तक इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है. तेहरान का कहना है कि उसकी मुक्त होने वाली संपत्ति का इस्तेमाल देश की जरूरतों के अनुसार आवश्यक वस्तुओं की खरीद के लिए किया जाएगा और इस पर किसी दूसरे देश की शर्तें स्वीकार नहीं होंगी. इससे यह भी साफ हो गया है कि दोनों पक्ष अभी इस बात पर सहमत नहीं हैं कि अंतिम समझौते में क्या तय हुआ है.
सोमवार को स्विट्जरलैंड में शांति वार्ता का पहला दौर आयोजित किया गया था. इससे पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले सप्ताह वर्साय में अमेरिका-ईरान समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे. इस समझौते में कुछ शर्तों के साथ ईरान की 12 अरब डॉलर की जमी हुई संपत्ति जारी करने का प्रावधान रखा गया है. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि अगर ईरान की जमी हुई संपत्ति जारी होती है तो उसका उपयोग ऐसा होगा, जिससे अमेरिकी किसानों को आर्थिक लाभ मिलेगा और ईरान के लोगों तक भोजन पहुंचाया जा सकेगा.
इसके अगले दिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि अमेरिकी वित्त मंत्रालय जिन राशि और प्रतिबंधों में राहत दे रहा है, वह धन अमेरिकी नियंत्रण वाले एस्क्रो खाते में रहेगा. उन्होंने कहा कि इस राशि का इस्तेमाल केवल अमेरिका से खाद्य सामग्री और चिकित्सा आपूर्ति खरीदने के लिए किया जाएगा. ट्रंप ने विशेष रूप से मक्का, गेहूं और सोयाबीन का जिक्र करते हुए कहा कि यह सामान ईरान को तत्काल जरूरत के आधार पर उपलब्ध कराया जाएगा. उन्होंने इसे मानवीय संकट बताते हुए कहा कि बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है.
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने अमेरिकी दावे को अस्वीकार करते हुए कहा कि ईरान की संपत्ति पूरी स्वतंत्रता के साथ जारी की जाएगी और उसका उपयोग देश अपनी जरूरतों के अनुसार किसी भी वस्तु या कमोडिटी की खरीद में करेगा. उन्होंने कहा कि अगर कृषि उत्पाद खरीदे भी जाएंगे तो उनका फैसला केवल कीमत और गुणवत्ता के आधार पर होगा, न कि वाशिंगटन द्वारा तय की गई शर्तों पर.
इस्माइल बघाई ने कहा कि यह दिलचस्प है कि जिस युद्ध का उद्देश्य ईरानी सभ्यता को नष्ट करना और ईरान को कमजोर करना बताया गया था, अब उसी प्रक्रिया का मकसद अमेरिकी किसानों को समृद्ध बनाना बताया जा रहा है. जेनेवा में ईरान के राजदूत अली बहरेनी ने भी अमेरिकी दावे को खारिज किया. उन्होंने कहा कि ईरान की संपत्ति के उपयोग का निर्णय केवल ईरान करेगा और इस बारे में किसी अन्य देश का अधिकार नहीं है.
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ताजा बयान के बाद यह सवाल और गहरा गया है कि आखिर ईरान की जमी हुई संपत्ति का अंतिम इस्तेमाल किस तरह होगा. इस मुद्दे पर दोनों देशों के अलग-अलग रुख के कारण शांति वार्ता के दौरान यह विषय आगे चलकर एक नया विवाद का कारण भी बन सकता है.